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यूपी में हुई सांड की मौत, अंतिम संस्कार में शामिल हुए बीजेपी विधायक

जिला मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में मनुष्य और पशु के प्यार की अनोखी नजीर देखने को मिली। यहां गलियों में आवारा घूमने वाले सांड की करंट लगने से असमय मौत हो गई थी। गांव वालों ने न सिर्फ पूरे रीति-रिवाज से सांड का अंतिम संस्कार किया बल्कि भव्य तेरहवीं का भी आयोजन किया।

यूपी के जिला मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में सांड भोला के बछड़े की पगड़ी की रस्म करते ग्रामीण। फोटो— यू ट्यूब (वीडियो स्क्रीनशॉट)

यूपी के जिला मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में मनुष्य और पशु के प्यार की अनोखी नजीर देखने को मिली। यहां गलियों में आवारा घूमने वाले सांड की करंट लगने से असमय मौत हो गई थी। गांव वालों ने न सिर्फ पूरे हिंदू रीति-रिवाज से सांड का अंतिम संस्कार किया बल्कि भव्य तेरहवीं का भी आयोजन किया। इस मौके पर सांड के तीन महीने के बछड़े को सांड की पगड़ी पहनाकर रस्म अदायगी भी की गई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए भाजपा विधायक उमेश मलिक और सांसद के भाई विवेक बालियान भी पहुंचे।

बताया गया कि बुढ़ाना तहसील के गांव उकावली में 24 जुलाई को बिजली लाइन टूटने से सांड की मौत हो गई थी। गांव वालों के मुताबिक, अगर वह सांड उस रास्ते पर पहले न गया होता तो संभवत: किसी ग्रामीण की मृत्यु अवश्य हुई होती। ग्रामीणों ने इसके बाद आमराय होकर पूरे हिन्दू रीतिरिवाज के साथ सांड को दफनाकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। जबकि मृत्यु के 13 दिन बाद सांड की तेरहवीं का ऐलान कर दिया गया।

इसके बाद ग्रामीणों ने सांड की तेरहवीं करने का निर्णय लिया। पांच अगस्त को तेरहवीं का दिन तय किया गया। रविवार को सुबह ग्रामीणों ने पहले हवन-पूजन का आयोजन किया। इसके बाद विधि-विधान के साथ ब्रह्मभोज का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। भोज में पूड़ी-सब्जी सहित लड्डू भी बनवाए गए थे। इस भोज में गांव के सैकड़ों लोगों ने हिस्‍सा लिया।

इस तेरहवीं कार्यक्रम में ग्रामीणों सहित राजनेताओं विधायक और आसपास क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। इस मौके पर बीजेपी विधायक उमेश मलिक ने बताया कि इस गांव में रविवार को तेरहवीं थी। एक सांड था जिसका नाम भोला था। पिछले 14 सालों से यहीं रहता था। जब भी मैं गांव में आता था तो देखता था कि बच्चे भी उसके साथ खेलते थे। लेकिन कभी उस सांड ने किसी बच्चे पर हमला नहीं किया। इस सांड के प्रति पूरे गांव में एक अजीब सा दया का भाव था। शायद यही कारण है कि पूरे गांव ने उसका अंतिम संस्कार ऐसे ढंग से किया, जैसे लगा कि कोई अपना इस दुनिया से गया हो। रविवार की रस्म तेरहवीं का आयोजन किया गया था। जिसमें उसके तीन माह के बच्चे को पगड़ी पहनाई गई है।

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