ताज़ा खबर
 

उत्तराखंड: बादल फटने से 17 लोगों की मौत, बचाव कार्य में SDRF की चार टीमें

पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील के घटियाबगड़ में सेना के बेस कैंप में मलबा और पानी घुसने से सेना के पांच जवानों सहित 11 लोग लापता हैं। सेना के 17 घोड़े भी मलबे में बह गए।

देहरादून | August 15, 2017 2:24 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

उत्तराखंड में बादल फटने की अलग-अलग घटनाओं में सोमवार को 17 लोगों की मौत हो गई। पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील के घटियाबगड़ में सेना के बेस कैंप में मलबा और पानी घुसने से सेना के पांच जवानों सहित 11 लोग लापता हैं। सेना के 17 घोड़े भी मलबे में बह गए। अब तक सेना के तीन जवानों के शव बरामद हुए हैं। छह घोड़ों के शव भी बरामद हुए हैं। सेना के दो जवानों और एक जेसीओ को मलबे से घायल अवस्था में बाहर निकाला गया है। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में पांच जगह मालपा, पांगला, घटियाबगड़, मांगली नाला, बंगापानी के गांव और गढ़वाल मंडल की कोटद्वार तहसील से चार सौ मीटर दूर आमसौड़ के पास बादल फटने की घटनाएं हुई हंै। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पिथौरागढ़ के विधायक और मंत्री प्रकाश पंत ने घटनास्थल का हवाई निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के आश्रितों और घायलों को आर्थिक मदद की घोषणा की। बादल फटने के घटना के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग कई जगह से बह गया है। पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील के तहत पांगला से लेकर मालपा तक जाने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा सड़क मार्ग में जगह-जगह भूस्खलन के कारण भारी तबाही हुई है।

पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक अजय जोशी के मुताबिक, बीती रात पौने तीन बजे पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 145 किलोमीटर दूर घटियाबगड़ में बादल फटने से सेना के बेस कैंप में भारी तबाही मची। इसमें सेना के तीन ट्रक समान सहित बह गए और चार अन्य वाहन भी मलबे की चपेट में आकर काली नदी में समा गए। सेना के सात जवान लापता बताए जा रहे हंै। कुमाऊं बटालियन का एक जवान लापता है। अभी तक आठ से ज्यादा लोगों के शव निकाले जा चुके हैं। मलबे में दबे छह से ज्यादा लोगों को घायल अवस्था में निकालकर धारचूला के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। घायलों में उत्तराखंड पुलिस के दो जवान भी शामिल हंै। धारचूला तहसील की एक महिला का शव बरामद किया गया है। इसी तहसील की एक महिला लापता है। पिथौरागढ़ के धारचूला तहसील में ही बादल फटने की दूसरी घटना ढुंगातोली गांव में बीती देर रात हुई। एक दर्जन से ज्यादा मकान मलबे की चपेट में आने से जमींदोज हो गए। दो दर्जन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। दूसरी घटना इसी जिले के मदकोट गांव में हुई। मलबा आने से इस गांव में आधा दर्जन मकान ध्वस्त हो गए। दो मकानों के मलबे में से दो शव बरामद हुए। इस गांव में तीन लोगों की मौत हुई। जबकि तीन लोग घायल हुए। धारचूला के मालपा नाला में बादल फटने के कारण मलबा और पानी बहुत तेजी से आने से तीन होटल पानी में बह गए।

घटियाबगड़ में सेना के बेस कैंप से नौ किलोमीटर दूर मांगती नाले में आए मलबे और पानी ने भारी तबाही मचाई धारचूला से आठ किलोमीटर दूर ऐलागाड़ हाईवे भूस्खलन के कारण जगह-जगह से बंद पड़ा है। मांगती और सीम खोला में मोटरपुल क्षतिग्रस्त हो गया है। गरबागाड़ में भी सेना के वाहन और खच्चर मलबे और पानी की चपेट में आने से बह गए हैं। धारचूला से कैलाश मानसरोवर जाने वाला यात्रा सड़क मार्ग पचास मीटर बह गया है। पूरे क्षेत्र में संचार व्यवस्था ठप पड़ गई है। घटियाबगड़ में सेना के बेस कैंप में सेना के जवान यात्री विश्राम करने के बाद सुबह तड़के भारत-चीन सीमा की तरफ गश्त करने जाते हैं। पिथौरागढ़ स्थित बंगापानी गांव में बादल फटने से तीन लोगों की मौत हो गई और छह लोग घायल हो गए। एक दर्जन से ज्यादा मकान मलबे और भारी तादाद में पानी आने से जमींदोज हो गए। एक दर्जन से ज्यादा मवेशी भारी बारिश के पानी में बह गए। दो घायलों को मलबे से निकालकर चिकित्सा के लिए देहरादून ले जाया जा रहा था। मौसम खराब होने के वजह से मैदानी क्षेत्र हल्द्वानी में हेलिकॉप्टर की आपात लैंडिंग की गई।

