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17 साल से शिवलिंग बना रही मुस्लिम महिला, बोलीं- हिंदू या मुसलमान नहीं, हिंदुस्तानी हैं हम

जब उनसे पूछा गया कि वह शिवलिंग क्यों बनाती हैं तो उन्होंने कहा- शिवलिंग बनाने की कला भगवान की देन है और हम इसे प्यार से बनाते हैं। वह अपनी कला को अपनी रोजमर्रा की रोटी कमाने के तरीके के रूप में समझती है।

17 साल से शिवलिंग बना रही मुस्लिम महिला। (Photo Source: ANI)

देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक उन्माद की खबरें भले आती रहती हैं। हिंदू-मुस्लिमों के बीच धर्म का मुद्दा छेड़कर उनके रिश्तों में खाई खोदने का काम किया जाता है, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आती हैं, जो देश में विद्यमान सामाजिक और धार्मिक सद्भाव को दर्शाती है। ऐसा ही एक मामला वाराणसी में काशी विश्वनाथ के दर से आया है। यहां एक मुस्लिम महिला 17 सालों से शिवलिंग बना रही है। शिवलिंग बनाने वाली वाराणसी निवासी आलम आरा का मानना है कि हिंदू-मुस्लिम के बीच विवाद खड़ाकर उन्हें बांटना समय की बर्बादी है और वह खुद को हिंदू या मुसलमान नहीं बल्कि हिंदुस्तानी मानती हैं। वह अपने जीवकोपार्जन के लिए शिवलिंग बनाती हैं। उनका कहना है कि यह कला उन्हें जन्मजात मिली है।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक जब उनसे पूछा गया कि वह शिवलिंग क्यों बनाती हैं तो उन्होंने कहा- शिवलिंग बनाने की कला भगवान की देन है और हम इसे प्यार से बनाते हैं। वह अपनी कला को अपनी रोजमर्रा की रोटी कमाने के तरीके के रूप में समझती है। साथ ही वह इस बात से भी सहमत नहीं है कि शिवलिंग बनाने के लिए धर्म कभी बाधा बना। 17 साल से शिवलिंग बनाने वाली आरा कहती हैं, “ये हमारी रोजी है। हिंदू-मुस्लिम से कुछ नहीं होता है। हम हिंदुस्तानी हैं। हम सब हिंदू-मुस्लिम होने से पहले भारतीय हैं। आरा ने अपने विचारों से उन ताकतों को सबक सिखाने का काम किया है जो अपने स्वार्थ के लिए हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाती हैं और उनको बांटने का काम करती हैं।

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हिंदू-मुस्लिम एकता के मिसाल के रूप में इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। सावन के मौके पर कुछ ऐसा ही नजारा सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील यूपी के बरेली जिले में देखने को मिला। रविवार को कांवड़ लेकर निकल रहे कांवडियों का स्वागत मुस्लिमों ने किया। मुसलमानों ने कांवड़ियों का स्वागत करके हिंदू-मुस्लिम एकता का मिसाल पेश की। ऐसी कई मिसाल जो लोगों उन लोगों के लिए सबक है, जो देश में अपने निजी हित के लिए धर्मों को एक-दूसरे से लड़वाते हैं।

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