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कार-मोटरसाइकिल मॉडिफाई करने वालों पर शिकंजा? सुप्रीम कोर्ट ने दी अहम राय

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि किसी भी वाहन की मूल विशेषताओं में बदलाव नहीं किया जा सकता जिनका उल्लेख उसके पंजीकरण में किया गया है।

Author नई दिल्ली | January 10, 2019 10:28 AM
शीर्ष अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम के एक संशोधित प्रावधान का जिक्र किया और कहा कि इसका ‘स्पष्ट आशय’ यह है कि किसी वाहन में इतने बदलाव नहीं किये जा सकते कि पंजीकरण प्रमाणपत्र में उल्लेखित चीजें निर्माता द्वारा निर्दिष्ट मूल विशेषताओं से अलग हों।

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि किसी भी वाहन की मूल विशेषताओं में बदलाव नहीं किया जा सकता जिनका उल्लेख उसके पंजीकरण में किया गया है। शीर्ष अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम के एक संशोधित प्रावधान का जिक्र किया और कहा कि इसका ‘स्पष्ट आशय’ यह है कि किसी वाहन में इतने बदलाव नहीं किये जा सकते कि पंजीकरण प्रमाणपत्र में उल्लेखित चीजें निर्माता द्वारा निर्दिष्ट मूल विशेषताओं से अलग हों। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति विनीत सरण की पीठ ने एक फैसले में कहा, ‘‘किसी वाहन में बदलाव नहीं किया जा सकता। ऐसी चीजों को नहीं बदला जा सकता जिनका वाहन निर्माता ने रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र में दर्ज करने के मकसद से इस्तेमाल किया है।’’ कानून के प्रावधानों के अनुसार यहां बदलाव से आशय वाहन की आधारभूत विशेषताओं में परिवर्तन से है।

शीर्ष अदालत ने केरल उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के फैसले को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि केरल मोटर वाहन नियम, 1989 के प्रावधानों के अनुरूप संरचना में बदलाव स्वीकार्य हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई अपने वाहन में इतने संशोधन नहीं करा सकता कि निर्माता के बनाए वाहन की मूल खूबियां ही बदल जाएं। कोर्ट के मुताबिक वाहन के रजिस्ट्रेशन में बताई जाने वाली खूबियों में बदलाव किया जाना नियमों के खिलाफ है। अदालत के फैसले से केरल मोटल वाहन एक्ट के प्रावधान के तहत वाहन के बेसिक फीचर्स में अब कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। गौरतलब है कि केरल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि केरल मोटर वेहिकल रूल्स, 1989 के प्रावधानों के तहत वाहनों में ढांचागत बदलाव किए जा सकते हैं। लेकिन अब सुप्रीट कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट का फैसला रद्द कर नया निर्देश दिया है।

भाषा के इनपुट के साथ।

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