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जहरीली शराब पर जांच समिति बनाई

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि विधानसभा के इस बजट सत्र में जहरीली शराब बेचने और बनाने वालों का कारोबार करने वालों के खिलाफ विधेयक लाया जाएगा। इसमें सख्त प्रावधान होंगे ताकि अपराधियों को कठोर दंड दिया जा सके।

जहरीली शराब से मौत के बाद मातम फोटो सोर्स- ट्विटर/ANI

हरिद्वार जिले में घटित जहरीली शराब कांड की गूंज मंगलवार को विधानसभा में सुनाई दी। विपक्ष ने यह मामला जोरशोर से उठाया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि आबकारी मंत्री प्रकाश पंत को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने प्रश्नकाल स्थगित करते हुए शराबकांड पर विशेष चर्चा कराई। विपक्ष के सवालों का जबाव देते हुए आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने सदन में घोषणा की कि बजट सत्र के दौरान ही सरकार आबकारी अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाएगी और अवैध शराब के खिलाफ कठोर कानून बनाया जाएगा।

सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और विपक्ष के विधायक गर्भगृह में आ गए। इस पर, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने हस्तक्षेप करते हुए इस पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाने का ऐलान किया। जो जहरीली शराब कांड के घटनास्थल पर जाकर सारे मामले को देखेगी और अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को इस मामले में जल्द ही दीर्घकालिक नीति बनाने के निर्देश दिए। विपक्ष के विधायक सरकार के जबाव से असंतुष्ट होकर धरने पर बैठ गए और बाद में सदन का बहिष्कार किया।

जहरीली शराब कांड पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, ममता राकेश, करन माहरा, गोविन्द सिंह कुंजवाल, हरीश धामी आदि विधायकों ने इस मुद्दे पर जोरशोर से अपने विचार रखे। उल्लेखनीय है कि हरिद्वार की भगवानपुर तहसील के आधा दर्जन गांवों में जहरीली शराब पीने से 39 लोगों की मौत हो गई। इस शराब के कांड ने देवभूमि उत्तराखंड के प्रशासन, पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग के कामकाज की पोल खोलकर रख दी है। करोड़ों रुपए का कच्ची शराब का कारोबार सरकारी अंग्रेजी शराब के समानांतर उत्तराखंड में तेजी से फलफूल रहा था, परंतु इसकी भनक सरकार और शासन-प्रशासन में बैठे सत्ताधीशों और आलाधिकारियों तक को नहीं लगी या यह कहें कि आलाधिकारियों ने इस जानलेवा जहरीली शराब के कारोबार से मुंह मोड़ रखा था। तहसील स्तर के आबकारी और पुलिस महकमे के 17 अधिकारियों और कर्मचारियों को सत्ता प्रतिष्ठान में बैठे आलाधिकारियों ने निलंबित करके खानापूरी की और वहीं जिले में बैठे आलाधिकारियों के बचाव में सत्ता प्रतिष्ठान लगा है।

आबकारी विभाग के आठ बड़े अधिकारियों को केवल नोटिस जारी किया है। उनसे तीन दिन में जवाब देने को कहा गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। हरिद्वार जिले समेत पूरे पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएं लंबे अरसे से शराब के खिलाफ आंदोलन करती आई हैं। परंतु सत्ता प्रतिष्ठानों में बैठे लोग हमेशा शराब माफिया का पक्ष लेते रहे हैं। मातृसदन संस्था के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती का कहना है कि हरिद्वार के जगजीतपुर गांव में स्कूल-कॉलेजों के पास राज्य सरकार ने शराब का सरकारी ठेका खोल दिया। भारी विरोध के बावजूद भी इस ठेके को नहीं हटाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग से 500 मीटर की दूरी तक शराब का ठेका न होने का फैसला लिया। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों की परिभाषा बदलते हुए इन मार्गों को राजकीय मार्ग घोषित कर दिया ताकि शराब की दुकानें इन मार्गों से न हटाई जा सकें। सरकार की यह नीति शराब माफियाओं को संरक्षण देने की पोल खोलती हैं।

