ताज़ा खबर
 

उत्तराखंडः ब्रह्माण्डीय ऊर्जाओं की मदद से रोगों का इलाज

अब आपको इलाज के लिए न दवाओं की जरूरत पड़ेगी और न ही खून-मल-मूत्र जांच की। न ही अस्पताल जाना पड़ेगा न ही ऑपरेशन कराना पड़ेगा।

हमारे पूर्वज ऋषि-मुनियों के पास ब्रह्माण्डीय विज्ञान चिकित्सा पद्धति का विशाल भंडार था। वे प्राकृतिक परिवेश में रहते थे। प्रकृति से उनका तालमेल स्थापित था।

अब आपको इलाज के लिए न दवाओं की जरूरत पड़ेगी और न ही खून-मल-मूत्र जांच की। न ही अस्पताल जाना पड़ेगा न ही ऑपरेशन कराना पड़ेगा। अब आप ब्रह्माण्डीय ऊर्जाओं की मदद से स्वस्थ व तनाव रहित जीवन व्यतीत कर सकेंगे और ब्रह्माण्डीय ऊर्जा आपके समस्त रोगों को ठीक कर सकेगी। हीलिंगपैथी आपको घर बैठे ही ठीक कर देगी। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से स्वस्थ खुशहाल जीवन जीने की कला पर बीते तीन सालों से शोध कर रहे डॉक्टर अजय मगन का कहना है कि इससे जीवन को स्वस्थ रखने की पद्धति पांच हजार साल पुरानी है। हमारे पूर्वज ऋषि-मुनियों के पास ब्रह्माण्डीय विज्ञान चिकित्सा पद्धति का विशाल भंडार था। वे प्राकृतिक परिवेश में रहते थे। प्रकृति से उनका तालमेल स्थापित था। परंतु धीरे-धीरे यह विज्ञान लुप्त होता चला गया।

डॉ अजय मगन तीन पीढ़ियों के वैद्य हैं। उनके दादा व पिता वैद्य थे। वे खुद आयुर्वेद चिकित्सक हैं। उनका कहना है कि साढ़े चार साल पहले सड़क दुर्घटना में वे बुरी तरह घायल हो गए थे। उनके शरीर पर तीन सौ टांके लगे थे और उनके शरीर की हड्डियां 64 जगहों से टूट चुकी थी। उनका इलाज मुजफ्फरनगर के अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टरों ने उन्हें 10-12 महीने तक बिस्तर पर ही आराम करने की सलाह दी थी। वे बुरी तरह अवसाद के शिकार हो गए थे। जीवन से उन्हें निराशा हो चुकी थी। वे बताते है कि उनकी योगी फार्मेसी में उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के पर्वतीय क्षेत्र गोपेश्वर में 104 वर्षीय एक संत जड़ी-बूटी लेने आते थे।

वे मेरे घर आए और उन्होंने मेरी यह हालत देखी तो उन्होंने मेरा इलाज ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से करना शुरू किया और मुझे हीलिंगपैथी से जल्दी ही ठीक कर दिया। जो डॉक्टर मुझे 10-12 महीने तक आराम करने की सलाह दे रहे थे, उसके उलट इस संत ने मुझे हीलिंगपैथी से 15-20 दिन में ही ठीक कर दिया और मैं चलने लगा। यही से डॉक्टर अजय मगन को हीलिंगपैथी यानि ब्रह्माण्डीय ऊर्जा पद्धति के बारे में जानने और सीखने की उत्सुकता जागी। उन्होंने इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को सीखने और जानने के लिए भारत के विभिन्न संतों, प्राकृतिक चिकित्सकों के अलावा जर्मनी, रूस, थाईलैंड, नीदरलैंड, इंडोनेशिया आदि देशों का भ्रमण किया है और हीलिंग पद्धति के विश्व के जाने माने विशेषज्ञों से मिले।

