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हरिद्वार के इस अस्पताल पर 25 मौतें छिपाने का आरोप, पीड़ित बोला- फ़र्श पर पड़ी थी पत्नी की लाश, 24 घंटे में नहीं मिली एक भी दवा

अस्पताल पर आरोप है कि 25 अप्रैल से 12 मई के बीच 65 मरीजों की सूचना अस्पताल प्रशासन ने राज्य कोविड कंट्रोल रूम को नहीं दी। इस हॉस्पिटल को कुंभ के दौरान कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाया गया था

दूधाधारी बर्फानी हॉस्पिटल पर मौत के आंकड़े छिपाने का आरोप है। (Express Photo: Amit Mehra)

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने हरिद्वार स्थित दूधाधारी बर्फानी हॉस्पिटल पर मौत के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है और अस्पताल को नोटिस जारी किया है। अस्पताल पर आरोप है कि 25 अप्रैल से 12 मई के बीच 65 मरीजों की सूचना अस्पताल प्रशासन ने राज्य कोविड कंट्रोल रूम को नहीं दी। इस हॉस्पिटल को कुंभ के दौरान कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाया गया था।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार के कोविड कंट्रोल नोडल अधिकारी ने कोरोना मरीजों की मौत की जानकारी छिपाने पर हॉस्पिटल और सीएमओ हरिद्वार को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। इस अस्पताल को एक निजी धार्मिक संस्था संचालित करती है। कुंभ मेले के दौरान प्रशासन ने इसे 500 बेड के कोविड केयर हॉस्पिटल में तब्दील किया था। 1 अप्रैल से आधिकारिक तौर पर हरिद्वार में कुंभ शुरू होने के बाद से अस्पताल में कुल 75 मौतें हुईं। अस्पताल प्रशासन ने सिर्फ 10 मौतों का डेटा राज्य कोविड नियंत्रण कक्ष अधिकारियों को दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक बृजेश कुमार की पत्नी का निधन इसी अस्पताल में 3 मई को हो गया था। बृजेश ने बताया कि जब उन्होंने अपनी पत्नी का शव अस्पताल के फर्श पर पड़ा देखा तो वह चौंक गए। उन्होंने बताया कि अपनी पत्नी को मात्र 24 घाटे पहले ही उन्होंने अस्पताल में भर्ती कराया था।

बृजेश ने रोते हुए कहा “उसे 24 घंटे में एक भी दावा नहीं दी। उसकी फाइल जो हमें अस्पताल से मिली थी, वह पूरी तरह से खाली थी। उसमें कुछ भी नहीं लिखा था। जब मैंने उसकी स्थिति के बारे में जानने के लिए अस्पताल के कर्मचारियों के साथ लड़ाई की और जब मुझे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो मैं वर्ड में घुस गया और उसके शव को फर्श पर पड़ा पाया।

आंकड़े छिपाने के आरोपों पर अस्पताल के नोडिल अधिकारी आईएएस अधिकारी अंशुल सिंह ने बताया हम सीएमओ, जिला प्रशासन और कुंभ मेला प्रशासन को लगातार डेटा दे रहे थे। शायद इसलिए हुई क्योंकि डेटा अपलोड करने वाले डॉक्टर यूपी के थे और 30 अप्रैल को कुंभ समाप्त होते ही वे अपनी मूल पोस्टिंग पर वापस चले गए। जब तक नए डॉक्टरों को लॉग-इन और अन्य विवरण मिल जाते, तब तक वहां डेटा अपलोड करने में देरी हो रही थी। लेकिन हमने मौतों को कभी नहीं छुपाया। हाालंकि इसकी जांच की जा रही है कि डेटा कंट्रोल रूप तक कैसे नहीं पहुंचा।

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