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Uttarakhand: हैरान कर देगा सरकारी कॉलेज की पुरानी किताबों में दर्ज इतिहास, किसी काम की नहीं 90 फीसदी किताबें

छात्र संघ के अध्यक्ष राकेश जोशी और कॉलेज के अन्य विद्यार्थी पुस्तकालय में इन पुरानी किताबों को रखने के खिलाफ पिछले एक महीने से धरने पर बैठे हुए हैं।

Author देहरादून | July 14, 2019 6:55 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तराखंड के सरकारी कॉलेजों की लाइब्रेरी में मौजूद किताबों का पाठ्यक्रम आपको हैरान कर देगा। दरअसल यहां की किताबों में दर्ज इतिहास की जानकारी इतनी पुरानी हो चुकी है कि उसका वर्तमान से कोई लेना-देना ही नहीं रहा। इनमें कई ऐसी घटनाओं और इमारतों को वर्तमान का बताया जा रहा है जिनका दशकों पहले अस्तित्व खत्म हो चुका है। ये किताबें अब बेहद पुरानी हो चुकी है। इन पुस्तकों के हिसाब से ‘बर्लिन की दीवार’ अब भी जस की तस है और सोवियत संघ अभी भी अस्तित्व में है।

इतना पुराना इन किताबों में दर्ज ज्ञानः पिथौरागढ़ स्थित गवर्नमेंट पीजी कॉलेज के छात्र नेता महेंद्र सिंह रावत ने कहा, ‘लाइब्रेरी में 90 फीसदी किताबों के संस्करण बेहद पुराने हो चुके हैं। वहां उपलब्ध राजनीतिक विज्ञान की पुस्तकों के अनुसार सोवियत संघ अब भी अस्तित्व में है, बर्लिन की दीवार जस की तस है, दो महाशक्तियों-सोवियत संघ और अमेरिका के बीच शीत युद्ध अब भी जारी है।’ रावत, छात्र संघ के अध्यक्ष राकेश जोशी और कॉलेज के अन्य विद्यार्थी पुस्तकालय में इन पुरानी किताबों को रखने के खिलाफ पिछले एक महीने से धरने पर बैठे हुए हैं।

प्राचार्य ने दी ये सफाईः कॉलेज के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष भगवान सिंह रावत ने कहा, ‘कॉलेज की लाइब्रेरी में एक लाख से अधिक किताबें हैं लेकिन उनमें 90 फीसदी पुराने संस्करण हैं जो विद्यार्थियों के किसी काम के नहीं हैं।’ हालांकि प्राचार्य डीएस पांगती ने कहा, ‘पुस्तकें नियमित रूप से खरीदी जा रही हैं। हमने 2012 में 2.30 लाख रुपए की किताबें खरीदीं, लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब हम पर हमारी क्षमता से परे जाकर विद्यार्थियों को दाखिला देने के लिए दबाव पड़ता है।’

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