उनका कहना है कि रूस और जर्मनी में सबसे ज्यादा हमारे प्राचीन ग्रंथों, वेद-पुराणों व उपनिषदों पर शोध कार्य हुआ है। हरिद्वार के उपनगर कनखल में डॉ अजय मगन ने आदि दक्षिण कालीपीठ चंडीघाट के प्रमुख महामंडलेश्वर और साधक स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी के साथ मिलकर कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र की स्थापना की है। इसमें ब्रह्माण्डीय ऊर्जा पद्धति की 14 प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। जो मनुष्य में नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर उसमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। इनके माध्यम से मनुष्य स्वस्थ किया जाता है। 90 ऊर्जा दिवसों पर आधारित यंत्र बनाए गए हैं। इनमें किसी भी परिस्थिति में स्वास्थ्य की रक्षा करने वाला रक्षा यंत्र, चक्र एवं आभामंडल यंत्र, ऊर्जा शक्ति यंत्र, ब्रह्माण्डीय ऊर्जा संचयित एवं समन्वय स्थापित करने वाला यंत्र, नकारात्मक शक्तियों को विध्वंस करने वाला यंत्र, सकारात्मक शक्तियों को उत्पन्न कर उन्हें संचालित करने वाला यंत्र समेत कई यंत्र व प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।

मर्म चिकित्सा पद्धति के जानकार राजकीय ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के निदेशक डॉक्टर सुनील जोशी का कहना है कि मनुष्य के शरीर में कई ऐसे बिन्दु होते हैं जिनका स्पर्श करने से लाइलाज बीमारियां भी ठीक की जा सकती हैं। रामायण और महाभारत काल में मर्म चिकित्सा पद्धति बहुत विकसित थी। आधुनिकता की अन्धी चमक में यह विद्या लुप्तप्राय हो गई। अब इस विद्या को फिर से जीवित करके लोगों का इलाज किया जा रहा है और लोगबाग बिना दवा के ठीक हो रहे हैं। दिव्य-योग-शक्तियों की संचालिका अंतराष्ट्रीय योग एवं आध्यात्मिक विशेषज्ञ डॉ राधिका नागरथ का कहना है कि जितना हम प्रकृति यानि ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से तालमेल रखेंगे उतने ही हम स्वस्थ रहेंगे। परंतु हम आधुनिक विज्ञान के चक्कर में अपनी प्राचीन मंत्र-यंत्र शक्तियों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूर दराज में बैठे व्यक्तियों को भी यंत्र शक्ति के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

डॉक्टर अजय मगन का दावा है कि यह सब ब्रह्माण्डीय वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित है। इस केंद्र में पिरामिडनुमा यंत्र बनाए गए हैं और विभिन्न प्रकार की धातुओं, पत्थरों, शंख ध्वनि, घंटा ध्वनि आदि से मनुष्य के विभिन्न रोगों का इलाज किया जाता है। साथ ही एक ऐसी प्रयोगशाला भी बनाई गई जो बिना इंजेक्शन, बिना रक्त तथा मल-मूत्र के नमूने लिए शरीर के सभी अंगों की बीमारियों की जांच करती है। कास्मिक रिवाइवल केंद्र के बाहर एक दवाइयों का कूड़ादान बनाया गया है। दवाइयां इस कूड़ाघर में डालकर प्रकृति से तालमेल बिठाकर इलाज करने की विधा सिखाई जाती है।

आदि दक्षिण कालीपीठ चंडीघाट हरिद्वार के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी का कहना है कि हमारा प्रयास अति प्राचीन ब्रह्माण्डीय ऊर्जा शक्ति को पुनर्जीवित कर जनमानस को स्वस्थ बनाना है, जहां आज बड़े-बड़े अस्पतालों में इलाज का खर्च उठाकर भी लोगबाग ठीक नहीं हो पाते है, वहां ब्रह्माण्डीय ऊर्जा चिकित्सा केंद्र में बहुत कम खर्च पर लोगों को ठीक करने का हमारा प्रयास है बल्कि गरीबों के लिए केंद्र में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाएंगे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 उत्तराखंड: खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में लगेंगे कई उद्योग
2 उत्तराखंडः नौकरशाहों के बाद अब नेताओं पर तनेगी भृकुटि
3 उत्तराखंड के छात्रावास में छात्रा से सामूहिक बलात्कार
ये पढ़ा क्या?
X