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उत्तराखंड: शराब दुकानों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बचाने का नकाला गया रास्ता, जिला मार्ग घोषित हुए 64 राजकीय राजमार्ग

सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर में राजकीय मार्गों पर शराब की दुकानें बंद करने का आदेश दिया है।

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (PTI Photo)

देवभूमि उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने सूबे के 64 राजकीय राजमार्गों को जिला मार्गों में तब्दील कर दिया है। इससे राजकीय राजमार्गों पर स्थित शराब की 155 दुकानें हटने से बच जाएंगी। दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर में राजकीय मार्गों पर शराब की दुकानें बंद करने का आदेश दिया है, पर उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय के कारण राजकीय राजमार्गों पर स्थित 40 से 45 फीसद दुकानों पर लटक रही तलवार हट जाएगी।  कई शराब विरोधी संस्थाओं ने निंदा की है। कई जगह महिलाओं ने शराब की दुकानों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है और कई जगह तोड़फोड़ की है।  देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सूबे के 64 राजकीय राजमार्गों को जिला मार्ग में बदलने का फैसला लिया गया। कैबिनेट की बैठक में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित हो रही आबकारी विभाग की आमदनी पर गहनता के साथ विचार हुआ। लोक निर्माण विभाग की तरफ से कैबिनेट बैठक में राजकीय राजमार्गों के उन हिस्सों को जिला मार्ग घोषित करने का प्रस्ताव रखा जो सूबे के विभिन्न नगर निकायों से होकर जाते हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव अरविंद सिंह ने तर्क दिया कि शहरी निकाय क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का अत्यधिक विस्तार हुआ है। वहां आबादी बढ़ी है। इसीलिए इन क्षेत्रों में राजकीय राजमार्ग का विस्तारीकरण संभव नहीं है। कैबिनेट ने लोकनिर्माण विभाग के इस प्रस्ताव को तुरंत सर्वसम्मति से पास कर दिया।

इस तरह राज्य के 63 नगर निकायों से होकर जाने वाले 64 राजकीय राजमार्गों का एक बड़ा हिस्सा जिला मार्ग हो जाएगा। इस तरह सूबे के राजकीय राजमार्गों पर स्थित 40 से 45 फीसद दुकानें हटने के झंझट से बच जाएंगी। जिला मार्ग घोषित होने के कारण 155 दुकानें हटने से बच जाएंगी। आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक पौड़ी में 12, हरिद्वार, अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में 22-22, देहरादून में 18, उत्तरकाशी में 7, ऊधमसिंह नगर जिले में 20, बागेश्वर में 8, चंपावत और रुद्रप्रयाग में 4-4, टिहरी में 5 पिथौरागढ़ में 9 और चमोली में 2 शराब की दुकानें नहीं हटाई जाएंगी। हालांकि शराब विरोधी आंदोलन से जुड़ी संस्थाओं ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। मातृ सदन के संस्थापक व संचालक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि एक ओर भाजपा राज्य में देवभूमि की अस्मिता और पवित्रता का संकल्प लेकर सत्ता में आई और अब वही शराब से राजस्व बढ़ाने के लालच में है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की बजाए राजकीय राजमार्गों को जिला मार्ग में तब्दील करके देवभूमि का मखौल उड़ाया है। उन्होंने सरकार के फैसले को जनविरोधी बताया। राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को शराब माफियाओं और शराबियों की भूमि बनाने में लगी है। उन्होंने राज्य सरकार से अपने इस फैसले को वापस लेने की मांग की। उत्तराखंड में आजकल महिलाओं ने शराब की दुकानों के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन छेड़ रखा है। कई जगहों पर महिलाओं ने शराब की दुकानें में तोड़फोड़ की है।
भले ही सरकार और उसके आलाधिकारी राजकीय राजमार्गों को जिला मार्गो में बदलने का तर्क दें। परंतु असली वजह सुप्रीम कोर्ट के हाईवे से शराब की दुकानों को हटाने से बचने के लिए सरकार और उसके अधिकारियों ने यह रास्ता निकाला है। सरकार के इस फैसले को लेकर राज्य सरकार द्वारा सूबे में लोगो को नशाखोरी से मुक्त कराने के फैसले पर उंगलियां उठ रही हैं। इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में छह अन्य प्रस्ताव पारित हुए।

 

 

 

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