ताज़ा खबर
 

गंगा में अवैध खनन के खिलाफ मातृसदन का बेमियादी अनशन

गंगा नदी में धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन के खिलाफ मातृसदन संस्था के संत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद बेमियादी अनशन पर बैठ गए हैं।
Author हरिद्वार | November 7, 2016 05:57 am
गंगा नदी में डुबकी लगाता एक श्रद्धालु। (Reuters File Photo)

गंगा नदी में धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन के खिलाफ मातृसदन संस्था के संत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद बेमियादी अनशन पर बैठ गए हैं। मातृसदन ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार की शह पर गंगा नदी में अवैध खनन हो रहा है। साथ ही इस अवैध खनन में सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं।  मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि भाजपा के प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल, उत्तराखंड क्रांति दल के नेता पूर्व मंत्री दिवाकर भट्ट के बेटे, हरीश रावत सरकार के कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल के रिश्तेदार, कांग्रेस के पूर्व बागी विधायक सुबोध उनियाल और कांग्रेस के पूर्व विधायक हरीश धामी के स्टोन के्रशर हरिद्वार में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि गंगा नदी में अवैध रूप से गंगा का सीना चीरकर जो खनन हो रहा है, यदि उसका माल इन नेताओं के स्टोन क्रेशरों में गया हो तो इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार गंगा की धारा से पांच किलोमीटर दूर स्टोन के्रशर होना चाहिए। और जिस स्थान पर स्टोन क्रेशर लगा हो, उसी स्थान पर खनन का पट्टा होना चाहिए ताकि गंगा नदी में अवैध खनन न हो सके। उन्होंने बताया कि 16 फरवरी, 2015 को हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद शासन को लिखा था कि स्टोन के्रशर गंगा नदी से पांच किलोमीटर दूर होना चाहिए। और गंगा नदी में भोगपुर तक कोई खनन नहीं होगा। भोगपुर से आगे गंगा नदी में केवल रेत ही निकालने की अनुमति होगी, वह भी वैज्ञानिक आधार पर।
मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जब उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर राष्टÑपति शासन लगाया गया था तब हरिद्वार जिले में वर्तमान जिलाधिकारी ही तैनात थे। राष्टÑपति शासन के दौरान हरिद्वार जनपद में पूरी तरह से गंगा नदी में अवैध खनन पर पाबंदी लगी हुई थी। परंतु राष्टÑपति शासन हटते ही फिर से हरिद्वार जनपद में अवैध खनन चालू हो गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय उमा भारती ने गंगा की सफाई के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बल्कि गंगा में प्रदूषण बढ़ा है। और गंगा में गिर रहे गंदे नालों की तादाद बढ़ी है।

धुंध की मोटी चादर से घिरी दिखी राजधानी दिल्ली

केंद्र सरकार ने जोर-शोर से नमामि गंगे योजना शुरू की। उसके लिए करोड़ों रुपए खर्च किए, परंतु गंगा की सफाई तक नहीं हुई। गंगा में प्रदूषण और ज्यादा बढ़ा। मातृसदन ने गंगा में बन रहे बांधों पर तुरंत रोक लगाने और अन्य प्रस्तावित बांधों की योजना रद्द करने की केंद्र सरकार से मांग की। उन्होंने कहा कि गंगा बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने और बड़े-बडेÞ बजट बनाने से साफ होने वाली नहीं है। केंद्र सरकार और केंद्रीय उमा भारती में गंगा को साफ करने की संकल्प शक्ति का अभाव है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों का गंदा पानी साफ करने के लिए इन फैक्ट्रियों में ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएं। इन फैक्ट्रियों का गंदा पानी साफ करके गंगा नदी में डालने की बजाय सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाए। साथ ही गंगा नदी के पांच किलोमीटर के दायरे तक आने वाली जमीन में जैविक खेती की जाए। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि हरिद्वार में वीआइपी के लिए पुलिस की व्यवस्था अलग से की जाए। यहां प्रोटोकोल पुलिस विभाग अलग से खोला जाए ताकि हरिद्वार जनपद की कानून-व्यवस्था वीआइपी के कारण प्रभावित न हो सके। उन्होंने कहा कि हरीश रावत उत्तराखंड के विनाशक मुख्यमंत्री हैं। उनके राज में गंगा नदी में अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। अवैध तरीके से बाग काटे जा रहे हैं।

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.