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उत्तराखंड: अब मिडडे मील खाने से पहले ‘भोजन मंत्र’ पढ़ेंगे स्कूली बच्चे, कांग्रेस ने मारा तंज

जुलाई के पहले हफ्ते में स्कूली शिक्षा विभाग, राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे और अन्य अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक हुई थी। उस दौरान सुझाव आया था कि स्कूलों में मिडडे मील से पहले भोजन मंत्र को पढ़ना अनिवार्य कर दिया जाए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। (एक्सप्रेसः वीरेंद्र सिंह नेगी)

उत्तराखंड में अब मिडडे मील से पहले बच्चों को भोजन मंत्र पढ़ना पड़ेगा। कांग्रेस ने इसी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को घेरा है। पार्टी ने तंज मारते हुए कहा है कि सूबे के स्कूल बदहाल स्थिति में हैं। ऐसे में बीजेपी असल मुद्दे न भटकाए। वह मंत्र जाप या राष्ट्रगीत गवाना जरूरी न बनाए। दरअसल, यहां पर शिक्षा विभाग ने इस संबंध में तकरीबन 18 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले 12 लाख बच्चों के लिए यह निर्देश जारी किया है। बच्चों यह मंत्र आसानी से पढ़ सकें, लिहाजा सभी स्कूलों के रसोईघरों की दीवारों पर उसे संस्कृत में पेंट से लिखवाया जाएगा।

जुलाई के पहले हफ्ते में स्कूली शिक्षा विभाग, राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे और अन्य अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक हुई थी। उस दौरान सुझाव आया था कि स्कूलों में मिडडे मील से पहले भोजन मंत्र को पढ़वाया जाए। शिक्षा विभाग के निदेशक आरके कुंवर ने इस बारे में बताया कि स्कूलों में भोजन मंत्र का मिडडे मील से पहले जाप हो, उसके लिए संबंधित अधिकारियों को चिट्ठी भेजी जाएगी। हालांकि, स्कूलों के रसोईघरों में उसे लिखवाना जरूरी नहीं होगा।

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वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस बाबत कहा, “राज्य के सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता है। स्कूलों में शिक्षा के स्तर में गुणवत्ता लाने पर जोर दिया जाना चाहिए। बीजेपी अहम मुद्दों को भटकाकर स्कूलों में मंत्र जाप और वंदे मातरम गवाने को लेकर विवाद न पैदा करे।”

हालांकि, राज्य में बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है, “कई स्कूलों में दिन की शुरुआत सरस्वती वंदना से होती है। भोजन मंत्र का फिलहाल जाप नहीं किया जाता है। मगर हम इस पहल के जरिए छात्रों को देश की संस्कृति और परंपरा से परिचित कराना चाहते हैं। मुझे समझ में नहीं आता कि आखिर इस पर लोगों को आपत्ति क्यों हो रही है।”

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