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कभी पकड़ा था कटोरा, अब हाथों में है किताब, ‘ऑपरेशन मुक्ति’ से 68 बच्चों का एडमिशन कराया

अभियान के तहत भीख मांगने, कूड़ा बीनने, गुब्बारा बेचने आदि कार्यों में लगे 292 बच्चों का विवरण तैयार किया गया। पुलिस उपाधीक्षक और इस अभियान के नोडल अधिकारी शेखर सुयाल ने बताया कि अभी तक 68 बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवा दिया गया है।

Author Published on: July 8, 2019 5:52 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्स: जनसत्ता)

उत्तराखंड पुलिस द्वारा भिक्षावृत्ति की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन मुक्ति’ से 68 बच्चों को स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिल गया है। इनमें से 11 वर्षीय राजू एक दृष्टिहीन बच्चा है, जो अब देहरादून स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (एनआइवीएच) में रहकर पढ़ाई करेगा। इसी प्रकार, 67 अन्य बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है। दो महीने पूर्व शुरू हुए इस अभियान का मुख्य लक्ष्य बच्चों द्वारा की जा रही भिक्षावृत्ति पर प्रभावी रोकथाम, जागरूकता और भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का पुनर्वास है। अभियान के तहत पुलिस ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स भी बनाए और इन्हें प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया। चूंकि हरिद्वार में भिक्षावृत्ति ज्यादा पाई जाती है अत: वहां ज्यादा फोकस रखा गया। हर यूनिट में एक महिला पुलिसकर्मी की भी तैनाती की गई।

देहरादून में भी शहर के ऐसे इलाके चिह्नित किए गए जहां बच्चे भिक्षावृत्ति में ज्यादा लिप्त रहते हैं। इन इलाकों में दर्शन लाल चौक, परेड ग्राउंड, एश्ले हॉल, आइएसबीटी, रिस्पना पुल, पैसिफिक मॉल, रेलवे स्टेशन, दिलाराम चौक, प्रिंस चौक, बल्लूपुर चौक आदि स्थानों पर लगातार अभियान चलाया गया। प्रथम चरण में एक मई से 15 मई तक भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों और उनके परिवारों का विवरण तैयार किया गया। द्वितीय चरण में 16 मई से लेकर 15 जून तक देहरादून शहर के समस्त स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों, सिनेमाघरों और बस तथा रेलवे स्टेशनों तथा धार्मिक स्थानों पर बच्चों को भिक्षा न देने के लिए जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया। इसके लिए पुलिस ने बैनर, पोस्टर, पैम्फलेट, नुक्कड़ नाटक, धार्मिक स्थलों में लाउड स्पीकर, सिनेमाघरों में लघु फिल्में, सोशल मीडिया के माध्यमों का भी उपयोग जागरूकता फैलाने के लिए किया। एक अन्य कार्रवाई में तीन महिलाओं के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया क्योंकि उन्होंने बच्चों को जबरन भिक्षावृत्ति में धकेला था। बच्चों के परिवारजनों को भी समझाया गया कि भिक्षावृत्ति एक बुराई है। तृतीय चरण में 16 जून से तीस जून तक भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को इससे हटाकर उनके परिजनों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई करना तथा किसी प्रकार का संदेह होने पर डीएनए टेस्ट की कार्रवाई करना शामिल है।

अभियान के तहत भीख मांगने, कूड़ा बीनने, गुब्बारा बेचने आदि कार्यों में लगे 292 बच्चों का विवरण तैयार किया गया। पुलिस उपाधीक्षक और इस अभियान के नोडल अधिकारी शेखर सुयाल ने बताया कि अभी तक 68 बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवा दिया गया है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अनिल रतूडी ने इस अभियान में शामिल रहे गैर सरकारी संगठनों की भी सराहना की और कहा कि हमारी कोशिश रहेगी कि बच्चे पढ़-लिखकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाएं।

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