बचाव और राहत कार्यो में एसडीआरएफ की चार टीमें सीमा सुरक्षा बल की एक बटालियन तथा स्थानीय पुलिस के जवान लगे हुए हैं। लोगों के नेपाल से आने वाली काली नदी में बहने की आशंका है। वही गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले की तहसील कोटद्वार में आमसौड़ के पास बादल फटने से दो पुलिया बह गई हैं। तीन दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कोटद्वार तहसील में एक हफ्ते में बादल फटने की यह तीसरी घटना है। उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं से पर्वतीय क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है। राज्य सरकार ने एक हेलिकॉप्टर राहत कार्यों के लिए लगाया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के संचालक कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे 16वें दल को सिरखा पड़ाव में और यात्रा से वापस लौट रहे 12 वें दल को धारचूला, 13, 14 और 15वें दल को गूंजी और चीन की सीमा के पास रोक दिया गया है। 17 अगस्त 1998 की रात को कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग में मालपा गांव में बादल फटने की घटना में 60 कैलाश मानसरोवर यात्रियों और आइटीबीपी के जवानों सहित 260 लोगों की मौत हो गई थी। पूरा पड़ाव क्षेत्र ध्वस्त हो गया था।

 पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत बाढ़ की चपेट में, ट्रेन सेवाएं प्रभावित

पिछले तीन दिनों में भारी बारिश के कारण बिहार के कुछ हिस्से में बाढ़ आ गई है जहां अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं असम और उत्तरी बंगाल में भी एक बड़ा हिस्सा जलमग्न है और पूर्वोत्तर का बाकी देश से रेल संपर्क टूट गया है। अरुणाचल प्रदेश में भी बाढ़ की स्थिति भीषण बनी हुई है। बाढ़ प्रभावित इलाके का हवाई सर्वेक्षण करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अररिया सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है और पानी जिला मुख्यालय तक पहुंच गया है। किशनगंज, पूर्णिया के तीन प्रखंड और कटिहार का एक प्रखंड बाढ़ की चपेट में है जिससे सड़को को नुकसान पहुंचा है।

इस बीच, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जन संपर्क अधिकारी प्रणव ज्योति शर्मा ने एक बयान में कहा कि रेलवे बोर्ड ने देश के विभिन्न हिस्सों से पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर आने वाली उन ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है, जिन्हें 16 अगस्त, 2017 को 10 बजे सुबह तक कटिहार या मालदा टाउन पहुंचना था। शर्मा ने कहा कि पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में पिछले 72 घंटों में भारी बारिश के कारण रेलवे परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एनएफ रेलवे के कटिहार और अलीपुरद्वार में कई जगहों पर रेलवे लाइनों पर पानी आ गया है। शर्मा ने कहा कि स्थिति को देखते हुए एनएफ रेलवे ने सोमवार को 11 ट्रेनों को रद्द कर दिया। चार अन्य ट्रेनों की सेवाओं को विभिन्न जगहों पर बीच में समाप्त कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हम देश में बाढ़ की स्थिति से चिंतित है। पहले की बाढ़ से दक्षिण बंगाल प्रभावित हुआ। अब उत्तर बंगाल प्रभावित है। राहत और बचाव अभियानों के लिए हम लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। पूर्व मध्य रेलवे ने कहा है कि कटिहार खंड के तहत खंभा नंबर 117 पर बाढ़ के पानी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण किशनगंज और हटवार के बीच रेल यातायात प्रभावित हुआ है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार द्वारा ईसीआर के एक बयान में बताया गया कि 33 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 11 ट्रेनों की यात्रा पहले ही समाप्त कर दी गयी। अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से सड़क संपर्क बाधित होने की खबरें है। सुदूरवर्ती अंजाव जिला पिछले सात दिनों से राज्य से कटा हुआ है।

Next Stories
1 वीडियो: अब उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर, पिथौरगढ़ का मुख्य ब्रिज ठहा, जन-जीवन प्रभावित
2 उत्तराखंड: स्कूल ड्रेस को लेकर मास्टरों और सरकार में ठनी
3 उत्तराखंड: चीनी सैनिकों की उकसाने वाली हरकत, बाराहोती में घुसपैठ
यह पढ़ा क्या?
X