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विधानसभा चुनाव में पराजय के चार माह बाद भी कांग्रेस में रार बरकरार

विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने हरीश रावत पर निशाना साधा तो हरीश रावत ने भी प्रीतम सिंह और उनके साथियों पर कई आरोप मढ़ दिए।

Harish Rawat | Congress | Uttrakhand Election
कांग्रेस नेता हरीश रावत (फोटो सोर्स: PTI/फाइल)।

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के चार महीने बाद भी कांग्रेस की रार थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सरकार के 100 दिन धूमधाम से मना रहे हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी के नेता विधानसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी के लिए आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। उत्तराखंड में कांग्रेस अनुशासनहीन पार्टी हो गई है। पार्टी की लड़ाई अब सड़कों पर आ गई है। पार्टी के दो दिग्गज नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के बीचॉ जुबानी जंग जारी है।

विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने हरीश रावत पर निशाना साधा तो हरीश रावत ने भी प्रीतम सिंह और उनके साथियों पर कई आरोप मढ़ दिए। हरीश रावत ने फेसबुक पर लिखा कि जो लोग मुझे विधानसभा चुनाव में हार के लिए दोषी बता रहे हैं और हर एक समारोह में यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने पार्टी का बेड़ा गर्क कर दिया, पार्टी को चुनाव हरवा दिया पहले वे अपने गिरेबान में झांके और यह देखें कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव हराने के लिए क्या-क्या कारनामे किए हैं।

रावत ने लिखा है कि हरिद्वार जिले में विधानसभा चुनाव में पार्टी के कुछ नेताओं ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को चुनाव हराने के लिए साजिशें रची यह किसी से छुपा नहीं है। दरअसल हरीश रावत पर तंज कसते हुए पिछले दिनों पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने उत्तराखंड में पार्टी की दुर्दशा के लिए हरीश रावत का नाम लिए बिना यह सवाल उठाया था कि 2016 में कांग्रेस पार्टी में जो बगावत हुई थी उसके लिए जो लोग जिम्मेदार थे, उनकी वजह से आज पार्टी की राज्य में यह दुर्गति हुई है और इसकी जिम्मेदारी उन लोगों को लेनी चाहिए जो उस समय पार्टी में सर्वेसर्वा बने हुए थे। प्रीतम सिंह का यह बयान आते ही हरीश रावत बुरी तरह से बौखला गए और उन्होंने फेसबुक और सोशल मीडिया पर प्रीतम सिंह का नाम लिए बिना उन पर और उनके समर्थकों पर हमले बोलने शुरू कर दिए।

2016 में जब रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे तब उनके अड़ियल रवैये के कारण ही पार्टी के नौ विधायकों ने बगावत कर दी थी और पार्टी के दिग्गज नेता सतपाल महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, सुबोध उनियाल, हरक सिंह रावत, उमेश शर्मा काऊ जैसे नेता भाजपा में शामिल हो गए थे जिससे राज्य में कांग्रेस की जड़ें हिल गई। बाद पार्टी आलाकमान में हरीश रावत और उनके समर्थकों को एक तरफ बिठाकर उत्तराखंड में पार्टी की बागडोर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष के रूप में इंदिरा हृदयेश को सौंप दी थी परंतु हरीश रावत ने पार्टी संगठन के समानांतर अपने निजी कार्यक्रम पूरे प्रदेश में लगाकर पार्टी संगठन को लगातार चुनौती दी थी।

पार्टी संगठन और हरीश रावत के बीच लगातार टकराव बढ़ता गया। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले इंदिरा हृदयेश की मृत्यु के बाद पार्टी आलाकमान ने गणेश गोदियाल को पार्टी अध्यक्ष व प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष बना दिया और हरीश रावत को विधानसभा चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया।

प्रीतम सिंह के कट्टर समर्थक संजय पालीवाल का कहना है कि विधानसभा चुनाव में सामूहिक नेतृत्व के आधार पर कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव लड़ने का फैसला किया था परंतु हरीश रावत ने स्वयंभू मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनकर पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी। इससे पार्टी को काफी नुकसान हुआ क्योंकि भाजपा ने पूरे चुनाव में हरीश रावत को निशाना बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ा और 2017 की तरह विधानसभा चुनाव इस बार हरीश रावत बनाम भाजपा हो गया और जिसका दुष्परिणाम कांग्रेस को भुगतना पड़ा।

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