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उत्तराखंडः नौकरशाहों के बाद अब नेताओं पर तनेगी भृकुटि

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में चार सौ करोड़ रुपए के राष्ट्रीय राजमार्ग-74 घोटाले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है।

Author देहरादून। | Published on: September 19, 2018 5:55 AM
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि राज्य सरकार इस मामले में हमारी जांच कभी भी करवाए, हम इसके लिए तैयार हैं।

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में चार सौ करोड़ रुपए के राष्ट्रीय राजमार्ग-74 घोटाले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने इस भूमि मुआवजे घोटाले की जांच कर रही एसआइटी को पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के समय खोले गए कांग्रेस के बैंक खाते की जांच करने का भी फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से इस मामले में एसआइटी पूछताछ भी कर चुकी है। माना जा रहा है कि जल्दी ही दो पूर्व मुख्यमंत्रियों से भी इस मामले में पूछताछ की जा सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि राज्य सरकार इस मामले में हमारी जांच कभी भी करवाए, हम इसके लिए तैयार हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग-74 घोटाले में फंसे दो आइएएस अधिकारियों डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश कुमार यादव को पिछले दिनों इस मामले में निलंबित कर दिया गया था। उत्तराखंड में किसी घोटाले में दो आइएएस अधिकारियों का निलंबन पहली बार हुआ है। पांडेय सचिवालय में ग्राम्य विकास समेत कई विभागों में प्रभारी सचिव तथा यादव अपर सचिव पद पर तैनात थे। इन दोनों अधिकारियों ने उधमसिंह नगर जिले के जिलाधिकारी के तौर पर भूमि का मुआवजा नियम विरुद्ध कई गुना अधिक निर्धारित कर दिया था। विशेष पुलिस जांच दल (एसआइटी) की 10 जुलाई को शासन को सौंपी जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्मिक विभाग ने इन दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा था। इन दोनों अधिकारियों ने 10 अगस्त को अपना स्पष्टीकरण कार्मिक विभाग को दे दिया था।

इसके बाद एसआइटी ने इन दोनों अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति मांगी थी। जांच की समस्त प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद राज्य शासन ने केंद्रीय कार्मिक प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को इन दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए चिट्ठी भेजी थी। एसआइटी ने भूमि अधिग्रहण संबंधी मामलों में मुआवजा देने के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के प्रावधानों तथा केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय प्रक्रियाओं, दिशा निर्देशों और शासनादेशों के उल्लंघन के मामलों में जांच की थी, जिसमें खेती की जमीन को अकृषि किए जाने, नियम विरुद्ध मुआवजा तय करने तथा करोड़ों रुपए का प्रतिकर भुगतान करने के आदेश कर वित्तीय घोटालों की भी जांच की थी।

एसआइटी की आख्या के बाद ही शासन ने दोनों आइएएस अधिकारियों के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत निलंबन की कार्रवाई की थी। इन दोनों अधिकारियों को अपर मुख्यसचिव कार्मिक राधा रतूड़ी के साथ सम्बद्ध कर दिया गया है। शासन को अपने दो आइएएस अधिकारियों पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव के खिलाफ कार्रवाई करने में 64 दिन लग गए हैं। दोनों के खिलाफ एसआइटी ने 425 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी।

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