असम में आई भयंकर बाढ़ की वजह से अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ का असर पड़ोसी राज्य मेघालय की राजधानी शिलांग में भी देखने को मिल रहा है।
बाढ़ की वजह से शिलांग और इसके आसपास के इलाकों में सब्जियां बहुत ज्यादा महंगी हो गई हैं।
शिलांग टाइम्स के मुताबिक, इयूदुह (बारा बाजार), लैतुमखराह, लाबान और पोलो सहित प्रमुख बाजारों का दौरा करने पर पता चलता है कि सब्जियों की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, शहर में आने वाली सब्जियों की मात्रा भी कम हो गई है।
असम से पूरे मेघालय खासकर शिलांग में बड़े पैमाने पर सब्जियां लाई जाती हैं। शिलांग टाइम्स के मुताबिक, सब्जी बेचने वाले एक शख्स ने बताया कि पहले की तुलना में सब्जी की आपूर्ति बहुत कम हो गई है। सब्जी उत्पादकों को बाढ़ से काफी परेशानी हुई है।
आम लोगों की जेब पर पड़ रहा असर
बाढ़ की वजह से सड़कें टूट गई हैं। कई लोग बाढ़ग्रस्त इलाकों से बचने के लिए लंबे रास्तों से जा रहे हैं और इस वजह से सब्जियों की ढुलाई में आने वाला खर्च भी बढ़ गया है। इससे व्यापारियों को तो नुकसान हो ही रहा है और अंत में इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
टमाटर, प्याज, आलू, बीन्स, पत्ता गोभी, फूलगोभी, गाजर, हरी मिर्च और पत्तेदार सब्जियां काफी महंगी हो गई हैं। हरी मटर की कीमत इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि लोग इसे खरीद ही नहीं रहे हैं और दुकानदारों ने भी इसे रखना बंद कर दिया है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहक हरी मटर की कीमत सुनकर इसे नहीं खरीदते।
400 रुपये प्रति किलो हुई हरी मटर
फूलगोभी की कीमत 100 रुपये, बीन्स 120 रुपये, गाजर 120 रुपये और बैंगन भी 120 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। हरी मटर की कीमत 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
व्यापारियों का कहना है कि अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो सब्जियों की कीमतें और भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी। लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि बाढ़ का पानी कब कम होगा।
आम लोगों का कहना है कि सब्जियों की बढ़ी हुई कीमत की वजह से उनका घरेलू खर्च पूरी तरह गड़बड़ा गया है। ऐसे में लोग केवल जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं या फिर जो भी उन्हें सस्ता मिल रहा है वही ले रहे हैं।
13 जिलों में 1.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है कि 13 जिले – शिवसागर, गोलाघाट, नागांव, होजई, सोनितपुर, धेमाजी, दरांग, बिस्वनाथ, कामरूप (एम), लखीमपुर, उदलगुरी, जोरहाट और चराइदेव बाढ़ से प्रभावित हैं। बुलेटिन के अनुसार, राज्य में 1,55,849 लोग इससे प्रभावित हुए हैं।
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असम के लोअर असम इलाके में बाढ़ लगभग हर साल बाढ़ आती है। कभी कम तबाही मचाती है तो कभी भारी नुकसान पहुंचाती है लेकिन अपर असम इस तरह की स्थिति का आदी नहीं है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
