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पेंशन के लिए चार महीने से घर में रखा था मां का शव, पकड़े गए बेटे

अमरावती को अपने पति दया प्रसाद की साल 2000 में हुई मौत के बाद 40000 रुपए महीना की पेंशन मिलती थी। इसी पेंशन के लालच में महिला के बेटों ने उसकी मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार नहीं किया।

पेंशन के लिए मां के मृत शरीर को रखा 3 महीने संरक्षित। (express photo) (representational image)

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल यहां एक परिवार ने पेंशन लेने के लिए 4 महीने पहले मर चुकी 70 वर्षीय महिला का अंतिम संस्कार ही नहीं किया। महिला के बेटों ने महिला के शरीर पर केमिकल लगाकर शरीर को संरक्षित किया हुआ था, ताकि शरीर खराब ना हो और बदबू बाहर ना फैले। फिलहाल पुलिस ने घर पर छापा मारकर इस घटना का खुलासा किया है। यह घटना बनारस के नजदीक स्थित कस्बे भेलुपुर की है, जहां के कबीरनगर इलाके में रहने वाली महिला अमरावती का 13 जनवरी को निधन हो गया था। चूंकि अमरावती को अपने पति दया प्रसाद की साल 2000 में हुई मौत के बाद 40000 रुपए महीना की पेंशन मिलती थी। इसी पेंशन के लालच में महिला के बेटों ने उसकी मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार नहीं किया और शरीर को केमिकल की मदद से संरक्षित कर लिया था और हर माह बैंक से पेंशन ले रहे थे।

कैसे चला घटना का पता?- दरअसल काफी दिनों तक महिला नहीं दिखाई दी तो पड़ोसियों को कुछ शक हुआ। साथ ही आरोपी परिवार किसी को भी अपने घर नहीं आने देता था। ऐसे हालात में किसी व्यक्ति ने पुलिस को इस संबंध में सूचना दे दी। सूचना पाकर पुलिस ने आरोपी परिवार के घर पर छापा मारा और महिला का संरक्षित किया हुआ शव बरामद कर लिया। साथ ही घर को पुलिस ने सील कर दिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बता दें कि जब पुलिस ने महिला का शव बरामद किया तो उसके अंगूठे पर स्याही का निशान लगा हुआ था, जिससे यह पता चलता है कि परिवार महिला के शव से अंगूठा लगवाकर पेंशन ले रहा था। उल्लेखनीय है कि मृत महिला के परिवार में 5 बेटे और 3 बेटियां हैं। इनमें से 2 बेटों और बेटियों की शादी हो चुकी है। पांचों बेटे बेरोजगार हैं और महिला को मिल रही पेंशन पर ही आश्रित हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले में महिला के बेटों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

गौरतलब है कि ऐसा ही एक मामला कोलकाता में भी सामने आया था। जहां के बेहाला इलाके में एक घर से पुलिस ने एक फ्रीजर बरामद किया था, जिसमें एक वृद्ध महिला की लाश थी। यह लाश उसके बेटे ने ही रखी हुई थी। जांच में पता चला था कि महिला को हर माह 50000 रुपए पेंशन मिलती थी, जिसके लालच में करीब 3 सालों तक बेटे ने अपनी मां के शरीर को संरक्षित रखा और पेंशन निकालता रहा। हालांकि इस मामले में आरोपी बेटे के मानसिक रोगी होने की बात भी कही गई थी।

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