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जनसत्ता विशेष: पर्यटकों को लुभाने के लिए टिहरी झील में उड़ान भरेगा सी प्लेन

उत्तराखंड में टिहरी झील में पर्यटकों को लुभाने के लिए कई आकर्षक योजनाएं बनाई जा रही हैं। नौका विहार पहले से ही इस झील में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। टिहरी बांध की ऊंचाई समुद्र तल से 260.5 मीटर है।

जमीन और पानी दोनों में उड़ान भर सकता है यह प्लेन।

उत्तराखंड में टिहरी झील में पर्यटकों को लुभाने के लिए कई आकर्षक योजनाएं बनाई जा रही हैं। नौका विहार पहले से ही इस झील में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। टिहरी बांध की ऊंचाई समुद्र तल से 260.5 मीटर है। अब राज्य सरकार ने टिहरी झील में सी प्लेन उतारने की योजना बनाई है। इसके लिए जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने टिहरी में वाटर एअरोड्रम की स्थापना करने, हवाई सेवा के संचालन के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के साथ समझौता करने की योजना बनाई है। टिहरी में ढाई एकड़ जमीन राज्य सरकार वाटर एअरोड्रम बनाने के लिए देगी।

टिहरी में आधारभूत ढांचा विकसित करने की प्रक्रिया में होने वाले खर्च का 80 फीसद केंद्र सरकार वहन करेगी और 20 फीसद खर्चा राज्य सरकार उठाएगी। टिहरी झील में सी प्लेन संचालन के लिए केंद्र और राज्य सरकार के एक संयुक्त दल ने इसे सबसे उपयुक्त पाया है। भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण, महानिदेशालय नागरिक विमानन और प्राइवेट एअरलाइंस स्पाइस जैट ने इस क्षेत्र का अध्ययन करने के बाद प्री फिजिवलिटी अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है। साथ ही इस अध्ययन रिपोर्ट में क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत तमाम गतिविधियों के लिए त्रिपक्षीय समझौते का मसौदा भी राज्य सरकार को भेजा है। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है।

सी-प्लेन की खासियत
-जमीन और पानी दोनों में उड़ान भर सकता है यह प्लेन
-300 मीटर लंबे जलाशय से उड़ान भर सकता है यह विमान
-शुरू में 10 सीटर विमान ही सेवा में शामिल किया जाएगा

कई शहरों में यह सेवा
केंद्र सरकार एक साथ कई शहरों में सी प्लेन सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसमें टिहरी शहर भी शामिल है। पिछले साल इसके लिए डीजीसीए की टीम सर्वे कर चुकी है। इसमें टिहरी झील सी प्लेन सेवा के लिए आदर्श पाई गई थी।

वैट दर घटी
उत्तराखंड में सी प्लेन के र्इंधन पर वैट की दर 20 फीसद से घटाकर 1 फीसद कर दी गई है। यदि संबंधित हवाई कंपनी को सी प्लेन के संचालन में नुकसान होता है तो उसकी भरपाई केंद्र व राज्य सरकार मिल कर करेंगी। घाटे की सूरत में 80 फीसद केंद्र सरकार और 20 फीसद राज्य सरकार भरपाई करेगी। राज्य सरकार, केंद्र सरकार, विमान पत्तन प्राधिकरण में समझौते के तहत व्यवस्था की गई है।

टिहरी झील में वाटर एअरोड्रम की स्थापना ग्रीन फील्ड एअरपोर्ट की तरह की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार लाइसेंस देने की कार्यवाही भी करेगी। टिहरी बांध और झील एशिया की सबसे बड़ी झील मानी जाती है। इस तरह से टिहरी झील साहसिक पर्यटन के नए द्वार भी खोलेगी।
– त्रिवेंद्र सिंह रावत, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री

उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं है। टिहरी झील में सी प्लेन उतारने की परियोजना से इस पर्वतीय क्षेत्र में पर्यटन के क्षेत्र में और अधिक विकास होगा तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसी के साथ उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों पिथौरागढ, गौचर आदि क्षेत्रों में हवाई सेवाएं भी शुरू की जा रही हैं। देहरादून स्थित जौलीग्रांट एअरपोर्ट से कुमाऊं मंडल के नैनीताल जिले के पंतनगर के लिए हवाई सेवाएं शुरू की गई हैं। इससे नैनीताल और गढ़वाल में पर्यटन के क्षेत्र में और अधिक विकास होगा।
-दिलीप जावलकर, उत्तराखंड के पर्यटन सचिव

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