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उत्तराखंडः स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की लड़ाई को आगे बढ़ाएगा मातृसदन

पर्यावरण विज्ञानी से संत बने प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ‘स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद’ की मृत्यु के बाद सियासत शुरू हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल गंगा पुत्र के चले जाने के बाद राजनीतिक नफा-नुकसान का हिसाब-किताब करने में जुटे हैं।

प्रोफेसर अग्रवाल ‘स्वामी सानंदह्ण की मौत के बाद कांग्रेस विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा वैश्य समाज के विभिन्न संगठनों ने मशाल जुलूस, प्रदर्शन तथा धरने देने शुरू कर दिए हैं।

पर्यावरण विज्ञानी से संत बने प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ‘स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद’ की मृत्यु के बाद सियासत शुरू हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल गंगा पुत्र के चले जाने के बाद राजनीतिक नफा-नुकसान का हिसाब-किताब करने में जुटे हैं। प्रोफेसर अग्रवाल की मौत से जहां भाजपा सरकार कठघरे में खड़ी है, वहीं कांग्रेस पर्यावरणविद् प्रोफेसर अग्रवाल की मौत को मुद्दा बनाने की फिराक में है। प्रो अग्रवाल की मौत को लेकर मातृसदन और एम्स प्रशासन भी आमने-सामने हैं। मातृसदन प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत के लिए एम्स प्रशासन, हरिद्वार जिला प्रशासन और राज्य सरकार को दोषी ठहराता है।

गंगा में खनन को लेकर हरीश रावत की सरकार स्वामी शिवानंद सरस्वती के निशाने पर थी। दोनों में छत्तीस का आंकड़ा था। परंतु 22 जून से मातृसदन में अनशन पर बैठे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल स्वामी सानंद के अनशन का राजनीतिक लाभ लेने के लिए हरीश रावत ने मातृसदन जाने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। दूसरी तरफ मातृसदन से लंबे समय तक दूरी बनाए रखने वाली केंद्रीय मंत्री उमा भारती और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक प्रोफेसर अग्रवाल के अनशन से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए मातृसदन पहुंचे थे।

प्रोफेसर अग्रवाल ‘स्वामी सानंदह्ण की मौत के बाद कांग्रेस विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा वैश्य समाज के विभिन्न संगठनों ने मशाल जुलूस, प्रदर्शन तथा धरने देने शुरू कर दिए हैं। जब प्रोफेसर अग्रवाल अनशन पर बैठे थे, तब ज्यादातर सामाजिक संगठनों ने प्रोफेसर अग्रवाल की सुध तक नहीं ली थी। अब प्रोफेसर अग्रवाल की मौत के बाद हर कोई लाभ लेने की कोशिश में है। वहीं भाजपा सरकार प्रोफेसर अग्रवाल की मौत के बाद सबसे ज्यादा संकट में है। 112 दिनों तक अनशन पर प्रोफेसर अग्रवाल के साथ भाजपा नेताओं और उनकी सरकार के नुमाइंदों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई जबकि यूपीए सरकार के वक्त 13 जून 2013 में गंगा रक्षा के लिए अनशन पर बैठे प्रोफेसर अग्रवाल को मनाने के लिए तब के केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश खुद दो बाद दिल्ली से चलकर हरिद्वार के मातृसदन आश्रम में आए थे और उनकी मांगों को मान लिया था। परंतु भाजपा सरकार ने प्रोफेसर अग्रवाल के अनशन और उनकी मांगों को मानने को लेकर गंभीरता से कभी पहल ही नहीं की। भले ही भाजपा के एजेंडे में गंगा रक्षा मुख्य मुद्दा रहा, परंतु भाजपा की सरकारों के वक्त गंगा को बचाने के लिए बेमियादी अनशन पर बैठे दो संतों की मौत हो चुकी है।

