राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में सार्वभौमिक एकता का संदेश दिया था। इसके एक हफ्ते के बाद, विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र में नवरात्रि उत्सव के दौरान मुसलमानों को गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में भाग लेने से रोकने और उपस्थित लोगों पर सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है।
संगठन ने आयोजकों के लिए क्या करें और क्या न करें की लिस्ट भी जारी की है। इसमें आने वालों के आधार कार्ड की जांच और उनकी हिंदू पहचान पक्की करने के लिए माथे पर तिलक लगाने की बात कही गई है।
राज्य भर में नवरात्रि के कार्यक्रमों में मुसलमानों की भागीदारी पर प्रतिबंध के बारे में बात करते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा, “हमने नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा-डांडिया नृत्य में मुसलमानों की भागीदारी की अनुमति न देने का निर्णय लिया है।”
यह त्योहार देवी की पूजा का त्योहार- श्रीराज नायर
श्रीराज नायर ने तर्क दिया, “नवरात्रि का त्योहार सिर्फ गीत-नृत्य का त्योहार नहीं है। यह त्योहार देवी की पूजा का त्योहार है। जो मुसलमान मूर्ति पूजा के विरोधी हैं, उन्हें इस त्योहार में क्यों भाग लेना चाहिए।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि नवरात्रि के कार्यक्रमों में मुसलमानों को शामिल होने की अनुमति न देने का मतलब यह नहीं है कि विश्व हिंदू परिषद किसी भी समुदाय के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, “विश्व हिंदू परिषद मानती है कि त्योहार हिंदुओं की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं और वह इसे कमजोर नहीं होने दे सकती। हालांकि, वह यह स्वीकार करती है कि ये प्रतिबंध एहतियाती उपाय हैं और मुसलमानों या किसी अन्य समुदाय के खिलाफ निर्देशित नहीं हैं।”
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या कहा था?
ठीक एक हफ्ते पहले आरएसएस प्रमुख ने मैडिसन स्क्वायर में एक सभा को संबोधित करते हुए जोर देकर कहा, “यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। यदि आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। प्रत्येक मनुष्य का अपना सम्मान है। मनुष्यों में कोई भेद नहीं है।”
हम आरएसएस प्रमुख के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करते- नायर
जब वीएचपी नेता का ध्यान आरएसएस प्रमुख के बयान की ओर दिलाया गया, तो उन्होंने कहा, “हम आरएसएस प्रमुख के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करते।” इसके अलावा, नायर ने स्पष्ट किया, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। हम सामाजिक सद्भाव और शांति में विश्वास रखते हैं।” उन्होंने कहा, “सवाल यह है कि हमें उन मुसलमानों के लिए अपने दिशानिर्देशों में ढील क्यों देनी चाहिए जो हमारी धार्मिक मान्यताओं और पूजा शैली को नहीं मानते?”
उन्होंने कहा, “अगर मुसलमान नवरात्रि उत्सव में भाग लेने के इच्छुक हैं, तो उन्हें अपने परिवार के सदस्यों, पत्नियों और बहनों के साथ आना चाहिए। उन्हें नवरात्रि उत्सव मस्जिदों या अपने निवास स्थानों पर आयोजित करना चाहिए।”
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