ताज़ा खबर
 

बिस्मिल्ला के घर में एक भी शहनाई नहीं छोड़ी चोरों ने

भारत रत्न बिस्मिल्ला खान की यादगार धरोहरों में शुमार पांच शहनाइयां वाराणसी स्थित उनके बेटे के घर से चोरी हो गई है।

Author वाराणसी | December 6, 2016 5:06 AM
शहनाई वादक भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान

भारत रत्न बिस्मिल्ला खान की यादगार धरोहरों में शुमार पांच शहनाइयां वाराणसी स्थित उनके बेटे के घर से चोरी हो गई है, जिनमें से एक उनकी पसंदीदा शहनाई थी, जो वह मुहर्रम के जुलूस में बजाया करते थे। पुलिस को संदेह है कि चोरी हो गए शहनाई के बारे में किसी को मालूम था। जबकि चोरी करने वाले गिरंोह ताला काट कर चोरी का वारदात को अंजाम देते हैं। इसका पर्दाफाश जल्दी कर दिया जाएगा। शहनाई चोरी होने से उस्ताद के परिजनों व उनके शुभेच्छुओं में भारी रोष है। बिस्मिल्ला खान आखिरी सांस तक सोते जागते शहनाई अपने पास रखते थे। दस बरस पहले बिस्मिल्ला खान के इंतकाल के बाद से ही उनकी याद में संग्रहालय बनाने की मांग होती रही लेकिन अभी तक कोई संग्रहालय नहीं बन सका। ऐसे में उनकी अनमोल धरोहरें उनके बेटों के पास संदूकों में पड़ी हैं जिनमें से पांच शहनाइयां रविवार रात चोरी हो गईं।

बिस्मिल्ला खान के पौत्र रजी हसन ने वाराणसी से बताया, ‘हमें कल रात इस चोरी के बारे में पता चला और हमने पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई है। चोरी गए सामान में चार चांदी की शहनाइयां, एक चांदी की और एक लकड़ी की शहनाई, इनायत खान सम्मान और दो सोने के कंगन थे।’उन्होंने बताया ,‘हमने पिछले दिनों दालमंडी में नया मकान लिया है लेकिन 30 नवंबर को हम सराय हरहा स्थित पुश्तैनी मकान में आए थे, जहां दादाजी रहा करते थे। मुहर्रम के दिनों में हम इसी मकान में कुछ दिन रहते थे। जब नए घर लौटे तो दरवाजा खुला था और संदूक का ताला भी टूटा हुआ था। अब्बा (काजिम हुसैन) ने देखा कि दादाजी की धरोहरें चोरी हो चुकी थीं।’

हसन ने कहा ,‘ये शहनाइयां दादाजी को बहुत प्रिय थीं। इनमें से एक पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने उन्हें भेंट की थी। एक पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने और एक राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने दी थी जबकि एक उन्हें उनके एक प्रशंसक से तोहफे में मिली थी।’ उन्होंने कहा, ‘इनमें से एक उनकी सबसे खास शहनाई थी जिसे वह मुहर्रम के जुलूस में बजाया करते थे। अब उनकी कोई शहनाई नहीं बची है। शायद रियाज के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की कोई शहनाई बची हो। उनकी धरोहरों के नाम पर भारत रत्न सम्मान, पदमश्री, उन्हें मिले पदक वगैरह हैं।’यह पूछने पर कि इतनी अनमोल धरोहरें उन्होंने घर में क्यों रखी थीं, हसन ने कहा कि पिछले दस साल से उनक परिवार इसकी रक्षा करता आया था, तो उन्हें लगा कि ये सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें पहले उम्मीद थी कि दादाजी की याद में संग्रहालय बन जाएगा लेकिन नहीं बन सका। हम इतने साल से उनकी धरोहरों को सहेजे हुए थे। हमें क्या पता था कि घर से उनका सामान यों चोरी हो जाएगा।’उस्ताद के छोटे बेटे काजीम हुसैन के अनुसार बीते 30 नवंबर को चाहमामा स्थित मकान का ताला बंद कर पूरे परिवार के साथ भीखाशाह गली स्थित मकान पर चले गए थे। रविवार चार दिसम्बर की रात लौटे तो दरवाजा खुला मिला।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App