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उत्तराखंड: खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में लगेंगे कई उद्योग

उत्तराखंड में खाद्य प्रसंस्करण को लेकर कई नई संभावनाएं जागी हैं। अब तक उत्तराखंड में अकेला स्वामी रामदेव का पतंजलि फूडपार्क ही है जो देश का सबसे बड़ा फूडपार्क माना जाता है।

उत्तराखंड राज्य में खाद्य प्रसंस्करण विभाग की पहल पर इस क्षेत्र में करीब नौ सौ करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव विभिन्न कंपनियों ने भेजे हैं।

उत्तराखंड में खाद्य प्रसंस्करण को लेकर कई नई संभावनाएं जागी हैं। अब तक उत्तराखंड में अकेला स्वामी रामदेव का पतंजलि फूडपार्क ही है जो देश का सबसे बड़ा फूडपार्क माना जाता है। अब उत्तराखंड सरकार ने राज्य में खाद्य प्रसंस्करण को लेकर एक नई पहल की है। राज्य के कृषि और बागवानी विभाग ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को कोर सेक्टर में शामिल कर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। इससे पहाड़ के दूरदराज इलाकों में सेब, माल्टा, पहाड़ी नींबू गलगल समेत कई फलों की उपज का उचित मूल्य पर्वतीय किसानों को मिल सकेगा और उनके सामने बाजार की कोई समस्या भी आड़े नहीं आएगी। अब तक पवर्तीय क्षेत्र के किसानों को उनके फलों की उपज का सही दाम नहीं मिल पाता था और न ही उनके लिए कोई बाजार था। जिससे उनके फल बाजार में न आने के कारण खेतों में ही सड़े जाते थे या वे अपने फल औने-पौने दामों पर स्थानीय बाजारों में ही बेच देते थे।

उत्तराखंड राज्य में खाद्य प्रसंस्करण विभाग की पहल पर इस क्षेत्र में करीब नौ सौ करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव विभिन्न कंपनियों ने भेजे हैं। जिन पर इन कंपनियों की राज्य सरकार से सहमति बन गई है। जल्दी ही राज्य सरकार का उद्यान विभाग इन कंपनियों के साथ एमओयू करेगा। गुजरात की बालाजी बेकर्स कंपनी उत्तराखंड में अकेले ही खाद्य प्रसंस्करण में पांच सौ करोड़ रुपए का निवेश करेगी, जो स्वामी रामदेव की कंपनी के बाद दूसरे नंबर की खाद्य प्रसंस्करण की औद्योगिक इकाई होगी। गुजरात की कंपनी प्रदेश में चिप्स और अन्य उत्पाद बनाने के उद्योग लगाएगी।

वहीं, हैदराबाद की मैक्स वर्कस कंपनी भी उत्तराखंड में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर चुकी हैं। यह कंपनी चाय की पैकिंग, फलों के विभिन्न जूस आदि तैयार करेगी। इसके अलावा फ्लैक्स फूड कंपनी तथा कोल्ड चैन में कई कंपनियां एक साथ निवेश करने जा रही हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के उधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर में डेढ़ सौ करोड़ रुपए का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए राज्य के कृषि विभाग और मुंबई की रिद्धि-सिद्धि कंपनी के साथ एमओयू हो चुका है। यह कंपनी मक्का से स्टार्च बनाएगी। इस उद्योग में हर साल आठ लाख टन मक्के की खपत होगी। इसमें चार लाख टन मक्का उत्तराखंड के किसानों से खरीदा जाएगा। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। पहाड़ी क्षेत्रों का मक्का सबसे अच्छा माना जाता है। खासकर कुमाऊं और गढ़वाल के तराई क्षेत्रों में मक्के की फसल उच्च कोटि की होती है।

उत्तराखंड में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश की काफी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में निवेश के लिए कृषि और उद्यान विभाग की ओर से कई प्रस्ताव देश-विदेश की कंपनियों को भेजे गए हैं। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण के उद्योगों का जाल बिछने से किसानों को उनके कृषि उत्पादों का उचित मूल्य मिल सकेगा और किसानों के सामने ट्रांसपोर्ट की भी दिक्कत नहीं आएगी। -सुबोध उनियाल, कृषि उद्यान, कृषि प्रसंस्करण, फल उद्योग मंत्री, उत्तराखंड

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का उत्तराखंड के पर्वर्तीय क्षेत्रों के किसानों को तब ही असली फायदा होगा, जब खाद्य प्रसंस्करण की औद्योगिक इकाइयां पर्वर्तीय क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी। इससे किसानों और कंपनियों दोनों को ही फायदा होगा। किसानों को उनके ही घर में उनकी पैदावार की अच्छी कीमत मिल जाएगी और कंपनियों का परिवहन का भी खर्च बचेगा। साथ ही रोजगार के अवसर पहाड़ों में ही वहां के नौजवानों को मिलेंगे, जिससे पलायन भी रुकेगा। -डॉ सुनील बत्रा, अर्थशास्त्री उत्तराखंड

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