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प्रदूषण के शोर में दब गया पंछियों का प्रणय निवेदन

प्रदूषित होता वायुमंडल पक्षियों की प्रजनन क्षमता को लगातार बाधित कर रहा है और वायुमंडल में लगातार हो रहे चक्रीय परिवर्तन के कारण पक्षियों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

प्रदूषण।

वायुमंडल में लगातार बढ़ते प्रदूषण का प्रभाव पशु-पक्षियोें के संवाद और प्रजनन पर पड़ रहा है। प्रदूषण की वजह से पक्षियों में संवादहीनता बढ़ रही है। जिस वजह से नर और मादा के बीच दूरी बन रही है, नतीजतन ये पक्षी प्रजनन के लिए उचित समय तय नहीं कर पाते हैं। यही वजह है कि कई दुर्लभ पक्षी विलुप्ति के कगार हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के बैनर तले दुनिया के 26 देशों के 250 से ज्यादा पक्षी विज्ञानियों ने गहन मंथन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। उनका शोध बताता है कि प्रदूषित होता वायुमंडल पक्षियों की प्रजनन क्षमता को लगातार बाधित कर रहा है और वायुमंडल में लगातार हो रहे चक्रीय परिवर्तन के कारण पक्षियों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

इंटरनेशनल बायोअकाउस्टिक्स कांग्रेस (आइबीएसी) की विज्ञान कांग्रेस में भारत समेत दुनिया के कई देशों में वायुमंडल में फैलते पर्यावरण पर गहन शोध किया गया। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग और आइबीएसी के संयोजक प्रोफेसर दिनेश चंद्र भट्ट ने बताया कि साईबेरियन पक्षी मीलों लंबा सफर तय कर भारत की नदियों के तटों पर शीतकाल में अपने परिवार के साथ प्रवास के लिए आते हैं। भारत में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के कारण वायुमंडल में कार्बन की मात्रा लगातार बढ़ रही है। जिससे प्रवासी पक्षियों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इस कारण इनके आने और जाने के चक्र में भारी बदलाव आया है। इनकी संवादकला और प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।प्रोफेसर भट्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की पक्षी विज्ञानी डॉक्टर स्वेन्जा टिडाऊ ने ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर किए गए शोध में बताया कि यदि वायुमंडल में प्रदूषण को दूर नहीं किया गया तो कई पक्षियों का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

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वायुमंडल में शोर और फैलते प्रदूषण से पैदा होने वाले विघ्न-बाधाओं पर अमेरिका की पक्षी विज्ञानीडॉक्टर टेनर ने अपने शोध में बताया कि शोर वाले इस माहौल में नर का प्रणय संवाद मादा तक अपने मूल स्वरूप में पहुंचने के बजाए विकृत हो कर पहुंचता है। ऐसी स्थिति में जब मादा इन संकेतों को सुनती है तो ‘रिसीवर ऐरर सिद्धांत’ के अनुसार मादा की प्रतिक्रिया प्रभावित हो जाती है, जो प्रणय क्रिया को बाधित कर देती है।गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु और पर्यावरण विज्ञान विभाग के साथ आस्ट्रिया के प्रोफेसर ग्रेसिया, बिटेन के प्रोफेसर पिसानकी, अमेरिका के प्रोफेसर केरन ओडम और प्रोफेसर सेगर, फ्रांस के प्रोफेसर डेस्यूटर, जर्मनी के प्रोफेसर नोरीजिया, ब्राजील की डॉक्टर मारिया सिल्व, भारत के डॉक्टर आनंद समेत दुनिया के कई जानेमाने पक्षी विज्ञानियों ने वायुमंडल में बढ़ते प्रदूषण से पक्षियों के जीवन में पड़ रहे प्रभाव पर गहन शोध किया है।

 

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