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उत्तराखंड: असैनिक नेता पुत्र को सरकारी नौकरी मिलने से सियासी हड़कंप

उत्तराखंड में आजकल विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे की नौकरी को लेकर काफी हंगामा बरपा हुआ है। इससे सूबे की सियासत गरमाई हुई है।

Author देहरादून | Published on: April 11, 2018 6:15 AM
प्रेमचंद्र अग्रवाल और प्रीतम सिंह (क्रमशः)

उत्तराखंड में आजकल विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे की नौकरी को लेकर काफी हंगामा बरपा हुआ है। इससे सूबे की सियासत गरमाई हुई है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह की विधानसभा अध्यक्ष अग्रवाल के बेटे की नौकरी के पक्ष में कही गई बातों का वीडियो सोशल मीडिया पर आने से अग्रवाल के साथ सिंह भी विपक्षियों के निशाने पर आ गए हैं। इस वीडियो में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सिंह मित्र-विपक्ष की भूमिका में नजर आए और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे की नौकरी की वकालत करते हुए यह कह रहे हैं कि ऐसे तो राजनीतिक लोगों के परिजनों की नौकरी ही नहीं लग पाएगी और जब उपनल से 21 हजार लोगों की नौकरी लगी तब किसी को कोई तकलीफ क्यों नहीं हुई, अब क्यों हंगामा हो रहा है।

वायरल हुए वीडियो पर प्रीतम सिंह ने सफाई दी कि उपनल के माध्यम से पहले भी 21 हजार लोगों की नौकरी लगी, तब कोई नहीं बोला। विधानसभा अध्यक्ष राजनीतिक व्यक्ति हैं पर यह भी तो देखना चाहिए कि उनके बेटे की नौकरी किस आधार पर लगी। मुझे इस बाबत ठीक-ठीक जानकारी नहीं है उनकी बातों का विरोधी गलत अर्थ लगा रहे हैं। वे किसी का पक्ष नहीं ले रहे हैं। अब तक विवादों से दूर रहे मधुरभाषी और मिलनसार विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल विवादों के घेरे में आ गए। इससे नैतिकता सिद्धांतों व स्वच्छ प्रशासन की छवि देने वाला भाजपा संगठन व राज्य सरकार पशोपेश में पड़ गए। प्रेमचंद अग्रवाल के पक्ष में भाजपा संगठन और राज्य सरकार का कोई मंत्री सामने नहीं आया। परंतु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह जरूर उनके पक्ष में आए। यह बात प्रीतम सिंह का वीडियो वायरल होने के बाद सामने आई, जिस पर कांग्रेस भी पशोपेश में पड़ गई। विधानसभा अध्यक्ष के साथ दो अन्य लोगों को भी नौकरी दी गई थी, जबकि उपनल के माध्यम से सैनिकों के परिजनों को नियुक्ति नहीं देने का बाकायदा शासनादेश जारी है, परंतु इसका पालन नहीं किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष के बेटे के उपनल के माध्यम से सरकारी नौकरी देने पर विभिन्न बेरोजगार, युवा संगठनों और वामपंथी दलों ने जमकर विरोध किया, तो उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) ने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष के बेटे पीयूष अग्रवाल सहित तीन लोगों की नियुक्ति का अनुबंध रद्द कर दिया। साथ ही शासन की ओर से 2016 से अब तक गैर सैनिक बेरोजगारों की नौकरी उपनल के जरिए लगाने की भी जांच बैठा दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष के समर्थकों का कहना है कि उनके बेटे ने इस मामले में बवाल होने पर नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त ना करने का दावा करने वाली प्रदेश की भाजपा की सरकार की विधानसभा अध्यक्ष के बेटे की उपनल से नौकरी देने पर काफी फजीहत हुई।
उपनल के प्रबंध निदेशक अवकाश प्राप्त ब्रिगेडियर पीपीएस पाहवा ने बताया कि शासन ने वर्ष 2016 से उपनल के जरिए केवल सैनिकों के परिजनों को ही उत्तराखंड में सरकारी नौकरी देने तथा गैर सैनिकों के परिजनों को नौकरी नहीं देने का शासनादेश जारी किया था। उन्होंने कहा कि अब 2016 के बाद से उपनल के जरिए हुई सभी नियुक्तियों की जांच की जाएगी।

दरअसल शासन ने भी नैनीताल हाईकोर्ट के की ओर से 21 जुलाई 2015 को दिए गए आदेश के बाद ही उपनल से गैर सैनिकों को नौकरी देने पर रोक लगाई थी। नैनीताल हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि उपनल पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को नियुक्ति की सिफारिश करेगा। इसके बाद सरकार ने हाई कोर्ट का आदेश मानने में 11 महीने का समय लगा दिया और 9 जून 2016 को शासनादेश जारी किया था कि सरकारी महकमों, निगमों, स्थानीय निकायों तथा स्वायत्तशासी संस्थाओं में उपनल के मार्फत केवल पूर्व सैनिक और उनके आश्रितों को ही नौकरी दी जाएगी। यह सब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के वक्त हुआ था। तब उपनल सत्ता में बैठे जुगाड़बाजों का अड्डा बन कर रह गया था। इसकी पोल तब खुली जब विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के इंजीनियर बेटे की सरकारी नौकरी उपनल के माध्यम से लगी। अब तक बेदाग छवि के नेता रहे प्रेमचंद अग्रवाल की छवि को उनके पुत्र मोह ने तार-तार कर दिया है। विरोधियों को प्रेमचंद अग्रवाल पर उंगली उठाने का मौका मिल गया है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कांग्रेस नेता गोविंद सिंह कुंजवाल भी विधानसभा में अपने नाते-रिश्तेदारों को नौकरी में लगाए जाने को लेकर हमेशा विवाद में रहे हैं और भाजपा नेताओं के निशाने पर रहे हैं। परंतु विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के मामले में भाजपाइयों को सांप सूंघ गया है और वे खामोश हैं। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि मेरे बेटे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली थी। जल संस्थान को जरूरत थी तो उसकी भर्ती कर ली गई। उत्तराखंड सरकार के सैनिक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव आनंद वर्धन का कहना है कि इस प्रकरण के सामने आने पर की गई नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं और 2016 के बाद उपनल के माध्यम से लगाई जा रही नौकरियों की निष्पक्ष जांच बैठा दी गई है। जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।

उपनल का गठन क्यों?

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद इस पूर्व सैनिक बाहुल्य राज्य के पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को सरकारी नौकरी देने के लिए उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) का गठन किया गया था। वैसे तो उपनल का मकसद केवल पूर्व सैनिकों व उनके परिजनों को नौकरी देना था। परंतु सूबे की सत्ता में बैठे राजनेताओं के रिश्तेदारों और उनके खासमखास लोगों को उपनल के माध्यम से नेताजी की सिफारिश पर नौकरी दी जाने लगी। और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिजनों को नौकरी देने वाला उपनल राजनेताओं की सिफारिश पर नौकरी देने का केंद्र बनकर रह गया। अब तक यह सब चुपचाप चल रहा था परंतु इस खेल से पर्दा तब उठा, जब पिछले दिनों किसी को कानोकान खबर लगे बिना ही उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष अग्रवाल के बेटे पीयूष अग्रवाल की उपनल के माध्यम से उत्तराखंड जल संस्थान में सहायक अभियंता के पद पर नियुक्ति की गई। इससे पूरे सूबे की राजनीति में हड़कंप मच गया।

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