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आरएसएस के प्रचारक, मद्रास यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं राजभवन को लेडीज क्लब बनाने के आरोपी पूर्व राज्यपाल वी षण्मुगनाथन

दावा किया जाता है कि वी षण्मुगनाथन ने स्वामी विवेकानंद और आरएसएस के अगुवा रहे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की विचारधारा से प्रभावित होकर अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था।

मेघालय के पूर्व राज्यपाल वी षण्मुगनाथन

मेघालय के राजभवन को लेडीज क्लब बनाने के आरोपी राज्यपाल वी षण्मुगनाथन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है। बावजूद इसके विवाद अभी थमा नहीं है और शिलॉन्ग के राजभवन में होनेवाली घटनाओं का विवरण धीरे-धीरे जगजाहिर हो रहा है। द टेलीग्राफ के मुताबिक राजभवन के 80 कर्मचारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखकर बताया है कि वहां कई युवतियां सीधे राज्यपाल के आदेश से या अपने मन मुताबिक आती-जाती थीं। उनमें से कई युवतियों का राज्यपाल के बेडरूम तक भी आना-जाना था।

वी षण्मुगनाथन मद्रास यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। स्नातकोत्तर (एम.ए.) राजनीति विज्ञान में उन्होंने ये उपलब्धि हासिल की थी। ऐसा दावा किया जाता है कि इसके बाद वी षण्मुगनाथन ने स्वामी विवेकानंद और आरएसएस के अगुवा रहे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की विचारधारा से प्रभावित होकर अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था। वो संघ के प्रचारक के रूप में काम करने लगे। शिलॉन्ग राजभवन में पीआरओ की नौकरी के लिए आवेदन करने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि इंटरव्यू के दौरान ही राज्यपाल ने उसे बाहों में भर लिया और चूम लिया।

इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, वह महिला उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए सीधा फोन करते थे। इसके अलावा वह एक पीआरओ को लेकर ईटानगर भी गए थे। कुछ उम्मीदवारों ने अपना नाम ना आने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से बात की। उन्होंने बताया कि वी षण्मुगनाथन ने उनमें से कुछ को खुद कॉल करके ‘वन टू वन’ इंटरव्यू देने के लिए बुलाया था। जबकि उससे पहले ही कुछ इंटरव्यू हो चुके थे। जिसमें से एक का इंटरव्यू तो तीन सीनियर ऑफिसर ने लिया था जिनमें सचिव भी शामिल थे।

संभवत: यह पहला मामला है जब किसी राज्यपाल को राजभवन के कर्मचारियों के विरोध की वजह से पद छोड़ना पड़ा हो। दरअसल, शिलांग राजभवन के 80 कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को खत लिखकर वी षण्मुगनाथन को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग की थी। पांच पेज के इस खत में आरोप लगाया गया था कि राज्यपाल की गतिविधियों की वजह से राजभवन की मर्यादा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इसके बाद वी षण्मुगनाथन ने 26 जनवरी की रात को इस्तीफा दे दिया था।

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