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जिस कानून ने डॉक्‍टर को दिया 25 साल तक दर्द, अब हाईकोर्ट ने उसे बताया गैरकानूनी

इस एक्ट के तहत प्रसव पूर्व लिंग जांच कराना गैर कानूनी है। ऐसा करते पाए जाने पर तीन से पांच साल की सजा और 10 हजार से पचास हजार रुपये तक का जुर्माना ठोका जा सकता है।

उउत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के अंदर PCPNDT एक्ट के तहत सक्षम प्राधिकार और सलाहकार समिति गठित करने का निर्देश दिया है।। (image source-Facebook)

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के अंदर पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक यानी Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) एक्ट, 1994 के तहत सक्षम प्राधिकार और सलाहकार समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इसका प्रकाशन गजट में कराने को कहा है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब 1994 की पीसीपीएनडीटी एक्ट की धारा 32 संसद के दोनों सदनों में पास ही नहीं हुआ तो इसे कैसे मनमाने तरीके से लागू किया जा सकता है। एक्ट की धारा 34 के मुताबिक एक्ट से संबंधित कोई भी नए प्रावधान या दिशा-निर्देश या संबंधित नियम या उप-कानून का संसद के दोनों सदनों से पास होना अनिवार्य किया गया है।

मामले में याचिकाकर्ता और हरिद्वार के डॉक्टर विजय वर्मा ने राज्य सरकार के उस कानून को चुनौती दी थी जिसकी आड़ में डॉक्टरों को पीएनडीटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जा रहा था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उचित कानून नहीं होने की मामले में हुई गिरफ्तारिया गैर कानूनी हैं। डॉ. वर्मा की तरफ से कोर्ट में दलील दी गई थी कि राज्य में गजट नोटिफिकेशन नहीं होने की वजह से अधिकारी पीएनडीटी एक्ट 1994 के तहत किसी भी अवैध अल्ट्रासाउंड पर कार्रवाई नहीं कर सकते हैं और गिरफ्तारी नहीं कर सकते हैं। वर्मा ने सूचना का अधिकार के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बाबत जानकारी मांगी थी, जिसे केस का आधार बनाया गया।

बता दें कि इस एक्ट के तहत प्रसव पूर्व लिंग जांच कराना गैर कानूनी है। ऐसा करते पाए जाने पर तीन से पांच साल की सजा और 10 हजार से पचास हजार रुपये तक का जुर्माना ठोका जा सकता है। देश में गिरते लिंगानुपात और बढ़ते कन्याभ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए संसद ने 1994 में यह कानून बनाया था लेकिन कानून की धारा 34 के अनुसार लिंग जांच के लिए अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डॉक्टर या लैब कर्मी को गिरफ्तार करने वाली कमेटी गैरकानूनी है। बता दें कि पिछले 25 सालों में देशभर में सैकड़ों डॉक्टर इस मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।

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