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उत्तराखंड: एक साथ हुए छात्रसंघ चुनाव, फिर भी रही अशांति

उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव से पहले डिग्री और पीजी कॉलेजों के छात्रसंघ के चुनाव ज्यादा अहम हो गए हैं। लिहाजा इस बार छात्रसंघ चुनाव में ज्यादा मारामारी हुई।

उत्तराखंड में इस बार सभी कॉलेजों में राज्य सरकार ने एक साथ छात्रसंघ के चुनाव कराए। प्रदेश के जिन 29 कॉलेजों में चुनाव हुए, उनमें 13 कॉलेजों में छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने परचम लहराया।

उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव से पहले डिग्री और पीजी कॉलेजों के छात्रसंघ के चुनाव ज्यादा अहम हो गए हैं। लिहाजा इस बार छात्रसंघ चुनाव में ज्यादा मारामारी हुई। हरिद्वार जिले के सबसे बड़े पीजी कॉलेज एसएमजेएन में छात्रों के दो गुटों में भिड़ंत के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और यहां छात्र संघ के चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने पड़े। डीएवी पीजी कॉलेज उत्तराखंड का सबसे बवाली कॉलेज माना जाता है। एक जमाने में यह कॉलेज राजनीति के दिग्गज हेमवती नंदन बहुगुणा, समाजवादी चिंतक-विचारक सुरेंद्र मोहन, पूर्व केंद्रीय मंत्री ब्रह्मदत्त, समाजवादी नेता विनोद बडथवाल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हीरा सिंह बिष्ट, विवेकानंद खंडूरी, सूर्यकांत धस्माना की राजनीति का गढ़ माना जाता था।

उत्तराखंड में इस बार सभी कॉलेजों में राज्य सरकार ने एक साथ छात्रसंघ के चुनाव कराए। प्रदेश के जिन 29 कॉलेजों में चुनाव हुए, उनमें 13 कॉलेजों में छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने परचम लहराया। कांग्रेस समर्थित भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन, निर्दलीय छात्रों के गुट आर्यन ग्रुप और जय हो ग्रुप ने 3-3 सीटें हासिल की। इसके अलावा दो कॉलेजों में अध्यक्ष पद पर पहाड़ी छात्र सेना ने मोर्चा मारा तथा एक-एक सीट निर्दलीय छात्रों के दो अन्य ग्रुपों ओम ग्रुप तथा सत्यमेव जयते ग्रुप के हाथ लगीं। वहीं महासचिव पद पर एबीवीपी को निराशा हाथ लगी और इस पद पर एनएसयूआई का दबदबा रहा। महासचिव पद पर 7 कॉलेजों में एनएसयूआई तथा 4 कॉलेजों में एबीवीपी ने जीत दर्ज की। आर्यन ग्रुप ने 4 कॉलेजों में महासचिव पद पर जीत दर्ज की। वहीं पौड़ी गढ़वाल जिले में राजकीय महाविद्यालय सतपुली के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर बराबर वोट हासिल करने पर एबीवीपी की उम्मीदवार ज्योति और एनएसयूआई के उम्मीदवार सागर नेगी दोनों ही 5-5 महीने के लिए अध्यक्ष पद पर रहेंगे।

एबीवीपी और एनएसयूआई को चुनाव जिताने के लिए भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज के बाद सबसे ज्यादा उत्पाती कॉलेज हरिद्वार का एसएमजेएन पीजी कॉलेज माना जाता है। जहां पर एबीवीपी के पांच उम्मीदवारों के छात्र प्रतिनिधि के पर्चे खारिज करने को लेकर बहुत बड़ा बवाल हुआ और छात्रों ने कॉलेज के प्राचार्य डॉ सुनील बत्रा और चुनाव अधिकारियों को रात दस बजे तक कमरे में बंद कर बंधक बनाए रखा। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने इन्हें एबीवीपी समर्थक छात्रों के चंगुल से छुड़ाया। एबीवीपी के छात्र प्रतिनिधियों के पांच पर्चे खारिज होने पर कॉलेज की छात्र राजनीति में बवाल मच गया। जिस पर सूबे की भाजपा सरकार के मंत्री और विधायक मदन कौशिक को दखलंदाजी करनी पड़ी और उन के दबाव में जिला प्रशासन ने एसएमजेएन पीजी कॉलेज के चुनाव शांतिभंग की आशंका जताकर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए। इसके विरोध में एनएसयूआई के समर्थक छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा मचाया और धरना दिया।

पुलिस को छात्रों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इससे छात्र आंदोलन में और उबाल आ गया। दोनों ही छात्रसंघ के नेताओं ने कॉलेज प्राचार्य पर पक्षपात का आरोप लगाया। एनएसयूआई के शहर अध्यक्ष सुमित त्यागी ने आरोप लगाया कि कॉलेज के चुनाव में जिस तरह से भाजपा के दबाव में जिले के उच्चाधिकारियों ने दखलंदाजी की है, उससे अधिकारियों के पद की गरिमा गिरी है। सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार का कहना है कि कॉलेज में चुनाव के दौरान जबरदस्त अशांति फैल गई थी। शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए फिलहाल चुनाव स्थगित किए गए हैं। माहौल चुनाव के अनुकूल होने पर चुनाव कराए जाएंगे और प्रशासन किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं है। गौरतलब है कि पहली बार एसएमजेएन पीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव में पुलिस को छात्रों पर लाठी चलानी पड़ी। उत्तराखंड में पहली बार छात्रसंघ चुनाव में उच्च शिक्षा मंत्री को सीधी दखल देनी पड़ी और शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने सूबे के सभी कॉलेजों में एक साथ चुनाव कराने और हाथोंहाथ उनके परिणाम घोषित कर विजय उम्मीदवारों को शपथ दिलाने का फैसला लिया ताकि बवाल लंबा न चले।

छात्रसंघ चुनाव के नाम पर अराजकता फैलाने वाले तत्वों पर पूरी तरह नियंत्रण रखने के लिए यह फैसला लिया गया था। राज्य सरकार की कोशिश थी कि राज्य में शांतिपूर्वक व पारदर्शिता के साथ छात्रसंघ चुनाव संपन्न हों। -डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड

जिन छात्रों के पर्चे निरस्त किए गए है, वे सब नियमानुसार किए गए हैं। जिला प्रशासन ने हमारे सभी दस्तावेज देख लिए हैं, वे सभी सही पाए गए। जब जिला प्रशासन कहेगा हम चुनाव करा देंगे, हमारी चुनाव कराने की पूरी तैयारी है। -डॉ सुनील बत्रा, प्राचार्य, एसएमजेएन पीजी कॉलेज, हरिद्वार

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