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खबरदार! जाम हैं पहाड़, दो रात में छह घंटे का सफर

मैदानी पैमाने से मान कर चलने वाले पर्यटकों के जहन में यह सफर सात आठ घंटे का रहता है मगर जब इसके लिए किसी के दो दिन से ज्यादा समय लग जाए तो कल्पना की जा सकती है कि इन दिनों यहां वाहन चल नहीं रहे बल्कि रेंग रहे हैं।

Author June 12, 2019 1:50 AM
पर्यटकों के इस रेले से हिमाचल प्रदेश छोटा पड़ गया

बीरबल शर्मा

करीब 70 लाख की आबादी वाले हिमाचल प्रदेश में हर साल दो करोड़ से भी ज्यादा पर्यटक पहुंचने लगे हैं। अढाई दशक पहले से जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं के बढ़ने के बाद देश विदेश के सैलानियों ने हिमाचल प्रदेश की ओर रुख किया था और यह सिलसिला हर साल बढ़ता ही जा रहा है। अब दिक्कत यह हो गई है कि इस प्रदेश में ढांचागत सुविधाओं के न होने के कारण पर्यटन सीजन में एक भयंकर समस्या खड़ी हो जाती है। पर्यटकों को यहां घंटों जाम में बिताने पड़ते हैं। हिमाचल प्रदेश में मुख्य तौर पर दो तरह के पर्यटक आते हैं, प्रथम श्रेणी में वे जो प्रदेश के सौंदर्य, यहां की संस्कृति, रीति रिवाजों, मेले त्योहारों, प्राचीन मंदिरों, बौद्ध मठों, कुदरती झीलों या फिर ठंडे रेगिस्तान के नाम से मशहूर स्पीति घाटी को देखने की ललक रखते हैं। दूसरी श्रेणी में वे, जो जैसे ही देश के मैदानी क्षेत्रों में गर्मी प्रचंड रूप लेती है, स्कूलों में बच्चों को छुट्टियां हो जाती हैं, तो वे पूरे लाव लश्कर के साथ ठंडे पहाड़ों का रुख करते हैं।

दूसरी श्रेणी के पर्यटकों से संकट पैदा होता है। उनके दिमाग में सीधे रोहतांग का रोमांच रहता है। इसकी ललक में वे जहां ठगी का शिकार होते हैं वहीं कई बार खुद तैयार की गई अव्यवस्था तो कई बार प्रणाली को संभालने वालों की लापरवाही के कारणघंटों तक सड़कों पर लगे जाम में ही फंसे रहते हैं। चंडीगढ़ से मंडी होते हुए मनाली और फिर पर्यटकों के पसंदीदा रोहतांग का सफर लगभग 366 किलोमीटर है। मैदानी पैमाने से मान कर चलने वाले पर्यटकों के जहन में यह सफर सात आठ घंटे का रहता है मगर जब इसके लिए किसी के दो दिन से ज्यादा समय लग जाए तो कल्पना की जा सकती है कि इन दिनों यहां वाहन चल नहीं रहे बल्कि रेंग रहे हैं।

इस साल देश में गर्मी का नया रेकार्ड कायम हो जाने से पिछले सालों से डेढ़ गुणा पर्यटक ज्यादा यहां पर पहुंच रहे हैं। इससे सारी व्यवस्थाएं कम पड़ गई हैं और सारी सड़कें पैक होकर रह गई हैं। इन दिनों हिमाचल प्रदेश की इस सबसे बड़ी लाइफ लाइन कीरतपुर-मनाली सड़क का जो आगे लेह तक जाती है, इस पर भीषण जाम लगा। बीते सप्ताह जब देश भर में प्रचंड गर्मी पड़ रही थी तो पर्यटकों के इस रेले से हिमाचल प्रदेश छोटा पड़ गया। हालात यह हो गए कि हजारों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा।

क्यों लग रहा जाम
कीरतपुर से मनाली तक फोरलेन का निर्माण कार्य, यातायात व्यवस्था में तालमेल की कमी, पार्किंग का कोई प्रावधान न होना, उदंड प्रवृति के पर्यटकों द्वारा लाइन तोड़ कर दाएं बाएं से ओवरटेक करके जाम को बढ़ाना, जहां तहां गाड़ी खड़ी करके मस्ती करना जाम के प्रमुख कारण हैं।

क्या है समाधान
चंडीगढ़ से मनाली रोहतांग की ओर निकलते हुए यदि पर्यटकों को कोलडैम, सराजघाटी, शिकारी देवी, कमरूनाग, ज्यूणीघाटी, देवीदड़, बरोट, खीर गंगा, मणीकर्ण, पार्वती घाटी, पराशर, बीड़ बिलिंग, तीर्थन घाटी, बंजार, सोझा, सरयोलसर आदि की ओर मोड़ा जाए तो यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

परमिट का घालमेल
मनाली से रोहतांग जाने के लिए दिन में 1200 गाड़ियों को परमिट दिए जाते हैं मगर असल में यहां पर रोजाना 5 हजार वाहन पहुंच रहे हैं। आठ से दस घंटे तक 56 किलोमीटर के इस सफर में लग रहे हैं। रोहतांग के रोमांच के लिए पर्यटक आधी रात को ही रवाना हो रहे हैं और फिर दूसरी आधी रात को लौट रहे हैं। नागपुर से आए एक पर्यटक आर्य जैस का कहना था कि कुल्लू से मनाली 40 किलोमीटर का सफर तय करने में 5 घंटे लग गए, यह सब अव्यवस्था ही लगती है, घूमने का मजा तो आया मगर रात भी जाम में काटनी पड़ी।

बेतरतीब पार्किंग
कुल्लू मनाली घाटी के एक होम स्टे मालिक किशन श्रीमान का कहना है कि इन दिनों हर रोज घाटी में एक लाख से अधिक पर्यटक आ रहे हैं, 20 हजार से अधिक वाहन रोजाना यहां पहुंच रहे हैं। कहीं भी पार्किंग की सही व्यवस्था नहीं है, जहां तहां पर गाड़ियां पार्क कर दी जाती है, मामूली सा अवरोध पैदा होते ही जाम लग जाता है जो पूरा दिन बना रहता है।

कुल्लू अधिकांश पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री के अनुसार, पर्यटक जल्दी पहुंचने से चक्कर में दाएं बाएं से ओवरटेक करके आवाजाही को बाधित कर देते हैं, फोरलेन का काम भी चला हुआ है, कहीं कहीं पुल भी तंग हैं जहां से आवाजाही बाधित होती है। प्रशासन पुलिस पूरे प्रयास में है कि पर्यटकों को परेशानी कम से कम हो।

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