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योगी आदित्यनाथ का जातीय गणित: 1 यादव, 1 मुस्लिम, 1 सिख, 17 ओबीसी चेहरों को बनाया मंत्री, 20 से ज्यादा सवर्णों को भी मिली जगह

बीजेपी की इस सरकार में निषाद, मल्लाह, पासी, धोबी, राजभर, समुदाय से आने वाले विधायकों को भी प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई हैं। पार्टी ने ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री और अनिल राजभर को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया है।

सीएम पद का कार्यभार संभालते योगी आदित्यनाथ। ( Photo Source: ANI)

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। उनके साथ अन्य 46 मंत्रियों ने भी पद एवं गोपनीयता की शपथ ली है। भाजपा और योगी आदित्यनाथ ने अपने नवगठित मंत्रिपरिषद में जातीय समीकरण (कास्ट फैक्टर) और क्षेत्रीय समीकरण का पूरा ख्याल रखा है। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से बीजेपी के लिए यह जातीय समीकरण अहम है। इसलिए बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में जातियों के बीच संतुलन बैठाने की पूरी कोशिश करते हुए परंपरागत वोट बैंक के अलावा ओबीसी और दलित समुदाय के विधायकों को भी मंत्री बनाया है। बीजेपी की इस सरकार में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को शामिल कर कुल 17 OBC, 6 एससी, 7 राजपूत, 8 ब्राह्मण, 8 कायस्थ-वैश्य और 1 मुस्लिम को मंत्री बनाया गया है।

टीम योगी में जिन्हें डिप्टी सीएम का दर्जा दिया गया है उनका मकसद भी जातीय समीकरणों को दुरुस्त करना है। केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी कैटेगरी से आते हैं। उनके अलावा विधानसभा चुनाव में मौर्य जाति के भरपूर समर्थन को देखते हुए पार्टी ने इस जाति को खुश करने के लिए केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम का ओहदा दिया है। हालांकि केशव प्रसाद थे तो सीएम की रेस में लेकिन उन्हें अपनी डिप्टी सीएम से ही संतोष करना पड़ा है। योगी सरकार के दूसरे डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ब्रह्माण हैं। ब्रह्माणों को बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। माना जा रहा है कि ब्राह्मण वोटों पर पकड़ बरकरार रखने के लिए ही उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया है।

केशव प्रसाद मौैर्य के अलावा जिन ओबीसी नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है, उनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, ओमप्रकाश राजभर, धर्मपाल सिंह, मुकुट बिहारी वर्मा, नंद कुमार गुप्ता नंदी, अनुपमा जायसवाल, स्वतंत्र देव सिंह, अनिल सिंह राजभर, धर्म सिंह सैनी भी शामिल हैं। जाट समुदाय से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी को योगी आदित्यनाथ ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया है। ये साल 1990 से भाजपा के साथ जुड़े रहे हैं। पश्चिमी यूपी के जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाले चौधरी मुरादाबाद के रहने वाले हैं। ये विधान परिषद के सदस्य हैं। पार्टी ने ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री और अनिल राजभर को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया है। पहले ये समुदाय बीएसपी का पारंपरिक वोट माना जाता था

योगी आदित्यनाथ ने 6 दलित चेहरों के भी अपनी टीम में शामिल किया है। रमापति शास्त्री, गुलाब देवी, सुरेश पासी को मंत्री बनाया गया है। पासी अमेठी की जगदीशपुर सीट से पहली बार विधायक बने हैं। इन्होंने कांग्रेस के धोबी समुदाय को हराया है। बीजेपी की इस सरकार में निषाद, मल्लाह, पासी समुदाय से आने वाले विधायकों को भी प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई हैं।

योगी आदित्यनाथ ने सवर्णों की भावनाओं का भी खासा ख्याल रखा है। 8 ब्राह्मण, सात राजपूत चेहरों को भी मंत्री बनाया है। बीजेपी ने स्वाति सिंह को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया है, स्वाति बीजेपी के राजपूत नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी हैं। दयाशंकर सिंह पर मायावती को अपशब्द कहने का आरोप है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढिया बढ़त हासिल करने वाले बीजेपी ने 2 जाटों को भी मंत्री बनाया है लेकिन गुर्जर समुदाय से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया है।

योगी की इस सरकार में मोहसिन रजा को मुस्लिम चेहरे के रूप में  जगह दी गई है जबकि यूपी की आबादी में अहम हिस्सा रखने वाले यादव समुदाय को बीजेपी सरकार में ज्यादा हिस्सेदारी नहीं मिली है। जौनपुर सदर सीट से चुनाव जीतने वाले गिरीश यादव को राज्यमंत्री बनाया गया है। सिख चेहरे के रूप में बलदेव सिंह ओलख ने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली है। इन्होंने रामपुर की बिलासपुर सीट से चुनाव जीता है।

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