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BHU में गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का ‘महिमामंडन’, छात्रों ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत

छात्रों ने कहा, "एक ऐसा कार्यक्रम जो देश के संवैधानिक मूल्यों पर चोट पहुंचाता है, उसकी अनुमति कैसे दी गई? यह बड़े षड़यंत्र का सूचक है, अदालत द्वारा मौत की सजा दिए गए आतंकवादी गोडसे को गौरवान्वित करना देश की एकता और अखंडता पर चोट करने जैसा है। यह देशद्रोह से कम नहीं है, हम इस मामले में जांच चाहते हैं।"

Author February 22, 2018 15:59 pm
वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का एक सांस्कृतिक उत्सव विवादों में आ गया है। विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि कला संकाय में एक नाटक का मंचन किया गया, जिसमें कथित रूप से महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का ‘महिमामंडन’ किया गया। छात्रों ने इस बाबत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में छात्रों ने कहा है कि मराठी नाटक ‘मी नाथूराम गोडसे बोलतोय’ पर आधारित इस मंचन में महात्मा गांधी की गलत छवि पेश की गई। छात्रों ने कहा है कि इस नाटक में महात्मा गांधी को कथित रूप से देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार बताया गया और उनकी हत्या को न्यायोचित ठहराने की कोशिश की गई। छात्रों ने कहा, “एक ऐसा कार्यक्रम जो देश के संवैधानिक मूल्यों पर चोट पहुंचाता है, उसकी अनुमति कैसे दी गई, यह एक बड़े षडयंत्र का सूचक है। अदालत द्वारा मौत की सजा दिए गए आतंकवादी गोडसे को गौरवान्वित करना देश की एकता और अखंडता पर चोट करने जैसा है और यह देशद्रोह से कम नहीं है। हम इस मामले में जांच चाहते हैं।”

शिकायत में छात्रों ने कहा कि नाथूराम गोडसे को गांधी की हत्या करने के लिए मौत की सजा दी गई थी। गांधी के हत्यारे का महिमामंडन देशद्रोह के बराबर है। लंका थाने के एसएचओ संजीव मिश्रा ने कहा कि उन्होंने इस मामले में एक शिकायत को स्वीकार कर लिया है। इस कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, उसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। संजीव मिश्रा ने कहा, “हमें अब तक कार्यक्रम का कोई वीडियो नहीं मिला है, जैसे ही हमें वीडियो मिलेगा, हम घटना की जांच करेंगे। इस शिकायत को बीएचयू के प्रोक्टर बोर्ड को भी भेज दिया गया है, हम केस की जांच कर रहे हैं, साथ ही इस आरोप की भी जांच हो रही है कि क्या कार्यक्रम कुछ प्रतिबंधित साहित्य पर आधारित था।”

हिंदी के प्रोफेसर और फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के डीन श्रीनिवास पांडे ने कहा कि वह मामले की जांच कर रहे हैं और इस बारे में उन्होंने अब तक ऐसा कुछ नहीं सुना है। बीएचयू के चीफ प्रोक्टर रोयाना सिंह से इस बाबत संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।

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