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उत्तराखंड संकट: हरीश रावत बोले- अब निवर्तमान मुख्यमंत्री हूं

हरीश रावत कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले की गई कैबिनेट की बैठक में 29 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के निणर्य को मंजूरी दी।

Author देहरादून | April 23, 2016 2:36 AM
हरीश रावत (पीटीआई फाइल फोटो)

राज्य में राष्ट्रपति शासन की बहाली के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि इस ‘स्टे’ से पिछले दरवाजे से राज्य पर एक ‘अनैतिक सरकार’ थोपने की कोशिशों पर भी रोक लग गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, किसी का नाम लिए बिना रावत ने कहा, मालूम हुआ है कि यह आदेश अंतरिम है और 27 अप्रैल तक है। लेकिन इस ‘स्टे’ से पिछले दरवाजे से प्रदेश पर एक अनैतिक सरकार को थोपने की हो रही कोशिशों पर भी रोक लग गई है।

सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले के जल्द निपटारे की उम्मीद जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला जल्द निर्णीत होना चाहिए क्योंकि प्रदेश में चल रही राजनीतिक अस्थिरता से प्रदेश का विकास बाधित हो रहा है। रावत ने कहा कि इसके अलावा प्रदेश में कई ऐसी ज्वलंत समस्याए हैं जिन्हें जल्दी दूर किया जाना आवश्यक है। इस संबंध में अगले माह की नौ तारीख से शुरू हो रही वार्षिक

चारधाम यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यात्रा का सुरक्षित और सुगम संचालन बहुत जरूरी है और जरा सी भी चूक होने पर प्रदेश पर उसका दुष्प्रभाव पड़ेगा। रावत ने कहा कि हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। रावत ने बड़ी ही सहजता से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद मैं मुख्यमंत्री था, उससे पहले मैं बर्खास्त मुख्यमंत्री था और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मैं निवर्तमान मुख्यमंत्री हूं।

दूसरी ओर बागी कांग्रेसी विधायकों के नेता पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने आरोप लगाया कि हरीश रावत नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी पाए बिना ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए। यह पूरी तरह से गैरकानूनी है। नैनीताल हाई कोर्ट ने मौखिक आदेश दिया और हरीश रावत झट से कुर्सी पर बैठ गए। उन्होंने इस तरह मुख्यमंत्री की कुर्सी को मजाक बना दिया। पहले हाई कोर्ट के फैसले ने राज्य की राजनीति में गरमाहट लाकर भाजपा की सारी बाजियां पलट दी थीं। इससे भाजपाई मायूस थे और कांग्रेसी खुश थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कांग्रेस की सारी बाजी पलट कर रख दी और भाजपा ने अब राहत ली है।

गौरतलब है कि नैनीताल हाई कोर्ट के फैसले के बाद 25 घंटे तक मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने कैबिनेट की दो ताबड़तोड़ बैठकें की। एक दर्जन के करीब फैसले लिए। रावत की कैबिनेट ने बेनामी संपत्तियों को जब्त करने का फैसला लिया और उससे होने वाली आमदनी से अस्पताल, कॉलेज और स्कूल खोले जाने का एलान किया। साथ ही रावत की कैबिनेट ने राज्य में 30 नौकरियों की घोषणा की। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों की पेंशन बढ़ाने की घोषणा की।

रावत कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले की गई कैबिनेट की बैठक में 29 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के निणर्य को मंजूरी दी। कैबिनेट बैठक में रावत ने अधिकारियों को चारधाम यात्रा को दुरुस्त कराने के बाबत आदेश दिए। रावत कैबिनेट ने राज्य में सर्किल रेट कम करने का एलान किया और इसके लिए मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री इंदिरा ह्रदयेश की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन को मंजूरी दी। अतिथि शिक्षकों का मानदेय 15 रुपए करने का फैसला लिया।

उधर देहरादून पहुंची कांग्रेस की केंद्रीय प्रभारी अंबिका सोनी ने कांग्रेस और प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा के विधायकों और कांग्रेस संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र सरकार ने एक चुनी हुई सरकार को गिराकर लोकतंत्र की हत्या की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी प्रदेश में विधानसभा के सभी उपचुनाव कांग्रेस ने जीते। इसीलिए भाजपा ने कांग्रेस की सरकार को गिराकर खुद सरकार बनाने की कोशिश की।

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