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फेल हुआ योगी सरकार का 24 घंटे बिजली देने का वादा, कई जिलों में 10 घंटे से भी ज्यादा की कटौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की बात करें तो वहां पर भी बिजली कटौती की जा रही है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ। (File Photo)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के समय बीजेपी ने प्रदेश की जनता से 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था लेकिन बीजेपी की सरकार बनने के बाद उनके वादों की पोल खुल रही है। प्रदेश में बीजेपी की सरकार बने हुए दो महीने बीत चुके हैं लेकिन प्रदेश में कई जिले ऐसे हैं जहां पर लोग बिजली न मिलने की वजह से परेशान हैं। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में 6 से 7 घंटे बिजली में कटौती की जा रही है। इतनी गर्मी में इतने घंटे बिजली कटौती के कारण लोग काफी परेशान हैं। गोरखपुर ही नहीं प्रदेश के अन्य जिले भी राज्य सरकार से बिजली वृद्धि की मांग कर रहे हैं। दो महीने में ही योगी सरकार अपने वादों में फेल होती हुई दिखाई दे रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में लोकल फॉल्ट की समस्या होती रहती है, जिसकी वजह से बिजली में कटौती करनी पड़ती है। इस फॉल्ट से निजात पाने के लिए फिलहाल सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की बात करें तो वहां पर भी बिजली कटौती की जा रही है। वहीं बिजली विभाग का कहना है कि ओवरलोड की वजह से ट्रांसफॉरमर फुकने और लोकल फॉल्ट के कारण बिजली में कटौती हो रही है। एक अधिकारी ने कहा कि जहां किसी राज्य में 150 मिलियन यूनिट की जरुरत है वहां पर औसतन 100 मिलियन यूनिट ही दी जा रही है।

वहीं उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के विधानसभा क्षेत्र मथुरा की बात करें तो जिले को 24 घंटे बिजली दी जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की बात की जाए तो वहां पर औसतन 21 से 22 घंटे बिजली दी जा रही है। इन जगहों के हालात तो ठीक हैं लेकिन सरकार को प्रदेश के अन्य जिलों पर भी ध्यान देने की जरुरत है। प्रदेश में कुछ ही जगहें ऐसी हैं जहां पर बिजली की परेशानी नहीं है। इलाहाबाद शहर पश्चिमी में 9 घंटे की बिजली कटौती की जा रहा है। मैनपुरी के हालात तो और भी ज्यादा खराब हैं। वहां पर ग्रामीण क्षेत्रों में 14 घंटे ही लोगों को बिजली मिल पा रही है। ऐसी गर्मी में लोग कैसे गुजारा कर रहे हैं, इसका अंदाजा सरकार को लगाना चाहिए। इससे एक बात यह भी साबित होती है कि चुनावों के समय राजनीतिक पार्टियां जनता से वादा तो कर लेती हैं लेकिन सरकार बनने के बाद वे अपने वादे पर अमल नहीं कर पाती।

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