13 जून 2011 को मातृसदन के स्वामी निगमानंद की आमरण अनशन के दौरान हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट देहरादून में मृत्यु हुई थी, तब उत्तराखंड में भाजपा की सरकार थी और अब जब 11 अक्तूबर को प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ‘स्वामी सानंद’ का गंगा रक्षा के लिए अनशन करते हुए एम्स ऋषिकेश अस्पताल में निधन हुआ तो केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकारें हैं। इस बार प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल जब 22 जून को आमरण अनशन पर बैठे थे, तब उन्होंने आर-पार की लड़ाई ठान ली थी। तीन अगस्त को जब हरिद्वार में उन्हें मनाने के लिए केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने उनकी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से फोन पर बातचीत कराई थी, तब उन्होंने गडकरी को दो-टूक शब्दों में कह दिया था कि अब गंगा रक्षा को लेकर आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और मैं कोरे आश्वासनों से अनशन तोड़ने वाला नहीं हूं।

उन्होंने गडकरी को खरी-खरी सुनाते हुए कहा था कि मैंने बहुत बातें सुन ली हैं। मैं आपकी बात क्या सुनूं। आपने तो मेरे पत्र का जवाब भी नहीं दिया। उनकी गडकरी से फोन पर बातें हुई थीं। गडकरी ने यह कहते हुए बात खत्म कर दी कि आपको जो करना है करें। नितिन गडकरी और प्रोफेसर अग्रवाल की फोन पर हुई बातचीत को मातृसदन के स्वामी शिवानंद सरस्वती ने जारी करते हुए कहा कि मातृसदन नितिन गडकरी, एम्स के निदेशक और अन्य डॉक्टरों समेत आठ लोगों के खिलाफ ऋषिकेश थाने में मुकदमा दर्ज कराएगा। इस तरह प्रोफेसर अग्रवाल की मौत को लेकर केंद्र सरकार, एम्स प्रशासन, हरिद्वार का जिला प्रशासन और मातृसदन आमने-सामने हैं।

मातृसदन ने मांग की है कि हाईकोर्ट की देखरेख में प्रोफेसर जी.डी अग्रवाल की मृत्यु की जांच विशेष जांच दल (एसआइटी) से कराई जाए। अपनी मृत्यु से पहले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने अपनी देह एम्स ऋषिकेश को दान देने की लिखित घोषणा की थी। ऋषिकेश एम्स में आखरी सांस लेने वाले प्रोफेसर अग्रवाल ने गुरुवार के दिन ही करीब सुबह साढ़े छह बजे एक पत्र जारी किया था। इसमें उन्होंने एम्स प्रशासन की तारीफ की थी। यह उनका आखरी पत्र था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि चिकित्सकों ने उनके शरीर में पोटेशियम की मात्रा कम होना बताया है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि चिकित्सकों के सुझाव पर उन्होंने पांच सौ एमएल तरल पदार्थ लेना शुरू कर दिया है।

उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उन्हें प्रोफेसर अग्रवाल की मृत्यु पर गहरा दुख है। केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रोफेसर अग्रवाल के सपर्क में थी। उनकी कुछ बातें केंद्र सरकार ने मान भी ली थीं। राज्य के मुख्यसचिव ने उनसे फोन पर बातचीत भी की थी। प्राफेसर जीडी अग्रवाल के आध्यात्मिक गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उनकी हत्या की गई है। उनके चले जाने से गंगा अभियान नहीं रुकेगा। मुझे अपने शिष्य पर गर्व है। उनकी मृत्यु की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने ऐलान किया है कि 20 अक्तूबर को मातृसदन में प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी और वे उसी दिन प्रोफेसर अग्रवाल के छोड़े गए अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए आमरण अनशन करने की घोषणा करेंगे। प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत के लिए मातृसदन के स्वामी शिवानंद सरस्वती की ओर से एम्स प्रशासन पर लगाए गए आरोपों का एम्स के निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने खंडन किया है। निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने स्वामी शिवानंद सरस्वती के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करने के लिए अपने कानूनी प्रभाग को निर्देश दिए हैं।

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