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शौर्य प्रशिक्षण शिविर पर विरोधियों का निशाना

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने सेक्टर-12 के सरस्वती शिशु मंदिर में 21 से 27 मई तक एक शौर्य प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था।

नोएडा | May 30, 2016 6:30 AM
हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेते बजरंग दल के कार्यकर्ता। (Photo Source : ANI)

केंद्र की मोदी सरकार एक ओर अपनी दो साल की उपलब्धियां गिनाने और जश्न मनाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर विहिप और बजरंग दल अपने शौर्य और ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के नोएडा में संपन्न हुआ शौर्य प्रशिक्षण शिविर इसकी बानगी है जो न केवल प्रदेश में सत्ताधारी सपा बल्कि ज्यादातर राजनीतिक दलों और संगठनों के निशाने पर रहा है।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने सेक्टर-12 के सरस्वती शिशु मंदिर में 21 से 27 मई तक एक शौर्य प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था। यह शिविर 28 मई को दीक्षांत समारोह के बाद संपन्न हुआ। दीक्षांत समारोह में विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मेरठ के 22 जिलों के कुल 237 विद्यार्थियों और 30 प्रशिक्षकों ने इस शिविर में भाग लिया। शिविर में भाग लेने वाले 18 से 25 साल की उम्र के विद्यार्थियों को लाठी चलाना, रस्सी पर चलना, निशानेबाजी, योग समेत आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। इसके अलावा बौद्धिक सत्रों में विद्यार्थियों को देश के गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी गई।

दूसरी ओर, विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के पदाधिकारियों ने शिविर पर आंतक फैलाने का आरोप लगाकर प्रशासन से इसकी शिकायत भी की। शिकायत मिलने के बाद एलआइयू (स्थानीय खुफिया एजंसी) और नोएडा पुलिस की टीम भी आयोजन स्थल पर पहुंची, लेकिन शिविर बगैर किसी विवाद के संपन्न हो गया।

विरोधियों ने इस आयोजन को दूसरे समुदायों को डराने और आगामी चुनावों को प्रभावित करने की मंशा बताया है। उनका आरोप है कि पहली बार किसी शिविर में खुले आम हथियारों का प्रदर्शन किया गया है, जिसकी मुख्य वजह केंद्र में भाजपा की सरकार होना है। वहीं भाजपा और विहिप ने इन आरोपों को निराधार बताया है। भाजपा पदाधिकारियों के मुताबिक, नौजवानों को मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण हर साल आयोजित किए जाते हैं। हालांकि इस बार केंद्र में भाजपा की सरकार और प्रदेश चुनाव को देखते हुए विरोधी इसे बेवजह मुद्दा बना रहे हैं।

विहिप परिषद की नोएडा इकाई के अध्यक्ष उमानंद कौशिक ने बताया कि ऐसे शिविर उत्तर प्रदेश समेत देश के सभी हिस्सों में आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में तीन जगहों अवध प्रांत में फैजाबाद व अयोध्या, काशी प्रांत में बरेली और मेरठ प्रांत में नोएडा में इनका आयोजन किया गया है। शिविर में हथियारों का कतई इस्तेमाल नहीं किया गया है। बल्कि बंदूक की जगह टॉय गन और तलवार की जगह पर लोहे की पत्ती प्रयोग में लाई गई है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आत्मरक्षा के गुर सिखाना है।

इससे पहले 2003 और 2011 में भी नोएडा में ऐसे शिविर आयोजित हो चुके हैं। प्रशिक्षण के अंत में लिखित परीक्षा भी आयोजित की गई, जिसे 237 में से करीब 200 विद्यार्थियों ने उत्तीर्ण किया। ऐसे शिविरों में भाग लेने के लिए कार्यकर्ता को वर्षों तक संगठन की सेवा कर खुद को साबित करना होता है। नोएडा के 1487 सदस्यों में से केवल 17 ही प्रशिक्षण में भाग ले पाए हैं। गर्मियों की छुट्टियों के दौरान ऐसे शिविरों का आयोजन इसलिए किया जाता है, ताकि परिसर खाली मिल सके।

(आशीष दुबे)

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