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उत्तराखंड: चीनी सैनिकों की उकसाने वाली हरकत, बाराहोती में घुसपैठ

उत्तराखंड के चमोली जिले में चीन से जुड़ी भारतीय सीमा घुसपैठ की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है।
Author नई दिल्ली | August 1, 2017 04:59 am
चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है।

उत्तराखंड के बाराहोती में भारतीय सीमा में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की है। सिक्किम सीमा पर डोकलाम में चीनी सैनिकों के घुसपैठ को लेकर भारत और चीन में जारी तनातनी के बीच उकसाने वाली यह घटना सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन की सरकार से इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया जताई है।  भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा से एक दिन पहले 25 जुलाई को सुबह नौ बजे चीनी सैनिक 800 मीटर से एक किलोमीटर भीतर तक भारतीय सीमा में घुस आए थे। वे लोग भारतीय सीमा में दो घंटे तक रहे। वहां तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के जवानों के विरोध के बाद चीन के सैनिक वापस लौट गए थे। यह इलाका उत्तराखंड के चमोली जिले बाकी पेज 8 पर
में पड़ता है। एक साल पहले भी चीनी सैनिक इस इलाके में घुस आए थे और तब वे 40 मिनट तक भारतीय सीमा में रहे थे।

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, चीनी सेना के दो सौ से तीन सौ जवानों ने घुसपैठ की थी। इस इलाके को चीनी सेना विवादित बताती है। आइटीबीपी के जवान इस इलाके में गश्त लगाते हैं। यहां उन्हें सादे कपड़ों में बगैर हथियार के गश्त लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा पहली बार नहीं है, जब चीनी सेना के जवान इस इलाके में घुस आए हों। दोनों देशों की सेना के जवान साल में एक बार मौजूदगी दिखाने के लिए यहां गश्त लगाते हैं। जून में इस इलाके में दो चीनी हेलिकॉप्टर भी देखे गए थे। करीब पांच मिनट बाद यह चीन की तरफ वापस लौट गए थे। भारत ने हेलिकॉप्टरों से गश्त पर आपत्ति जताई थी।

उत्तराखंड के चमोली जिले में चीन से जुड़ी भारतीय सीमा घुसपैठ की दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है। जून 2000 में केंद्र सरकार द्वारा किए गए एकपक्षीय फैसले के तहत इस सेक्टर में आइटीबीपी जवानों को हथियार लेकर आने की अनुमति नहीं है और वे सादे कपड़ों में रहते हैं। वर्ष 1958 में भारत और चीन ने तय किया था कि इस इलाके में कोई देश अपने जवान तैनात नहीं करेगा। इस कारण भारतीय जवान वर्दी में नहीं होते। दोनों देशों ने 80 वर्ग किलोमीटर के ढलान वाले चारागाह बाराहोती को एक विवादित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया था, जहां कोई भी पक्ष अपने सैनिक नहीं भेजेगा।

इसी इलाके में एक साल पहले भी चीन ने टोही विमान भेजे थे। जुलाई, 2016 में भी चीनी सेना ने बाराहोती में ‘सिंथेटिक ऐपर्चर रडार’ (एसएआर) से लैस उच्च श्रेणी के विमान का इस्तेमाल कर एक टोही मिशन चलाया था। एसएआर विमान व्यापक क्षेत्र की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीर मुहैया कराता है। बाराहोती उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड उन तीन सीमा चौकियों में से एक है, जहां आइटीबीपी के जवानों को उनके हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है। बताते चलें कि सिक्किम के डोकलाम में जून 2017 में भूटानी सीमा में चीनी सैनिकों के घुस आने पर भारतीय सैनिकों के साथ उनकी धक्कामुक्की हुई थी। वहां चीनी सैनिक घुस आए थे। तब से दोनों देशों के सैनिक आमने सामने हैं और संबंधों में भारी तनाव है। भूटान की भारत में लगती सीमा पर नाथूला और अन्य स्थानों पर चीनी सैनिक घुसपैठ कर चुके हैं। चीन के सैनिक भूटान की जमीन से सड़क बनाने की कोशिश रहे हैं, जबकि भारतीय सैनिक उन्हें ऐसा करने से रोक रहे हैं। चीन ने भूटान के पूर्व में चुंबी घाटी तक सड़क बना ली है।

 

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