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चमोली के सीमांत गांव घेस में आजादी के 70 साल बाद पहुंची बिजली

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के पीछे का उद्देश्य यह था कि पर्वतीय राज्य के दूरस्थ गांवों का विकास हो। वह पिछले 13 माह में दूसरी बार घेस आए हैं, इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होती है। चमोली जिले का घेस व पिथौरागढ़ का पिपली जैसे गांवों में विकास पहुंचाकर वहां के लोगों की आजीविका मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।

Author November 26, 2018 8:08 AM
आजादी के 70 वर्षों बाद चमोली के सीमांत गांव घेस में बिजली पहुंची। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कार्यक्रम में बिजली का स्विच दबा कर इसका शुभारंभ किया। (Image Source: Twitter/@tsrawatbjp)

रविवार का दिन उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के गांव घेस के लिए ऐतिहासिक रहा। आजादी के 70 वर्षों बाद चमोली जिले में स्थित सीमांत गांव घेस में बिजली पहुंची है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घेस में आयोजित कार्यक्रम में बिजली का स्विच दबा कर इसका शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली को घेस, हिमनी व बलाण गांवों के नियोजित विकास व स्थानीय लोगों की आय को बढ़ाने के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के आग्रह पर केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नायक ने घेस क्षेत्र में राष्ट्रीय जड़ी-बूटी संस्थान खोले जाने की सैद्धांतिक स्वीकृति की घोषणा की। उन्होंने घेस को आयुष ग्राम बनाने में उनके मंत्रालय की ओर से हरसंभव सहयोग दिए जाने की बात भी कही। हिमालय की त्रिसूली और नंदा घुंघटी की तलहटी में बसे देवाल ब्लाक के सीमांत गांव घेस में जड़ी-बूटियों के संरक्षण, संवर्धन व विपणन के लिए कुटकी जड़ी-बूटी महोत्सव का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री व केंद्रीय आयुष मंत्री नायक ने चमोली जिले के सीमांत गांव घेस में आयोेजित कुटकी महोत्सव में भाग लिया। घेस में जड़ी-बूटी के जरिए स्थानीय लोगों की आर्थिकी के तंत्र को मजबूती देने के लिए पहल शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के पीछे का उद्देश्य यह था कि पर्वतीय राज्य के दूरस्थ गांवों का विकास हो। वह पिछले 13 माह में दूसरी बार घेस आए हैं, इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होती है। चमोली जिले का घेस व पिथौरागढ़ का पिपली जैसे गांवों में विकास पहुंचाकर वहां के लोगों की आजीविका मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली को घेस, बलाण व हिमनी गांवों के सुनियोजित विकास के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए। वहां के स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप किस तरह से स्थानीय लोगों की आय को दोगुना किया जा सकता, विशेषज्ञों की सहायता से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। इन गांवों को मॉडल विलेज के तौर पर विकसित किया जाना है। इसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

उन्होंने क्षेत्र में जैविक खेती प्रमाणन की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से उत्पादों की अच्छी कीमत मिलती है। परंतु इसकी प्रक्रिया में तीन साल लगते हैं। इसलिए इसकी शुरुआत जल्द से जल्द की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बांस, हैम्प आदि से भी काश्तकारों की आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। रावत ने कहा कि घेस में मटर की खेती को प्रोत्साहित किया गया था जिससे लाखों रुपए के मटर की बिक्री की गई थी। कुटकी जैसी जड़ी-बूटियों से भी लोगों की आर्थिकी में सुधार किया जा सकता है। नेटवर्क की समस्या के बारे में बताए जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप्टिकल फाइबर के लिए बिजली के खंभों के प्रयोग को अनुमति दी गई है। मुकेश अंबानी ने उत्तराखंड में अस्पताल व स्कूलों में निशुल्क वाईफाई उपलब्ध करवाने की बात कही है।

केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नायक ने कुटकी महोत्सव की तारीफ करते हुए कहा कि करते हुए कहा कि जड़ी-बूटियों को प्रोत्साहित करने के लिए उनका मंत्रालय हरसंभव सहयोग देगा। घेस को आयुष ग्राम बनाने के लिए जो भी आर्थिक सहायता की जरूरत होगी, केंद्र सरकार प्रदान करेगी। उन्होंने क्षेत्र में जड़ी-बूटी का राष्ट्रीय संस्थान खोले जाने पर सैद्धांतिक मंजूरी भी दी। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जड़ी-बूटी की काफी संभावनाएं हैं। ऐसे में यहां जड़ी-बूटी के राष्ट्रीय संस्थान की मांग जायज है।

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