ताज़ा खबर
 

उत्तराखंड के वन मंत्री पर हेराफेरी का आरोप

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड के वन मंत्री दिनेश अग्रवाल के बहाने हरीश रावत सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। अग्रवाल पर अवैध खनन कराए जाने और अवैध तरीके से अपने बेटे के नाम पर स्टोन क्रेशऱ लगाए जाने के आरोप लग रहे हैं..
Author देहरादून | December 24, 2015 23:04 pm
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत। (फाइल फोटो)

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड के वन मंत्री दिनेश अग्रवाल के बहाने हरीश रावत सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। अग्रवाल पर अवैध खनन कराए जाने और अवैध तरीके से अपने बेटे के नाम पर स्टोन क्रेशऱ लगाए जाने के आरोप लग रहे हैं। उत्तराखंड भाजपा और गंगा रक्षा के लिए काम करने वाली संस्था मातृसदन ने वनमंत्री अग्रवाल की घेराबंदी करते हुए आरोप लगाया कि अग्रवाल ने अवैध तरीके से अपने बेटे के नाम पर स्टोन क्रेशर लगाया और वे गंगा नदी व वन विभाग की बरसाती नदियों में अवैध खनन करा रहे हैं।

भाजपा के उत्तराखंड प्रदेश के महामंत्री और पूर्वमंत्री प्रकाश पंत ने आरोप लगाया कि हरीश रावत सरकार के वनमंत्री दिनेश अग्रवाल ने कायदे कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए गलत तरीके से अपने बेटे के नाम से हरिद्वार में स्टोन क्रेशर लगवाया। पंत ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत को वन मंत्री अग्रवाल को मंत्री पद से बर्खास्त कर देना चाहिए। पंत ने कहा कि अच्छा होता यदि अग्रवाल नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा दे देते।

मातृसदन के संचालक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने वन मंत्री अग्रवाल पर नियमों का उल्लंघन कर गलत दस्तावेजों के आधार पर स्टोन के्रशर लगाने का आरोप लगाया। इस बाबत गलत दस्तावेज जारी करने वाले अफसरों के खिलाफ भी मातृसदन ने कड़ी कार्यवाही की मांग की।

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि अग्रवाल ने राज्य में 2012 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अपने बेटे के नाम से 29 जनवरी 2013 को हरिद्वार के पीली क्षेत्र में स्टोन क्रेशर लगाने के लिए आवेदन करवाया था। उन्होंने कहा कि मजे की बात यह है कि हरिद्वार में तैनात तब के जिलाधिकारी, जिला वन अधिकारी और पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने एक ही दिन में जांच पूरी कर दी।

मातृसदन का कहना है कि जिले के आला अधिकारियों ने राज्य सरकार को यह रिपोर्ट भेजी कि जहां पर अग्रवाल के बेटे ने स्टोन के्रशर लगाने की इजाजत मांगी है वह जगह गंगा से 500 मीटर की दूरी पर है। जबकि यह के्रशर गंगा से 500 मीटर के भीतर है। के्रशर के लिए ली गई जमीन में अग्रवाल के बेटे ने जो दस्तावेज लगाए है। उनमें उसने स्वयं को पीली नदी जनपद हरिद्वार का निवासी बताया है। जबकि जमीन के सहमति पत्र में 33 रेसकोर्स रोड देहरादून का पता लिखा गया है। यह पता वनमंत्री दिनेश अग्रवाल के अपने घर का है।

उन्होंने कहा कि गंगा और वन विभाग की नदियों में अवैध खनन का खेल हो रहा है। और अधिकारी मंत्री के दबाव में कोई कारवाई नहीं कर पा रहे हैं। मातृसदन ने आरोप लगाया कि वन मंत्री अग्रवाल को फायदा पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने खनन नीति के नियम ही बदल डाले। 2015 की खनन नीति में स्टोन क्रेशर लगाने के लिए गंगा नदी से 500 मीटर की दूरी को 300 मीटर कर दिया। वन मंत्री का पीली गांव में लगा स्टोन के्रशर झिलमिल झील और राजाजी टाईगर रिजर्व पार्क के काफी नजदीक है।

उधर, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने अपनी सरकार के वन मंत्री को क्लीन चिट दे दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने पार्टी की एक जांच कमेटी से अग्रवाल के स्टोन के्रशर के सभी कागजातों की जांच करवाई थी। जिसमें यह पाया गया है कि अग्रवाल ने स्टोन क्रेशर लगाने के लिए कायदे कानून का कोई उल्लंघन नहीं किया। भाजपा और मातृसदन ने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष की जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि अपनी सरकार के केवल एक मंत्री पर ही राज्य सरकार इतनी मेहरबान क्यों है। जिस तरह से पर्यावरण की रक्षा के लिए लड़ने-भिड़ने वाली संस्था मातृसदन वन मंत्री अग्रवाल के पीछे पड़ गई है। इससे रावत सरकार की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App