हरिद्वार जिले की भगवानपुर तहसील के झबरेडा थाने के तहत पड़ने वाले गांव बालूपुर में बुधवार 6 फरवरी को सुभाष उर्फ नानू नाम के एक व्यक्ति की तेरहवीं की रस्म में शामिल होने के लिए हरिद्वार तथा उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले के कई गांवों के लोग भाग लेने आए थे। तेरहवीं की रस्म के बाद इन लोगों ने गांव से कच्ची शराब खरीदकर पी। अगले दिन गुरुवार 7 फरवरी को लोगों की तबियत बिगड़नी शुरू हो गई और शुक्रवार आठ फरवरी को मौतों का सिलसिला शुरू हुआ जो अब तक नहीं थमा है और 39 लोगों की जिंदगी लील चुका है। वैसे सरकारी आंकड़ों में मरने वालों की तादाद हरिद्वार जिले में केवल 36 ही बताई जा रही है।

पुलिस ने इस मामले में हरिद्वार और सहारनपुर जिले से चार शराब माफिया को गिरफ्तार किया है। मामले में मुख्य आरोपी अर्जुन उर्फ लाला हरिद्वार जिले की भगवानपुर तहसील के तेजुपुर गांव का रहने वाला है। सहारनपुर के थाना गागलहेडी के पुडेंन गांव के शराब माफिया हरदेव सिंह और उसका पिता सुखविन्दर तथा हरिद्वार जिले के गांव बालूपुर के सोनू और उसके पिता फकीरा समेत चार लोगों की पुलिस ने अब तक गिरफ्तारी की है। ये चारों आरोपी हरिद्वार और सहारनपुर के जिलों के गांवों में कच्ची शराब सप्लाई करने का कारोबार लंबे अरसे से करते आ रहे हैं। ये चारों सहारनपुर और हरिद्वार के गांवों में कच्ची शराब से लोगों को मरता देखने के बाद फरार हो गए थे।

अब तक जिन आठ गांवों में मौतें हुई है उनमें सबसे ज्यादा 16 मौतें भगवानपुर तहसील के बिंडूखडक गांव में हुई है। यहां का श्मशान घाट भी शवों के अंतिम संस्कार के लिए छोटा पड़ गया है। आठ फरवरी से लगातार इस गांव में अब तक हर रोज शव यात्राएं निकल रही हैं। इस गांव के चंद्रपाल ने बताया कि गांव के पिन्टू, विकास, सेठपाल, संजय हरिद्वार और ऋषिकेश के अस्पतालों में भर्ती हैं। इनकी हालत गंभीर बनी हुई है। बालूपुर के नानू की तेरहवीं में शामिल उनके बड़े भाई नरेश और 35 साल के ज्ञान सिंह की जहरीली कच्ची शराब पीने से मौत हुई।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि विधानसभा के इस बजट सत्र में जहरीली शराब बेचने और बनाने वालों का कारोबार करने वालों के खिलाफ विधेयक लाया जाएगा। इसमें सख्त प्रावधान होंगे ताकि अपराधियों को कठोर दंड दिया जा सके। इस तरह के मामलों की जांच के लिए एक आयोग का गठन भी किया जाएगा।

हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूडी ने बताया कि पुलिस ने कच्ची शराब के माफिया की धरपकड़ के लिए जिले के 15 से ज्यादा शहरों, कस्बों और गांवों खानपुर, लक्सर, श्यामपुर, भगवानपुर, बुग्गावाला, कलियर, मंगलौर, रानीपुर, कनखल, सिडकुल, ज्वालापुर, रूड़की आदि क्षेत्रों में अभियान चलाया। इसके तहत 61 शराब माफिया को गिरफ्तार किया गया और अब तक इस मामले 61 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। 6760 देसी शराब के पव्वे, 151 लीटर कच्ची शराब, 40 पव्वे अंग्रेजी शराब तथा कच्ची शराब बनाने की चार भट्टियां पकड़ी गईं हैं।

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