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उत्तराखंड: भूख से लड़की की मौत के चलते गरमाई राजनीति

मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस लड़की की मौत भुखमरी से नहीं हुई है। इस परिवार के लोगों को दिमागी बीमारी होने की वजह से इस लड़की की मौत हुई है।

Author देहरादून | April 18, 2017 1:52 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

अल्मोड़ा जिले के सीमांत गांव खजुरानी में 17 साल की सरिता की रहस्यमय स्थिति में मौत हो जाने से उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। इस मामले को लेकर जहां सूबे की भाजपा सरकार बचाव की मुद्रा में है, वहीं कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल राज्य सरकार को घेरने में जुटे हैं।  इस लड़की की मृत्यु को को लेकर अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक महेश नेगी ने खुद ही अपनी राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। नेगी ने लड़की की मौत भूख से होने की बात कही थी और अल्मोड़ा जिला प्रशासन की जमकर खिंचाई की थी। विधायक के आरोप के बाद इस मामले को लेकर जबरदस्त विवाद पैदा हो गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अल्मोड़ा के जिलाधिकारी से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की। मुख्यमंत्री का कहना है कि मैंने इस मामले में अल्मोड़ा के जिलाधिकारी से पूरी जानकारी ली है। इस पीड़ित परिवार की फौरन मदद करने के निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस लड़की की मौत भुखमरी से नहीं हुई है। इस परिवार के लोगों को दिमागी बीमारी होने की वजह से इस लड़की की मौत हुई है। इस बीमारी से परिवार के चार लोग विकलांग हो चुके थे, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके निर्देश पर जिला प्रशासन ने गांव में कैंप लगाकर विकलांगों की आर्थिक मदद के लिए काम किया। रावत ने इस मामले में विधायक महेश नेगी से भी पूछताछ की है।

अल्मोड़ा के जिलाधिकारी सचिन बंसल का कहना है कि सरिता की भूख से मौत नहीं हुई है। इस लड़की की मौत कुपोषण के बजाय मानसिक विकलांगता की वजह से हुई है। उन्होंने कहा किडॉक्टरों ने भी इस लड़की की मौत मानसिक बीमारी के कारण होना बताया है। जिलाधिकारी ने बताया कि इस लड़की को कौन-सी मानसिक बीमारी थी, इसका पता इसलिए नहीं चल पाया कि युवती के घरवालों और गांव वालों ने प्रशासन की टीम के पहुंचने से पहले ही इस लड़की का दाह संस्कार कर दिया था, जिस कारण पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि इस परिवार के लोगों को विकलांग पेंशन मिल रही थी और राशन से भी खाद्य सामग्री मिल रही थी।  सामाजिक कार्यकर्ता नवीन बिष्ट का कहना है कि इस परिवार के लोग दिमागी तंत्र की एक बीमारी से कई वर्षों से जूझ रहे हैं। दिमागी बीमारी के कारण इस परिवार के लोग विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। इससे पहले इस लड़की के परिवार में उसके बड़े भाई खुशाल और उसकी बहन की मौत हो चुकी है। इस परिवार के मुखिया पूर्व फौजी लाल सिंह की छह महीने पहले सत्तर साल की उम्र में मृत्यु हुई थी। इस परिवार के भरण पोषण का कोई सहारा नहीं रह गया था।

सचिन बंसल के मुताबिक, तीन हफ्ते पहले जब उन्होंने इस लड़की के गांव में कैंप लगाया था, तब इस परिवार के किसी भी सदस्य के पास विकलांगता का प्रमाण पत्र नहीं था। इस परिवार की मुखिया और लाल सिंह की विधवा की पेंशन भी उन्होंने ही तीन हफ्ते पहले शुरू करवाई थी। इससे पहले परिवार के मुखिया को विधवा पेंशन नहीं मिलती थी। इस तरह जिला प्रशासन इस खजुरानी के पूर्व फौजी परिवार को लेकर लापरवाह बना हुआ था। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक, लाल सिंह के परिवार के सदस्यों में पहले दिमागी बीमारी फैलती है और धीरे-धीरे यह बीमारी पूरे शरीर को अपाहिज बना देती है। सरिता इसी बीमारी से मौत का शिकार बनी। सवाल यह उठता है कि सरिता की मौत से पहले जिला प्रशासन इस परिवार में फैल रही बीमारी के इलाज को लेकर चौकन्ना क्यों नहीं हुआ।  उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि सरिता की रहस्यमय स्थिति में मौत होना दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने इस मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर इस लड़की की मौत भूख से हुई है तो यह राज्य सरकार के लिए एक शर्मनाक बात है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पार्टी की एक जांच टीम खजुरानी गांव भेजी है। उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि पूर्व फौजी लाल सिंह के परिवार को कई महीनों से एपीएल और बीपीएल का राशन नहीं मिल रहा था। और यह परिवार भुखमरी का शिकार हो रहा था। उन्होंने कहा कि एक लड़की की भुखमरी से अकाल मृत्यु होना राज्य के लिए कलंक है। उपाध्याय ने मुख्यमंत्री को चिट्टी भेजकर इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों को सजा देने की मांग की है।

 

 

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