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सोशल मीडिया पर नहीं रोएं दुखड़ा, सेवादारी करनी होगी

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कोई भी सैनिक अपनी दिक्कतों और शिकायतों को सोशल मीडिया पर लाने की बजाए सीधे उनके समक्ष रख सकता है।

Author नई दिल्ली | January 14, 2017 12:33 AM
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कोई भी सैनिक अपनी दिक्कतों और शिकायतों को सोशल मीडिया पर लाने की बजाए सीधे उनके समक्ष रख सकता है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना की सेवादारी व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। रावत ने कहा कि हम शांति और सौहार्द के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसे बनाए रखने के लिए हमारी रक्षा योजना में आक्रामक बचाव का तत्व शामिल करना होगा।
सेना दिवस की पूर्व संध्या पर संवाददाता सम्मेलन में जनरल रावत ने संघर्ष विराम के उल्लंघनों पर पाकिस्तान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा- अभी इसमें कमी आई है, लेकिन और कमी नहीं आई तो हमारे पास आगे और भी लक्षित हमलों के विकल्प खुले हुए हैं। सीमा पर हमारे सामने कई चुनौतियां है। छद्म युद्ध को लेकर भी हम चिंतित हैं। इससे देश का माहौल खराब हो रहा है। हम एक मजबूत सेना हैं और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जनरल रावत ने पाकिस्तान को सख्त संदेश देते हुए कहा कि अगर वह सीमा पर शांति और स्थिरता कायम रखने के लिए गंभीरता दिखाता है तो भारत सीमा पर प्रभावी संघर्ष विराम के लिए तैयार है। पिछले साल सितंबर में किए गए लक्षित हमले का मकसद पाकिस्तान को कड़ा संदेश देना था कि अगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो भारतीय सेना उसकी नापाक हरकतों का जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई के बाद सीमा पार से शांति के संदेश मिलने लगे हैं और भारत भी चाहता है कि सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाओं बाकी पेज 8 पर
पर रोक लगे। घुसपैठ की घटनाओं में भले ही ज्यादा कमी नहीं आई हो, लेकिन इस कार्रवाई के बाद संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाओं में कमी जरूर आई है।

पाकिस्तान और आतंकवाद
सेना प्रमुख ने कहा कि सीमा पार आतंकवादियों के 17 शिविर चल रहे हैं। लक्षित हमले के बाद इन लांच पैड को बंद किया जाने लगा था। लेकिन अब ये फिर खोले जा रहे हैं। हम हालात पर नजर गड़ाए हुए हैं। सेना की उत्तरी कमान सतर्क है। आतंकवाद के कारण जम्मू और कश्मीर में पर्यटन और शिक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है। वहां देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर आघात किया जा रहा है।
सेना का आधुनिकीकरण
सेना प्रमुख ने कहा कि सेना को नई चुनौतियों से निपटने के काबिल बनाया जाएगा। हथियारों से लेकर हर फील्ड में तकनीक का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें साजो-सामान मुहैया कराया जाएगा। सीमा पर लड़ रहे जवानों को बैलिस्टिक हेलमेट, बेहतर बुलेट प्रूफ जैकेट और रात में गश्त के लिए बेहतर नाइट विजन डिवाइस उपलब्ध कराई जाएगी। नई बख्तरबंद गाड़ियां और नए किस्म के टैंक लाए जा रहे हैं। पुराने चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों को कामोव से बदला जा रहा है। हल्के अर्जुन टैंक लाए जा रहे हैं।

मोर्चे पर महिला सैनिक के बारे में
जनरल रावत ने कहा कि समान अवसर समान जिम्मेदारी लाता है और यह फैसला करना महिलाओं पर निर्भर है कि क्या वे किसी अलग या अतिरिक्त सुविधाओं के बगैर अग्रिम पंक्ति की लड़ाकू भूमिका में पुरुषों के साथ आने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि जब टैंक बाहर निकलते हैं तो पुरुषों को उसके नीचे ही रात में सोना पड़ता है और कोई अलग सुविधा नहीं होती। जब वे लोग गश्त पर जाते हैं, तब शौचालय की कोई सुविधा नहीं होती। टैंकों में सैनिकों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनमें से प्रत्येक में तीन कर्मियों की एक ईकाई होती है और जब वे बाहर जाते हैं या युद्ध में होते हैं तो वे सिर्फ टैंक के नीचे ही सोते हैं। तीन लोगों के चालक दल के पास एक स्टोव (चूल्हा) होता है। वे खाना पकाते हैं और टैंक के नीचे सोते हैं। ये लोग 35 दिन तक बाहर ऐसे ही रहते हैं। क्या महिलाएं इसके लिए तैयार हैं?

पूर्वी कमान के कमांडर के बारे में
सेनाध्यक्ष ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी मुझसे मिले थे और उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं इस निर्णय को स्वीकार करता हूं और सेना में कार्य करता रहूंगा। पूर्वी कमान और सेना के अन्य हिस्सों में लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी को लेकर चल रही कथित चर्चा को लेकर उन्होंने कहा कि अगर किसी जांच की जरूरत होगी तो कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि उन्हें तय चैनल के जरिए शिकायत दर्ज करानी होगी। अपनी नियुक्ति में वरिष्ठों को नजरअंदाज किए जाने के सवालों पर उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला मैंने विनम्रता पूर्वक स्वीकार किया है। उन्होंने संवाददाताओं से पूछा- क्या आपको लगता है कि मुझे सरकार के फैसले को चुनौती देनी चाहिए थी?

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