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तीन करोड़ से ज्यादा कांवड़ियों के पहुंचने की उम्मीद

कांवड़ मेला गंगा जल की एक अनोखी यात्रा है। कांवड़िए सैकड़ों मील का सफर तय कर जिस कांवड में गंगा जल भरकर अपने गंतव्य तक ले जाते हैं, वह कांवड पांच तरह की होती है।

कांवड़िए कांवड़ में जिस पात्र में जल भरकर ले जाते हैं उसे वे ‘खजाना’ कहते हैं।

सुनील दत्त पांडे

इस बार 17 जुलाई गुरु पूर्णिमा से शुरू होने वाले 15 दिवसीय कांवड़ मेले की तैयारियों के लिए उत्तराखंड प्रशासन ने कमर कस ली है। कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड के चार धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ का यात्रामार्ग परिवर्तित रहेगा। केदारनाथ और बदरीनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों को मुजफ्फरनगर से बिजनौर, कोटद्वार, पौड़ी, श्रीनगर होकर जाना पड़ेगा। जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालुओं को सहारनपुर से विकासनगर होते हुए इन दो धामों में पहुंचना होगा।

कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, आयुक्त गढ़वाल मंडल दिलीप जावलकर, पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल से लेकर हरिद्वार के जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूड़ी बैठकों के कई दौर कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं।

इस बार प्रशासन को उम्मीद है कि तीन करोड़ से ज्यादा कांवड़िए हरिद्वार पहुंचेंगे। सुरक्षा के साथ श्रद्धालु शिवभक्त कांवड़ियों पर राज्य सरकार कांवड़ मेले को यादगार बनाने के लिए हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी करेगी। कांवड़ मेला क्षेत्र में 16 स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इनमें 48 चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे। साथ ही 20 फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय भी इन चिकित्सक शिविरों में तैनात रहेंगे।

पांच तरह की होती है कांवड़
कांवड़ मेला गंगा जल की एक अनोखी यात्रा है। कांवड़िए सैकड़ों मील का सफर तय कर जिस कांवड में गंगा जल भरकर अपने गंतव्य तक ले जाते हैं, वह कांवड पांच तरह की होती है। पहली खड़ी कांवड़, दूसरी झूला कांवड़़, तीसरी बैठी कांवड़, चौथी बैकुंठ कांवड़ व पांचवीं डाक कांवड़। खड़ी कांवड़ को कांवड़िए साथी कांवड़ियों के कंधे पर रखते हैं और उनका साथी कांवड़ को लेकर तब तक खड़ा रहता है, जब तक वह अपने साथी कांवड़िए को यह कांवड़ नहीं सौंप देता। झूला कांवड़ को कांवड़ियां पेड़ या अन्य किसी जगह लटका सकता है। बैठी कांवड़ को कांवड़ियां जमीन पर भी रख सकता है। बैकुंठ कांवड़ को कांवड़िया कभी भी रख सकता है। डाक कांवड़ वाहनों के जरिए निर्धारित समय में अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जानी चाहिए।

खजाना
कांवड़िए कांवड़ में जिस पात्र में जल भरकर ले जाते हैं उसे वे ‘खजाना’ कहते हैं। क्योंकि यह गंगाजल उनके लिए किसी खजाने से कम नहीं होता है। इस गंगाजल से वे अपने गांवों के शिवालयों में शिव का जलाभिषेक करते हैं।

कांवड़ियों और स्थानीय निवासियों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए इस बार कांवड़ मेला क्षेत्र में विशेष सुविधाएं दी गई हैं। कांवड़ियों पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी। कांवड़ियों को प्लास्टिक की बोतलों की जगह गंगाजल ले जाने के लिए स्टील, पीतल और तांबे के पात्र खरीदने होंगे।
-सतपाल महाराज, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री

कांवड़ मेले को सुचारू रूप से चलाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
-दीपेंद्र चौधरी, हरिद्वार के जिलाधिकारी

इस बार तीन करोड़ से ज्यादा कांवड़ियों के आने की संभावना हैं। 15-20 सालों से हर साल कांवड़ियों की तादाद बढ़ रही है। 2011 में कांवड़ियों की तादाद डेढ़ करोड़ थी। पिछले साल 2018 में लगभग ढाई करोड़ कांवड़िए हरिद्वार आए। कांवड़ियों के लाठी, डंडे, हॉकी, त्रिशूल ले जाने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
-जन्मेजय खंडूड़ी , हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

कांवड़ मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था 24 घंटे होगी। सात फुट से ऊंची कांवड़ पर पाबंदी लगाई जाएगी। ट्रेन की छतों पर यात्रा करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
-नुपूर वर्मा , नगर आयुक्त, हरिद्वार नगर निगम

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