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उत्तराखंड: कर्ज में डूबे किसान ने की आत्महत्या

सुरेंद्र सिंह ने पांच साल पहले साधन सहकारी समिति पुरानाथल से 75 हजार रुपए का कर्ज लिया था। चार साल पहले उन्होंने ग्रामीण बैंक बेरीनाग से 50 हजार रुपए का कर्ज लिया।

Author देहरादून | June 18, 2017 05:18 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (फाइल फोटो)

उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के कर्ज में डूबे सुरेंद्र सिंह नाम के एक किसान ने गुरुवार रात आत्महत्या कर ली। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने जिले की बेरीनाग तहसील में प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी इसके विरोध में जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया। राज्य सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। उत्तराखंड के इतिहास में कर्ज में डूबे किसी किसान की यह पहली आत्महत्या है।  पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी रविशंकर ने बताया कि इस मामले की न्यायिक जांच बेरीनाग के एसडीएम करेंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन पिथौरागढ़ के मुताबिक किसान ने कोई जहरीला पदार्थ पीकर आत्महत्या की है।

बरीनाग तहसील के पुरानाथल गांव के सरतोला तोक निवासी सुरेंद्र सिंह ने पांच साल पहले साधन सहकारी समिति पुरानाथल से 75 हजार रुपए का कर्ज लिया था। चार साल पहले उन्होंने ग्रामीण बैंक बेरीनाग से 50 हजार रुपए का कर्ज लिया। सुरेंद्र ने कुछ दिन पहले अपने गांव में कई लोगों को बताया था कि कर्ज जमा करने के लिए बैंक दबाव बना रहा है। ग्रामीण बैंक ने उसे कर्ज की किश्त न जमा करने पर नोटिस दिया था। तनाव के चलते गुरुवार रात उसने अपने घर पर ही जहरीला पदार्थ खा लिया। उसके परिजन उसे गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे पिथौरागढ़ जिला चिकित्सालय भेज दिया। जहां शुक्रवार को सुरेंद्र सिंह की मौत हो गई। मृतक के दो बेटे हैं और दोनों ही बेरोजगार हैं। दोनों बेटों के नाम पर भी कृषि कर्ज है। एसडीएम विवेक प्रकाश ने बताया कि किसान के आत्महत्या की जानकारी मिली है। आत्महत्या के कारणों का जांच के बाद ही पता चल चकेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किसान के आत्महत्या के मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। और मृतक किसान के परिवार को हरसंभव सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसान ने कर्ज के चलते आत्महत्या की है। क्योंकि किसान ने आत्महत्या करने की वजह का कोई पत्र नहीं छोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सभी के ऊपर 45 हजार रुपए का कर्ज है। मेरे ऊपर भी 11 लाख रुपए का कर्ज है। राज्य की आर्थिक हालात हमें जो पिछली सरकार से विरासत में मिली है। उससे राज्य में किसी का भी कर्ज माफ नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस घटना को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए। किसानों को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह संवेदनशील है।

वहीं कांग्रेस ने किसान की आत्महत्या के मामले पर शनिवार को देहरादून में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की आर्थिक हालत को लेकर कतई गंभीर नहीं है। कांग्रेस ने किसानों की माली हालत को देखते हुए किसानों की कर्जमाफी का मामला विधानसभा में उठाया था। परंतु राज्य सरकार ने उसे अनसुना कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के वक्त अपनी दृष्टि पत्र में राज्य के किसानों का कर्जा माफ करने का वादा किया था। और यह दृष्टि पत्र केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देहरादून में जारी किया था। अब केंद्रीय वित्तमंत्री और मुख्यमंत्री कर्जमाफी को लेकर वादाखिलाफी कर रहे हैं। वहीं हरिद्वार में शनिवार को गंगा के किनारे लाल कोठी में भारतीय किसान यूनियन की ओर से आयोजित किसान कुंभ में सुरेंद्र सिंह की आत्महत्या का मामला छाया रहा। किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार को जमकर कोसा और राज्य सरकार से इस्तीफा मांगा।

 

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