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योगी का हड़कंप: लखनऊ से पहुंची शिकायत तो आनन-फानन में निपटारा कर फरियादियों को किया पेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश की नौकरशाही पर अपनी पकड़ लगातार मजबूत करते जा रहे हैं।

Author October 16, 2017 7:16 PM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (फोटो पीटीआई)

प्रबंधन में माहिर उत्तर प्रदेश के नौकरशाहों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को रविवार की देर शाम ‘फील गुड’ करवा दिया। अधिकारियों ने महीनों से लम्बित उन शिकायतों को आनन-फानन में निपटाकर शिकायतकर्ताओं को मुख्यमंत्री के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पेश कर दिया जिन नामों की सूची लखनऊ से जिला प्रशासन को भेजी गई थी। बहरहाल, मुख्यमंत्री द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे प्रदेश की जनता से संवाद शुरू किए जाने से नौकरशाही में हड़कम्प मचा हुआ है। मुख्यमंत्री प्रदेश की नौकरशाही पर अपनी पकड़ लगातार मजबूत करते जा रहे हैं।

रविवार (15 अक्टूबर) को दोपहर बाद उन्होंने प्रदेश के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए सभी मण्डलायुक्तों, पुलिस उपमहानिरीक्षकों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए तलब किया था। साथ ही शासन स्तर से प्रत्येक जिले के 10 ऐसे शिकायत कर्ताओं की सूची भी जिला प्रशासन को भेजी गई थी, जिन्होंने पूर्व में समेकित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पर शिकायत की थी और उसका निपटारा हो चुका बताया गया था।

दरअसल, मुख्यमंत्री शिकायतों के निपटान की गुणवत्ता परखना चाह रहे थे। इसी कारण वह शिकायत कर्ताओं से सीधे संवाद करना चाह रहे थे। शनिवार को मुख्यमंत्री की वीडियो कान्फ्रेंसिंग और उसमें 10 शिकायतकर्ताओं के नामों की सूची मिलते ही जिलों में हड़कम्प मच गया और निस्तारण की गुणवत्ता परखी जाने लगी। कागजों में निस्तारित दिखाए गए किन्तु धरातल पर लम्बित कई मामलों के शिकायतकर्ताओं को आनन-फानन में बुलाकर निस्तारण कराया गया और अनुनय विनय के साथ उन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष वीडियो कान्फ्रेंसिंग में पेश किया गया।

गोण्डा के जिन शिकायतकर्ताओं को शासन के निर्देश पर मुख्यमंत्री के वीडियो कान्फ्रेंसिंग में बुलाया गया था उनमें सेवानिवृत्त कर्मचारी नेता केबी सिंह थाना कोतवाली नगर, राम प्रीति पुत्र संतराम थाना उमरी बेगमगंज, पवन कुमार यादव थाना नवाबगंज, बेदान्ती देवी शुक्ला थाना नवाबगंज, चन्द्रभान सिंह थाना तरबगंज, लल्लन वर्मा थाना इटियाथोक, राम जन्म थाना वजीरगंज, इन्द्र प्रकाश थाना छपिया तथा श्रीमती रत्ना पाण्डेय निवासी लखनऊ शामिल हैं। केबी सिंह की शिकायत 27 अप्रैल 2015 से लम्बित थी। वह कलेक्ट्रेट सभागार में कोषागार कार्यालय के बगल निर्मित कराए गए पेंशनर्स कक्ष को सम्पूर्ण साज-सज्जा के साथ उप्र. पेंशनर्स कल्याण संस्था को सौंपे जाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न स्तर पर कई बार शिकायतें की किन्तु कहीं से राहत नहीं मिली। शासन से सूची में उनका नाम मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए आते ही जिला प्रशासन ने 14 अक्टूबर को वरिष्ठ कोषाधिकारी और पेंशनर्स संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके प्रकरण का निस्तारण करवा दिया।

राम प्रीति पुत्र संतराम की शिकायत वर्ष 2016 की थी। इस शिकायत में यह तय नहीं हो पा रहा था कि प्रकरण राजस्व अथवा विकास विभाग में से किससे सम्बंधित है। दोनों विभाग एक दूसरे से सम्बंधित बताकर टाल रहे थे। शासन से मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए राम प्रीति का नाम आने पर जिला प्रशासन ने आनन-फानन में शिकायत का निस्तारण कराया और बेलसर विकास खण्ड के ग्राम विकास अधिकारी विजय बहादुर सिंह को झूठी रिपोर्ट देने व पदीय दायित्वों का सम्यक निर्वहन न करने के आरोप में निलम्बित कर दिया गया। उन्हें निलम्बन अवधि में झंझरी विकास खण्ड से सम्बद्ध किया गया है। पवन कुमार यादव ने अपने गांव में अवैध शराब बनाने और बेचने की शिकायत की थी। पुलिस जांच में यह मामला झूठा करार दिया गया किन्तु जिला आबकारी अधिकारी निरंकार नाथ पाण्डेय ने प्रकरण की जांच में शिकायत आंशिक सही पाते हुए कार्रवाई भी की। किन्तु समय पर रिपोर्ट देकर प्रकरण को निक्षेपित नहीं कराया। इसलिए उन्हें जिलाधिकारी द्वारा चेतावनी दी गई है। साथ ही गांव में अवैध शराब का निकर्षण व विक्री पूर्णतः प्रतिबंधित कराने का आदेश दिया है।

अज्ञात नाम से की गई एक शिकायत के निस्तारण की समय पर आख्या न देने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संतोष कुमार श्रीवास्तव को भी चेतावनी निर्गत की गई है। लल्लन वर्मा, राम जन्म, इन्द्र प्रकाश और श्रीमती रत्ना पाण्डेय की शिकायतें पुलिस विभाग से सम्बंधित थीं। इनकी शिकायतों को भी रातों-रात निस्तारित करवाकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग में बुलाया गया था। मुख्यमंत्री ने कुछ शिकायत कर्ताओं से यह भी पूछा कि स्थानीय अधिकारियों का किसी प्रकार का दबाव तो नहीं है। कुल मिलाकर कई शिकायतों को आनन-फानन में निपटाए जाने से स्पष्ट हो गया कि धरातल पर शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है किन्तु अधिकारियों के प्रबंधन के चलते मुख्यमंत्री को जरूर ’फील गुड’ हुआ होगा।

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