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मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस के साधु नाराज, बीजेपी के खिलाफ छेड़ने वाले हैं अभियान!

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि एक ओर तो वे अयोध्या में राम मंदिर बनाना चाहते हैं वही दूंसरी ओर ये लोग वाराणसी के 20 से ज्यादा छोटे मंदिरों को तोड़ने की योजना बना रहे हैं। ये मंदिर विश्वनाथ कॉरिडोर के रास्ते में पड़ते हैं। इस कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ मंदिर के चारों ओर बनाया जाना है।

साधुओं का कहना है कि वे मंदिरों को तोड़ने की किसी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे। (पीटीआई फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के साधु संत बीजेपी से नाराज है। ये साधु संत बीजेपी के खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल ये साधु संत वाराणसी में प्रस्तावित विश्वनाथ कॉरिडोर का विरोध कर रहे हैं। इस कॉरि़डोर की वजह से 20 छोटे-छोटे मंदिरों को तोड़ा जाना है। साधुओं का कहना है कि मोदी सरकार इस पौराणिक शहर की विरासत और इसके वास्तविक सुंदरता को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। इस मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्व में दर्जनों साधु धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि एक ओर तो वे अयोध्या में राम मंदिर बनाना चाहते हैं वही दूंसरी ओर ये लोग वाराणसी के 20 से ज्यादा छोटे मंदिरों को तोड़ने की योजना बना रहे हैं। ये मंदिर विश्वनाथ कॉरिडोर के रास्ते में पड़ते हैं। इस कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ मंदिर के चारों ओर बनाया जाना है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जल्द ही वे लोग मोदी और बीजेपी सरकार के खिलाफ शहर में बड़ा अभियान चलाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि हमारे रास्ते और मंदिरों को तोड़ा गया या फिर उसके स्वरुप को बिगाड़ा गया तो यहां व्यापक विरोध होगा। बता दें कि शहर में मंदिरों और धरोहरों को बचाने के लिए धरोहर बचाओ समिति को गठित किया गया है। इस आंदोलन में शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने ही स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है।

बता दें कि ‘विश्वनाथ कॉरीडोर’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रॉजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के जरिये पीएम मोदी वाराणसी को आधुनिक लुक देने के साथ ही शहर की विरासत को सहेजना चाहते हैं। इसके तहत शहर के मंदिरों-मठों में अवैध रूप से कब्जा कर बैठे लोगों को बाहर निकालना भी शामिल है। इधर कुछ दिन पहले खबर आई थी कि साधु-संतों के विरोध के बाद इस प्रोजेक्ट के ब्लू प्रिंट में बदलाव होना तय हो गया है। सरकारी अफसरों ने बताया है कि मंदिर और धरोहरों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

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