ताज़ा खबर
 

सुजलां और सुफलां के लिए बने हिमालय मंत्रालय

हिमालय में हिमशैल (ग्लेशियर) के टूटने से उत्तराखंड में भारी विपदा आई। चमोली में जहां यह त्रासदी हुई, उसकी दूरी रैणी गांव से 20 किलोमीटर भी नहीं है। रैणी वही गांव है, जहां की गौरा देवी ने चिपको आंदोलन का श्रीगणेश किया था।

Author Updated: February 24, 2021 9:11 AM
chamauliचमौली में आई आपदा। फाइल फोटो।

राजकुमार भारद्वाज

गौरा देवी अपने गांव की महिलाओं के साथ वृक्ष से चिपक गई थीं। उन्होंने जंगल के ठेकेदारों से खुला टकराव लिया था और कहा था- पेड़ नहीं कटने देंगे, मुझे गोली मारो। रैणी और आसपास के लोग इस परियोजना से संभावित खतरों की चर्चा भी नियमित कर रहे हैं कि प्रकृति के संसाधनों का किस सीमा तक दोहन किया जाए और पर्वतराज हिमालय के संसाधनों के संरक्षण के लिए क्या उपाय किए जाएं।

पहाड़ की समस्याओं के समाधान टर्नकी प्रोजेक्टर करने वाले बड़े इंजीनियरों के बजाय, यहां बसने वाले नागरिकों के पास अधिक सरल और शीघ्र हैं, क्योंकि पीढ़ियों से वे यहां रहते आए हैं और जन्म-जन्मांतरोें का अनुभव उनके खून में घुला-मिला है।

जड़ों से नदी को काटकर उस पर जलविद्युत परियोजनाओं का क्या प्रयोजन है? उच्च हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, जंगल और तलहटी नदी के बनने के क्षेत्र होते हैं। यदि इन्हें ही मिटा देंगे, तो नदी का सूखना निश्चित है। ऐसे में मृत नदी पर विद्युत योजना बनाने से अर्थ का अनर्थ ही होगा। हिमालय का इतिहास बताता है कि कई बार बड़े जलधारे बंध और मार्ग त्यागकर स्वच्छंद हो जाते हैं और बड़ी जल राशि मृत नदी में आ जाती है। ऐसे में नदी को मृत मानकर कालान्तर में जो भी निर्माण किए जाएंगे, वे भयंकर बाढ़ की सूरत में जलप्लावित हो जाएंगे।

हिमालय की वर्तमान परिस्थितियों को बनने में हजारों साल लगे हैं, लेकिन उसे बिगाड़ने का काम हमारा समाज कुछ सालों से कर रहा है। श्रीमद् भगवद्गीता में स्वयं श्री हरि के पूर्णावतार निष्काम कर्मयोगी श्री कृष्ण ने कहा है, ह्लमहषीर्णां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम्। यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालय:।।

भगवान ने खुद ही कहा, ‘स्थावराणां हिमालय’ अर्थात स्थिर पर्वतों में मैं हिमालय हूं। हमारे पुरखों ने भी बहुत सोच-समझकर यहां बस्तियां, मंदिर और खेती आदि कार्यों व संरचनाओं को मूर्तरूप दिया। यही वजह है कि भूकम्प को छोड़कर, भारी वर्षा, हिमपात, तूफान, ओलावृष्टि और सूखे आदि बहुत सी विपदाओं के बावजूद कदीमी गांव बचे ही रहते हैं।

जैसे श्री बद्रीधाम में सैकड़ों वर्षों से कई बड़े हिमस्खलन हुए, परन्तु मंदिर सदा सुरक्षित ही रहा। यह भारतीय स्थापत्य कला के दूरगामी चिंतन का द्योतक भी है, क्योंकि यह धाम सबसे सुरक्षित जगह पर स्थित है और बिना अध्ययन के ऐसे स्थान का चयन हो ही नहीं सकता। यह नारायण की कृपा भी है।

नदियों में खनन, जैव विविधता का अहित, वृक्षों का कटान और विद्युत परियोजनाएं औपनिवेशिक मानसिकता भर नहीं है। बल्कि अब हमने हिमालय को आध्यात्य की जगह सामान्य समझ और लालची दृष्टि से देखना और समझना शुरू कर दिया है, जिसमें होटल वालों को होटल, फूल वालों को फूल, पानी की बोतल वालों को बोतल, औषधि निमार्ताओं को जड़ी बूटी, जंगलों के तस्करों को जंगल की अपार संपदा, नदियों के व्यापारी को नदी का बहाव, जमीनों और जलवायु वालों को जमीनें और खनकों को खनिज संपदा का लोभ है, तो कुछ राजनेताओं और नौकरशाहों के लिए हिमालय अनंत कमाई देने वाला बन गया है।

पंडित दीनदयाल ने जी आर्थिक योजनाओं के बारे में लालच के संदर्भ में स्पष्ट संकेत साझा किए हैं, ‘आर्थिक पहलू पर विचार करते समय लोग मानसिक प्रवृत्तियों पर विचार नहीं करते हैं, जबकि हमारे आर्थिक प्रयत्नों पर मानसिक प्रवृत्तियों का विशेष रूप से प्रभाव पड़ता है। मानसिक प्रवृत्तियां सांस्कृतिक जीवन से प्रभावित होती हैं।

अत: हमारे आर्थिक प्रयत्नों पर संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव रहता है। हमारी संस्कृति में भी हमारे आर्थिक प्रयास किस आधार पर चलें, इस बात की स्पष्ट व्याख्या है, भौतिक विकास के लिए उसमें समुचित स्थान है।’ पंडित जी मानसिक प्रवृत्तियों की उच्चशृंखलता के साथ भारतीय संस्कृति का भी उल्लेख करते हैं कि भारतीय संस्कृति में अर्थशास्त्र की अपनी परिभाषाएं हैं, उसी के अनुरूप वर्तना चाहिए, न कि विदेशी पद्धतियों का अंधानुकरण किया जाए।

मात्र लालच, धन और आवश्यकताओं के वशीभूत होकर हम हिमालयी संपदा का दुरुपयोग करते रहे, तो हम आने वाली पीढ़ी के लिए कैसा हिमालय, कैसी नदियां, कैसी गंगा-यमुना, कैसे बद्री-केदार, गंगोत्री-यमुनोत्री, साज-समाज, वन-उपवन, जैव विविधता से भरपूर पहाड़ आदि अनंत महा पराशक्तियों से भरपूर देव भूमि संरक्षित रख पाएंगे

Next Stories
1 उत्तराखंडः सामने आईं तबाही से पहले की आपदा स्थल की सैटेलाइट तस्वीरें, कैसे टूटा ग्लेशियर? फिलहाल सस्पेंस
2 24 घंटे के लिए उत्तराखंड की मुख्यमंत्री बनी ये लड़की, जानिए कौन हैं हरिद्वार की सृष्टि गोस्वामी
MP Budget:
X