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उत्तराखंड: शुरू हो गई पढ़ाई-लिखाई, पर अब तक किताबें नहीं आईं

उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडेय के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा आपूर्ति की जाने वाली पाठ्य पुस्तकों को लेकर टकराव बढ़ गया है।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडेय ने कहा कि शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी राज्य सरकार की शिक्षा में सुधार की योजना को नाकाम बनाना चाहते हैं।

उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडेय के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा आपूर्ति की जाने वाली पाठ्य पुस्तकों को लेकर टकराव बढ़ गया है। सूबे में एनसीईआरटी की ओर से राज्य के सभी विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकें अप्रैल के महीने में ही आपूर्ति की जानी थीं। परंतु दो महीने बाद भी पुस्तकों की आपूर्ति पूरी तरह से नहीं की जा सकी। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में एनसीईआरटी की पुस्तकें सभी विद्यालयों में पढ़ाने का निर्णय लिया था। इस बाबत मंत्रिमंडल की बैठक में भी प्रस्ताव पारित किया गया था और पुस्तकों की सप्लाई की तारीख 15 अप्रैल तय की गई थी। परंतु अधिकारियों की लापरवाही से अब तक पाठ्य पुस्तकों के टेंडर नहीं हो पाए हैं, जबकि एक जुलाई से विद्यालय खुलेंगे। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कछुआ चाल को देखते हुए एक जुलाई तक पाठ्य पुस्तक पहुंचना संभव नहीं लगता है।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडेय ने कहा कि शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी राज्य सरकार की शिक्षा में सुधार की योजना को नाकाम बनाना चाहते हैं। शिक्षा मंत्री ने सूबे के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को भी लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए चिट्ठी भेजी है। अधिकारियों को सूबे के बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। सूबे के विद्यालयों में वार्षिक परीक्षा 31 मार्च तक निपट जाती है और 15 अप्रैल से 25 मई तक नया सत्र शुरू होता है। नए सत्र के शुरुआती दौर में छात्रों को एनसीईआरटी की पुस्तकें नहीं मिल पाने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और पढ़ाई भी एक महीने में किताबों की कमी के कारण ठीक से नहीं हो पाई।

सूबे के विद्यालयी शिक्षा विभाग को एनसीईआरटी से पुस्तक खरीदने के लिए मार्च महीने में टेंडर निकालने थे, परंतु टेंडर प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। राज्य के विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को एनसीईआरटी की 41 लाख 22 हजार पाठ्य पुस्तकें मिलनी थी, परंतु ये अभी तक विद्यालयों में नहीं पहुंच पाई हैं। उत्तराखंड के स्कूल-कॉलेजों की हालत बहुत दयनीय है। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल परीक्षा में इस साल पांच स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी बच्चा पास नहीं हुआ है, जिनमें देहरादून का साधुराम इंटर कॉलेज, टिहरी गढ़वाल का राजकीय हाईस्कूल बहारपुर, राजकीय सीनियर कॉलेज, पिनस्वार टहरी, चम्पावत जिले का राजकीय इंटर कॉलेज कंयूरा तथा चमोली जिले का राजकीय हाईस्कूल किमाणा का इस साल कोई भी छात्र हाईस्कूल पास नहीं कर पाया। चमोली जिले के किमाणा गांव का राजकीय विद्यालय एकमात्र ऐसा विद्यालय है, जिसमें 2016 से अब तक तीन साल में हाईस्कूल बोर्ड की परीक्षा एक भी छात्र या छात्रा परीक्षा पास नहीं कर पाए। सूबे के शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस विद्यालय में केवल एक छात्रा थी, जो फेल हो गई।

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