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बाघों की तादाद में उत्तराखंड ने मारी बाजी, 361 हुई संख्या

कर्नाटक के जंगलों में चार सौ बाघ हैं। अगर क्षेत्रफल के हिसाब से देखे तों कर्नाटक के मुकाबले उत्तराखंड राज्य का क्षेत्रफल कम है और यहां बाघों की संख्या क्षेत्रफल के हिसाब से ज्यादा है। इस तरह उत्तराखंड क्षेत्रफल के अनुपात में बाघों की संख्या के मामले में देश का नंबर एक राज्य बन गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर। (Express Photo: Amrut Naik)

उत्तराखंड में बाघों की तादाद अच्छी-खासी बढ़ी है। सूबे के जंगलात महकमे का दावा है कि राज्य के जंगलों में इस साल 361 बाघ पाए गए हैं। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक राजेंद्र महाजन और मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डीबीएस खाती ने सूबे में बाघों की गणना की ताजा जानकारी दी।  खाती ने बताया कि उत्तराखंड, कर्नाटक के बाद बाघों की तादाद के हिसाब से दूसरे नंबर पर है। कर्नाटक के जंगलों में चार सौ बाघ हैं। अगर क्षेत्रफल के हिसाब से देखे तों कर्नाटक के मुकाबले उत्तराखंड राज्य का क्षेत्रफल कम है और यहां बाघों की संख्या क्षेत्रफल के हिसाब से ज्यादा है। इस तरह उत्तराखंड क्षेत्रफल के अनुपात में बाघों की संख्या के मामले में देश का नंबर एक राज्य बन गया है।  उन्होंने बताया कि पहली बार उत्तराखंड में स्थित दो टाईगर रिजर्व पार्कों के अलावा सूबे के अन्य जंगलों में भी बाघों की गिनती की गई है। इस साल जिम कार्बेट राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क में 208, राजाजी राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क में 34, राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्र में तीन और सूबे के अन्य जंगलों में 116 बाघ मिले हैं।

पिछले साल हुई गिनती में जिम कार्बेट राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क में 163 और राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में 16 बाघ मिले थे। इस तरह जिम कार्बेट राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क में 45 और राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में 18 बाघों की बढ़ोतरी हुई है।  खाती का मानना है कि उत्तराखंड का वन विभाग बाघों के संरक्षणके लिए अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा सचेत है। उन्होंने कहा कि जिम कार्बेट और राजाजी राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्कों की जो सीमा उत्तर प्रदेश से लगी है, वहां पर अवैध शिकार ज्यादा होते हैं। अगर उत्तर प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों को बफर जोन में शामिल कर ले तो बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा और ज्यादा पुख्ता हो जाएगी। इससे बाघों और अन्य वन्य जीवों की तादाद में और अधिक बढ़ोतरी होगी। उन्होंने बताया कि बाघों के संरक्षण के मामले में उत्तराखंड के पौड़ी जिले का लैंसडोन वन प्रभाग पूरे देश में पहले नंबर और पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर आया है। 30 जुलाई को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में लैंसडोन वन प्रभाग को सम्मानित किया जाएगा।  खाती के मुताबिक, बाघों की गिनती के लिए उत्तराखंड के जंगलों में 1 हजार 997 कैमरे लगाए गए थे। बाघों की गिनती के लिए विश्व प्रकृति निधि का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने जंगलात महकमे के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया था। जिम कार्बेट राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क में 535 कैमरे ट्रैप बाघों की गिनती के लिए लगाए गए।

इनमें 4 लाख 24 हजार 870 विभिन्न वन्य जीवों के फोटों कैद हुए। इनमें से 3 हजार 892 फोटों बाघों के हैं। इन फोटों में से 2 हजार 539 फोटों बाघों की गणना के लिए उपयोग किए गए। इन सब फोटों के मिलान के बाद इस साल जिम कार्बेट राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क में 208 बाघ चिह्नित किए गए। इस पार्क के रामनगर प्रभाग में 99 विशिष्ट बाघों और 6 विशिष्ट शावकों की पहचान की गई। जबकि कालागढ़ प्रभाग में 109 विशिष्ट बाघों की पहचान की गई। रामनगर प्रभाग में विभिन्न बिंदुओं में 235 और कालागढ़ प्रभाग में 332 कैमरे लगाए गए थे। ये कैमरे 55 दिनों के लिए लगाए गए। जंगलात विभाग के मुताबिक सूबे के दूसरे राजाजी राष्ट्रीय टाइगर रिजर्व पार्क में 562 कैमरे बाघों की गिनती के लिए इस पार्क के 10 प्रभागों में लगाए गए। इनसे 620 बाघों की फोटों प्राप्त हुई। इनका गहन विश्लेषण करने के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में 34 विशिष्ट बाघों और पांच विशिष्ट शावकों की पहचान हुई। उत्तराखंड में बाघों की बढ़ती तादाद से जहां सूबे का जंगलात महकमा बेहद खुश है वहीं इस महकमे की जिम्मेदारी बाघों की सुरक्षा को लेकर और ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि बाघों की बढ़ती तादाद को देखते हुए वन्य जीव तस्कर इस क्षेत्र में बाघों का अवैध शिकार करने के लिए और ज्यादा सक्रिय होने की संभावना है, बाघों की बढ़ती तादाद की वजह से इन दोनों पार्कों में अब पर्यटकों की तादाद भी बढे़गी।

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