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करप्शन: ‘मीडिया पर पाबंदी’ वाले बिल पर बैकफुट पर वसुंधरा राजे, सिलेक्ट कमिटी के पास भेजा विधेयक

गुलाब चंद कटारिया ने दंड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (Express Photo/Rohit Jain Paras)

राजस्थान विधानसभा में सोमवार को गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने विपक्ष के भारी हंगामे के बाद दंड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। बैठक शुरू होते ही विपक्ष ने किसानों की पूर्ण कर्ज माफी का मुद्दा उठाया और हंगामा शुरू कर दिया। इसी बीच गृहमंत्री कटारिया ने दंड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। कटारिया ने कहा कि प्रवर समिति अपनी रिपोर्ट विधानसभा के अगले सत्र में पेश करेगी।

इससे पहले, संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने विधेयक पर सोमवार रात मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि गृहमंत्री इस संबंध में सदन में वक्तव्य देना चाहते हैं। कटारिया ने कहा कि सरकार ने दंड विधियां संशोधन अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही जारी किया है। गृहमंत्री की अपनी पार्टी के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाडी से नोंकझोंक भी हुई। विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजे जाने की मंजूरी के बाद सदन में इस मुद्दे को लेकर चल रहा हंगामा रूक गया।

इससे पहले राजस्थान विधानसभा के सोमवार से शुरू हुए सत्र में भी विवादित विधेयक को लेकर भारी हंगामा हुआ था। लोकसेवकों को बचाने वाले विवादित बिल को गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने पेश किया था। इस दौरान प्रतिपक्षी विधायकों के साथ ही भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने भी अपनी ही सरकार का विरोध करते हुए वाकआउट किया था। कांग्रेस विधायक मुंह पर काली पटटी बांध और विधेयक के विरोध में नारे लिखी तख्तियां लेकर विधानसभा में पहुंचे थे। कांग्रेस ने सोमवार को ही विधानसभा के बाहर इस विधेयक को काला कानून करार देते हुए बड़ा प्रदर्शन भी किया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुआई में सोमवार को हुए प्रदर्शन में सरकार की मुखालफत की गई थी। पुलिस ने पायलट समेत कई नेताओं को हिरासत में भी लिया था।

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