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भाजपा में होगा बदलाव, धामी चंपावत से लड़ सकते हैं चुनाव

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार 60 पार का नारा दिया था परंतु भितरघात के कारण वह 47 सीटों पर ही जीत पाई।

Uttrakhand
पुष्कर सिंह धामी (फोटो सोर्स: PTI)।

उत्तराखंड भाजपा में आजकल दो मामलों को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। पहला भाजपा प्रदेश संगठन में बदलाव को लेकर चर्चा है और दूसरा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा का उपचुनाव किस विधानसभा सीट से लड़ेंगे। भाजपा के सूत्रों और मुख्यमंत्री के विश्वासपात्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री धामी ने कुमाऊं मंडल के चंपावत विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मन बनाया है।

इस सीट पर उनके कट्टर समर्थक कैलाश गहतोड़ी भाजपा के विधायक हैं। 10 मार्च को जब विधानसभा का चुनाव परिणाम आया था और धामी खटीमा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे, तब सबसे पहले मनोज गहतोड़ी ने धामी के लिए चंपावत सीट छोड़ने की पेशकश की थी। तभी से माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद धामी सबसे सुरक्षित सीट चंपावत से ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। पिछले दिनों पुष्कर सिंह धामी चंपावत के दौरे पर गए और उन्होंने इस सीट से चुनाव लड़ने का संकेत भी दिया।

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार 60 पार का नारा दिया था परंतु भितरघात के कारण वह 47 सीटों पर ही जीत पाई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के जनपद में भाजपा को सबसे ज्यादा झटका लगा। यहां भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले पांच सीटें गंवा दीं, जो 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए खतरे की घंटी है। हरिद्वार जनपद के लक्सर लंढौरा हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीटों से चुनाव हारे भाजपा के उम्मीदवारों ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक पर सीधे भितरघात करने का आरोप लगाते हुए उनके सिर पर अपनी हार का ठीकरा फोड़ा।

हरिद्वार ग्रामीण सीट से भाजपा के उम्मीदवार धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी यतिश्वरानंद महाराज चुनाव हारे। उनके खिलाफ प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के दाहिने हाथ, उनके रिश्ते में भाई लगने वाले नरेश शर्मा विधानसभा चुनाव से कई महीनों पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस पार्टी में चले गए थे। बाद में स्वामी के खिलाफ आम आदमी पार्टी से नरेश शर्मा विधानसभा चुनाव लड़े। इसी तरह लक्सर विधानसभा सीट पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक के कट्टर राजनीतिक विरोधी संजय गुप्ता चुनाव लड़ रहे थे।

उन्होंने सबसे पहले अपनी हार के लिए मदन कौशिक को जिम्मेदार ठहराया था। इसी तरह हरिद्वार ग्रामीण में भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी के उम्मीदवार स्वामी की हार के लिए मदन कौशिक और उनके रिश्ते के भाई नरेश शर्मा को जिम्मेदार ठहराया। इसी तरह कौशिक पर हरिद्वार जिले की कलियर विधानसभा सीट पर भाजपा के मजबूत नेता जय भगवान सैनी का टिकट काटकर शिक्षा घोटाले के आरोपी को टिकट देने का आरोप लगा है। ऐसे में पार्टी आलाकमान पर प्रदेश भाजपा के कई नेताओं ने कौशिक को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का दबाव बनाया हुआ है।

चर्चा है कि कौशिक को हटाकर भाजपा के विधायक विनोद चमोली, पूर्व मुख्यमंत्री सांसद रमेश पोखरियाल निशंक या पूर्व विधायक महेश भट्ट को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने राज्य में संगठन में बदलाव करने का मन बना लिया है। अब यह तय करना है कि धामी के विधानसभा का उपचुनाव लड़ने के बाद पार्टी संगठन में बदलाव किया जाए या फिर उससे पहले यह पक्के तौर पर माना जा रहा है कि कौशिक की संगठन के प्रदेश अध्यक्ष से विदाई तय है। कौशिक अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए अध्यक्ष पद गंवाने के बाद धामी मंत्रिमंडल में जगह पाने की फिराक में है, परंतु उनका पार्टी के कई मौजूदा और पूर्व विधायक जबरदस्त विरोध कर रहे हैं। कौशिक को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और संघ के एक केंद्रीय पदाधिकारी का खास विश्वासपात्र माना जाता है, जिस कारण वे अपनी राजनीतिक हैसियत बचाने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं।

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