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1990 में 150 कारीगरों के साथ शुरू हुआ राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम, आज अकेले बचे हैं रजनीकांत

बीते बुधवार को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ अयोध्या आए तब रजनीकांत अकेले ही टीन की छत के नीचे राम मंदिर के लिए पत्थर नक्काशी का काम कर रहे थे।

दो साल पहले अयोध्या आए रजनीकांत कहते हैं कि यहां काम करने के लिए मुझे निश्चित सैलरी मिलती है जोकि मेरे परिवार के लिए काफी है। (फोटो सोर्स विशाल श्रीवास्तव)

साल 1990 में शुरू हुआ फैजाबाद के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उत्साह अब कम होता नजर आ रहा है। यहां विश्व हिंदू परिषद वर्कशॉप में मंदिर निर्माण के लिए की जा रही पत्थर नक्काशी के कारीगर भी धीरे-धीरे जा चुके हैं। खबरों के अनुसार पहले यहां करीब 150 कारीगर मंदिर निर्माण के लिए पत्थर नक्काशी का काम करते थे लेकिन 27 साल बाद ये संख्या घटकर महज एक कारीगर पर आ गई है। पिछले 6 महीनों से 53 साल के रजनीकांत अकेले यहां पत्थर नक्काशी का काम कर रहे हैं जबकि अन्य लोग समय के साथ अच्छे विकल्प के लिए यहां से चले गए। हालंकि यहां काम करने वाले कारीगरों की संख्या एक दम से नहीं घटी। बता दें कि बाबरी विध्वंस आरोप का सामना कर रहे राम जन्मभूमि न्यास विकास प्रमुख नृत्या गोपाल दास द्वारा चलाई जा रही तीन एकड़ की वर्कशॉप में तीन साल पहले करीब तीन दर्जन लोग काम करते थे।

बीते बुधवार को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ अयोध्या आए तब रजनीकांत अकेले ही टीन की छत के नीचे राम मंदिर के लिए पत्थर नक्काशी का काम कर रहे थे। ये वर्कशॉप वीएचपी नेता के घर केशवपुरम से करीब 100 मीटर की दूरी पर है। साल 1992 से वर्कशॉप में सुपरवाइजर के रूप में काम करने वाले अहमदाबाद निवासी गिरीशभाई सोमपुरा (60) कहते हैं, ’27 साल पहले जब यहां पत्थर नक्काशी काम शुरू किया गया था तब गुजरात, राजस्थान और मिर्जापुर के करीब 125 कारीगर यहां काम करते थे। बाद में ज्यादातर कारीगर बेहतर विकल्प की तलाश में यहां से चले गए। दो साल पहले एक शख्स स्वामी नारायण मंदिर प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका चला गया।’

3,000 से नौकरी शुरू कर वर्तमान में 12,000 की सैलरी पाने वाले सोमपुरा आगे कहते हैं कि अब यहां सिर्फ एक ही कारीगर काम करता है। एक बार राम मंदिर निर्माण के लिए मंजूरी मिलने के बाद हम अन्य कारीगारों के भी बुलाएंगे। वहीं दो साल पहले अयोध्या आए रजनीकांत कहते हैं कि यहां काम करने के लिए मुझे निश्चित सैलरी मिलती है जोकि मेरे परिवार के लिए काफी है। मैं रोज यहां आठ घंटे काम करता हूं और यहीं रहता हूं। जानकारी के लिए बता दें कि साल 2015 में जब 35 टन गुलाबी बलुआ पत्थर मंदिर लिए खरीदा गया तब विपक्ष ने भाजपा पर 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मंदिर का मुद्दा उठाने का आरोप लगया था।

देखें वीडियो, कोर्ट के बाहर सुलाझाएं राम मंदिर का मुद्दा, अगर वार्ता रही नाकाम तो कोर्ट देगा दखल

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