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उत्तराखंड: आधे-अधूरे बंदोबस्त के बीच पहुंचने लगे कांवड़िए

आधी-अधूरी तैयारियों के बीच हरिद्वार और ऋषिकेश में 15 दिवसीय कांवड़ मेला शुरू हो गया है। जिला प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बावजूद कांवड़ मेला क्षेत्र की सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो पाई हैं।

मेले के दौरान हरिद्वार के जिलाधिकारी ने तीन से नौ अगस्त तक जिले के सभी स्कूल-कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए हैं।

आधी-अधूरी तैयारियों के बीच हरिद्वार और ऋषिकेश में 15 दिवसीय कांवड़ मेला शुरू हो गया है। जिला प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बावजूद कांवड़ मेला क्षेत्र की सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो पाई हैं। जिला प्रशासन ने हरिद्वार मायापुर से लेकर नारसन तक गंग नहर कांवड़ पटरी को 25 जुलाई तक गड्ढा मुक्त करने का दावा किया था। कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद भी नहर पटरी जगह-जगह से टूटी पड़ी है और पटरी पर गहरे गड्ढे और कीचड़ हो रहा है।

गंगाजल खजाना है कांवड़ियों का

नहर पटरी से कांवड़िए अपनी बड़ी-बड़ी और सुंदर सजीली कावड़ लेकर पैदल ही ढाई-तीन सौ किलोमीटर लंबा सफर तय करके अपने-अपने गांवों में जाते हैं और सावन के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी मास शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक करते हैं। कांवड़िए बड़ी तादाद में हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड से गंगाजल भरकर पैदल यात्रा करते हैं। गंगाजल की यह पैदल यात्रा बड़ी अनोखी है। जिन बोतलों या डिब्बों में कावड़िए गंगाजल लेकर जाते हैं, उन्हें वे ‘खजाना’ बोलते हैं। कांवड़िए एक-दूसरे को ‘भोला’ कह कर पुकारते हैं। वे अपने को ‘भोल’ का ‘गण’ मानते हैं।

प्रशासन के दावे ढाक के तीन पात

कांवड़ मेले की व्यवस्था को लेकर अब तक शासन-प्रशासन की छह से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं। उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली के आला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। परंतु नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही निकला है। जहां उत्तरप्रदेश के अधिकारियों ने कानफोडू डीजे पर पाबंदी लगाने से मना कर दिया है, वहीं कई भाजपा विधायकों के दबाव में उत्तराखंड में भी डीजे पर लगी पाबंदी पुलिस प्रशासन को हटाने को मजबूर होना पड़ा है। कुल मिलाकर प्रशासन उच्चतम न्यायालय के ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन कराने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।

प्रशासन ने छह फुट से ऊंची कावड़ लाने पर पाबंदी लगा दी है और जो कावड़िए छह फुट से ज्यादा ऊंची कांवड़ लेकर आएंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बावजूद कांवड़िए 10-12 फुट से बड़ी कांवड़ लेकर हरिद्वार आ रहे हैं हरिद्वार से नारसन तक जाने वाली नहर पटरी करीब 67 किलोमीटर लंबी है, परंतु उसे ठीक करने में प्रशासन नाकाम रहा है। जिलाधिकारी हरिद्वार ने सिंचाई विभाग उत्तराखंड को नहर पटरी को कांवड़ मेले से पहले ठीक करने के आदेश दिए थे। परंतु सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने यह आदेश रद्दी की टोकरी में डाल दिए हैं। नहर पटरी के अलावा मुजफ्फरनगर से हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। 10 साल से यह राष्ट्रीय राजमार्ग अधूरा पड़ा है।

मेले के दौरान हरिद्वार के जिलाधिकारी ने तीन से नौ अगस्त तक जिले के सभी स्कूल-कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए हैं। वहीं भारी वाहनों का आवागमन भी नहीं हो सकेगा। इससे हरिद्वार के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में 300 से ज्यादा लगे उद्योगों में माल की ढुलाई और सप्लाई का काम 15 दिन तक बंद रहेगा। सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र गर्ग का कहना है कि कांवड़ मेला के दौरान न तो हरिद्वार सिडकुल क्षेत्र में माल आ पाता है और न ही बाहर भेजा जा सकता है।

हिंदू-मुसलिम एकता का प्रतीक कांवड़ मेला

कांवड़ मेला हिंदू-मुसलिम एकता का प्रतीक माना जाता है। बिजनौर, मुजफ्फरनगर और मेरठ से मुसलिम समाज के लोग कांवड़ बनाने का काम हरिद्वार में आकर करते है। हरिद्वार की उपनगरी ज्वालापुर में मुसलिम समाज के लोग कांवड़ियों के लिए खाने-पीने के पंडाल लगाकर उनके ठहरने और उनके स्वागत सत्कार करने का जिम्मा हर साल उठाकर हिंदू-मुसलिम एकता की मिसाल पेश करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता राव आफाक का कहना है कि कांवड़िए हमारे भाई हैं। उनका स्वागत करना हमारी गंगा-जमुनी तहजीब का एक उदाहरण है।

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