ताज़ा खबर
 

ऋषिकेश: एम्स की अधबनी इमारत में हो रहा है इलाज

एम्स के भवनों का निर्माण बेहद ही घटिया दर्जे का किया गया है। इन भवनों को बने चार-पांच साल भी नहीं हुए और इन भवनों में कई स्थानों पर पानी रिसना शुरू हो गया है और कई भवनों में प्लास्टर और फर्श उखड़ने लगा है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) (पीटीआई फाइल फोटो)

उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) सरकारी अफसरों और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण बदहाली के आंसू बहा रहा है। एम्स के विशालकाय भवनों के निर्माण में घोर धांधली हुई हैं। एम्स के भवनों का निर्माण बेहद ही घटिया दर्जे का किया गया है। इन भवनों को बने चार-पांच साल भी नहीं हुए और इन भवनों में कई स्थानों पर पानी रिसना शुरू हो गया है और कई भवनों में प्लास्टर और फर्श उखड़ने लगा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन 30 मई 2013 को आधे-अधूरे निर्माण के बीच तब के केंद्रीय सचिव केशव देसीराजू के हाथों हुआ था। जबकि उद्घाटन के चार साल बाद अभी तक ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ट्रॉमा सेंटर के एक हिस्से में ब्लड बैंक बनाया गया है और इसी में पानी का रिसाव हो रहा है। इस आधे-अधूरे भवन में एम्स की करीब 25 लाख रुपये कीमत की अत्याधुनिक एम्बुलेंस खड़ी रहती है। एम्स ऋषिकेश में जनरल वार्ड तो बन गए है परंतु वहीं अभी तक प्राइवेट वार्ड नहीं बन पाए हैं।

अब तक तीन निदेशक
एम्स की स्थापना के बाद एम्स के तीन निदेशक डॉक्टर राजकुमार, डॉक्टर संजीव मिश्रा तथा डॉक्टर रविकांत बन चुके है। तीनों निदेशको ने घटिया निर्माण करने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार से बड़ी जद्दोजहद की। एम्स के सूत्रों के मुताबिक घटिया निर्माण करने वाली एक कंपनी पर कारवाई हुई और इस कंपनी से एम्स के बाकी निर्माण कार्यो को छीन लिया गया है। इस कंपनी के निर्माण कार्यो की जांच आॅर्विटेशन में भेज दी गई है। इस कंपनी की बैंक गांरटी जब्त कर ली गई है। एम्स के अन्य भवनों का निर्माण कार्य भी इस कंपनी से छीनकर सीपीडब्लूडी को दे दिया गया है। यह कंपनी जिस नर्सिंग कॉलेज का निर्माण कर रही थी, उसके एक खंड का एक खम्बा ही तिरछा बना हुआ है।  एम्स के जिन भवनों में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल चल रहा है वे भी बहुत घटिया दर्जे के हैं। उन भवनों में लगे पत्थर टूटकर नीचे गिरने लगे हैं। फर्श उखड़ने लगा है। टाइलें टूटने लगी हैं। टाइलें लगाने का काम भी सफाई से नही किया गया है और इन भवनों के परिसरों में मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां या अन्य व्यवस्थाएं नहीं है। और मरीजों के साथ आए तीमारदारों को जमीन में ही बैठना पड़ता है। इतने बड़े एम्स में केवल एक ही मेडिकल स्टोर है, परंतु उसमें दवाइयां तो सस्ते दामों पर मिलती है परंतु भारी भीड़ लगी रहती है। तीमारदार फूलसिंह का कहना है कि एक मात्र मेडिकल स्टोर होने की वजह से दवाइयां खरीदने में घंटों लग जाते हैं।

बिजनौर से इलाज करवाने आए फुरकान अहमद का कहना है कि कई बार एम्स प्रशासन का ध्यान एकमात्र मेडिकल स्टोर होने से हो रही परेशानियों की तरफ दिलाया गया परंतु कुछ भी नहीं हुआ। एम्स ऋषिकेश में चिकित्सकों तथा अन्यकर्मियों के आवास एक बड़ी समस्या बने हुए है। वे बहुत ही घटिया दर्जे के और मानकों के हिसाब से भी नहीं बने है। एम्स में स्टाफ ज्यादा है और आवास कम हंै, इसीलिए स्टाफ के कई लोग एम्स परिसर के बाहर ज्यादा किराये पर मकान ले कर रह रहे हैं। अभी तक एम्स के निदेशक का आवास तक नहीं बन पाया है और निदेशक अतिथि गृह में रह रहे हैं। एम्स में कैंसर का वार्ड शुरू हो गया है, परंतु केवल कीमोथैरेपी चल रही है। और अभी तक रेडियिशन थैरेपी की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। रेडियिशन की मशीनें लगाने के लिए बंकर के निर्माण का काम चल रहा है। कोर्डियोलोजिस्ट हैं परंतु कोर्डियो सर्जरी के लिए सर्जन की अभी तक नियुक्ति नहीं हो पाई है जबकि एंजोग्राफी तथा एंजोप्लास्टिक की व्यवस्था है। न्यूरोसर्जरी की पूर्ण व्यवस्था है परंतु न्यूरोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं होने की वजह से न्यूरो के मरीज निराश होकर लौट रहे हैं। एम्स ऋषिकेश में नेफोरोलिस्ट की अभी तक व्यवस्था नहीं है। जिस कारण गुर्दे के मरीज बिना इलाज वापस जा रहे हैं। गुर्दे के चिकित्सक की नियुक्ति तो हो चुकी है परंतु अभी तक उन्होंने ज्वाइन नहीं किया है। एम्स में हड्डियों का विभाग, मेडिसन, ईएनटी न्यूरोसर्जरी, कीमोथैरेपी, गठिया के इलाज की पूर्ण व्यवस्था है। जिन रोगों के इलाज की व्यवस्थाएं है, उनमें उच्च कोटि के चिकित्सक हैं। साथ ही एम्स में इलाज बहुत सस्ता है। मेडिसन के वार्ड 70 से 80 फीसद तक भरे रहते हैं।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App