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पर्यावरण, सद्भाव और भाईचारे की ‘हरियाली’

अमन-एकता हरियाली यात्रा की शुरुआत करने से पहले परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने वैज्ञानिकों के एक दल से देवबन्द की काली नदी के पानी की जांच करवाई थी।

हरियाली यात्रा का अभिनव प्रयोग शुरू किया है।

सुनील दत्त पांडेय

उत्तराखंड के साधु-संतों और देवबन्द के मौलानाओं ने देश में सद्भाव और भाईचारा कायम करने के लिए अमन-एकता हरियाली यात्रा का अभिनव प्रयोग शुरू किया है। इस तीन दिवसीय अमन एकता हरियाली यात्रा ने देश की विभिन्न नदियों के तटों पर वृक्षारोपण कर नदियों को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया गया। ऋषिकेश में गंगा तट पर परमार्थ निकेतन आश्रम के पीतवणर्धारी ऋषिकुमारों की वेद ध्वनियों और मदरसों के छात्रों की अल्लाह-ओ-अकबर की गूंज के साथ अभिनव यात्रा का शुभारंभ हुआ और आज काली नदी के तट पर समापन हुआ।

जब यह यात्रा रविवार को ऋषिकेश, रायवाला, हरिद्वार होते हुए ज्वालापुर के दारुल उलूम रशीदिया ईदगाह ज्वालापुर मदरसा में पहुंची तो वहां के छात्र-छात्राओं ने साधु-संतों का जोरदार स्वागत किया। अमन-एकता हरियाली यात्रा की अगुआई परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, दशनामी संन्यासी परंपरा से जुड़े श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहन्त रविन्द्र पुरी महाराज और जमीयत उलेमा ए हिन्द के राष्ट्रीय सचिव मौलाना सैयद असद महमूद मदनी के नेतृत्व में शुरू हुई। इस यात्रा का दूसरा चरण नवंबर में देवबन्द की काली नदी से शुरू होगा और दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में समापन होगा।

यात्रा के विभिन्न पड़ावों के दौरान देवबन्द के महमूद सभागार परिसर, दारूल उलूम देवबन्द, होली होम पब्लिक स्कूल ननौता, जामिया बदरूल उलूम, गड़ीदौलत कांधला, मुहम्मदपुर राईन, मदनी नगर पनजीत, लढौरा, मुजफ्फरनगर के विभिन्न मंदिरों और मदरसों, मस्जिदों में साधु-संतों और मौलानाओं ने एक साथ मिलकर बेल, आम, पीपल, नीम, गुडहल, अमरूद, जामुन आदि के पौधे रोपे। ऐसा पहली बार देखने को मिला जब भगवाधारी साधु और श्वेत वस्त्र धारी मौलानाओं ने एक साथ मंदिरों-मस्जिदों, गिरजाघरों, गुरुद्वारों, स्कूल, कॉलेज और मदरसों में वृक्षारोपण किया और भारत माता की जय, हिन्दुस्तान जिन्दाबाद, वन्दे मातरम् और वंदे मातरम के नारे एक साथ गूंजे।

अमन-एकता हरियाली यात्रा की शुरुआत करने से पहले परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने वैज्ञानिकों के एक दल से देवबन्द की काली नदी के पानी की जांच करवाई थी। इस परीक्षण में यह पाया गया कि काली नदी में आॅक्सीजन की मात्रा शून्य है। टीसीओ 2,80,000 और बीओडी 40 है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह जल सिंचाई कि लिए भी उपयुक्त नहीं है। जामिया बदरूल उलूम के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद सैयद कासमी का कहना है कि यह यात्रा मुल्क के अन्दर हरियाली और खुशहाली की प्रतीक है। पौधा पेड़ बनकर जब फल देता है चाहे उस पेड़ के फल कोई खरीदकर खाए उससे पेड़ लगाने वाले को पुण्य मिलता है।

अमन-एकता हरियाली यात्रा देश की एकता और अखंडता के साथ-साथ देश के पर्यावरण को शुद्ध बनाने का भी कार्य करेगी। यह अपने तरह की अद्भुत और अनोखी यात्रा है। – श्रीमहन्त रविन्द्र पुरी महाराज श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव

यह ऐतिहासिक यात्रा दिलों को बदलने, दिलों में दिए जलाने, मोहब्बत और भाईचारा बढ़ाने की मुहिम है। हरियाली में हरि और अली दोनों का वास है। अमन-एकता हरियाली यात्रा लोगं के दिलों को जड़ती है। इसका ध्येय स्वच्छ पर्यावरण के माध्यम से स्वस्थ शरीर, सभ्य समाज और सकारात्मक सोच का निर्माण करना है।
-स्वामी चिदानंद मुनि

जीवन जीने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी है। पीने के लिए शुद्ध पानी, शुद्ध हवा और शुद्ध वातावरण। अगर यह तीनों चीजें नहीं होंगी तो व्यक्ति के पास सबकुछ होते हुए भी जीवन में सुख और शांति का भाव होगा और मनुष्य स्वस्थ भी नहीं रह पाएगा। हमारी यह यात्रा एक अभिनव प्रयोग के रूप में है।
-मौलाना सैयद असद महमूद मदनी जमीयत उलेमा ए हिन्द के राष्ट्रीय सचिव

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